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पत्रकार दिनेश चंद्र मिश्र ने टिकटार्थी बनकर एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का किया स्टिंग

लखनऊ। काले धन की महिमा अपरंपार है। नेताओं का काला धन भले ही विदेश से नहीं आ पाया लेकिन राजनीति और काले धन में किस कदर गठजोड़ है इसका अंदाजा चुनाव आयोग की सख्ती से पकड़़े गए करोड़ों रुपए को देखकर लगाया जा सकता है। टिकट बेचने की बात राजनीतिक गलियारों में अब खेल नहीं है, लेकिन काले धन का सियासी गणित समझने के लिए कैनविज टाइम्स के विशेष संवाददाता दिनेश चंद्र मिश्र पहुंच गए टिकटार्थी बनकर राजनीतिक पार्टियों की मंडी में। यह संवाददाता जब टिकटार्थी बनकर उत्तर प्रदेश विधानभवन के सामने दारुलशफा जाने वाले गेट के रास्ते सत्याग्रह मार्ग पर पहुंचा तो चंद कदम चलते ही नजर पड़ी विकास पार्टी के बोर्ड पर।

लखनऊ। काले धन की महिमा अपरंपार है। नेताओं का काला धन भले ही विदेश से नहीं आ पाया लेकिन राजनीति और काले धन में किस कदर गठजोड़ है इसका अंदाजा चुनाव आयोग की सख्ती से पकड़़े गए करोड़ों रुपए को देखकर लगाया जा सकता है। टिकट बेचने की बात राजनीतिक गलियारों में अब खेल नहीं है, लेकिन काले धन का सियासी गणित समझने के लिए कैनविज टाइम्स के विशेष संवाददाता दिनेश चंद्र मिश्र पहुंच गए टिकटार्थी बनकर राजनीतिक पार्टियों की मंडी में। यह संवाददाता जब टिकटार्थी बनकर उत्तर प्रदेश विधानभवन के सामने दारुलशफा जाने वाले गेट के रास्ते सत्याग्रह मार्ग पर पहुंचा तो चंद कदम चलते ही नजर पड़ी विकास पार्टी के बोर्ड पर।

विकास की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियों की पड़ताल करने के लिए इस पार्टी का नाम लुभावना लगा। नेताओं की तरह दिखावटी विन्रम मुद्रा के साथ हाथ जोड़े पार्टी दफ्तर के अंदर दाखिल हुआ तो सामने सूट-बूट में पार्टी अध्यक्ष दिख गए। चरणों में लोटकर प्रणाम करने की मुद्रा में अभिवादन करने के बाद चुनावी महासंग्राम में आशीर्वाद देने की आकांक्षा जाहिर की। विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतू राम रत्ना से एक घंटे की मीटिंग के बाद टिकटार्थी बने इस पत्रकार को न सिर्फ पार्टी में शामिल कराया गया बल्कि बस्ती सदर विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी घोषित करने का खत और पार्टी का झंडा भी थमा दिया। फुर्सत के क्षण बैठकी लगाने वाले एक छायाकार साथी ने भी इस यादगार क्षण को कैमरे में कैद किया। विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और टिकटार्थी बने खबरनवीस के बीच हुई रिकार्डेड वार्तालाप को सुनेंगे तो आपको छोटी-मोटी राजनीतिक पार्टियां किस कदर काले धन से चोली-दामन का रिश्ता रखती हैं, बखूबी जान सकते हैं। अब आप खुद पढि़ए टिकटार्थी बने खबरनवीस और विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतू राम रत्ना के बीच हुई बातचीत…

संवाददाता- अध्यक्ष जी चरणों में लोटकर मेरा सादर प्रणाम स्वीकार करें (पार्टी आफिस अंदर घुसते ही राष्ट्रीय अध्यक्ष को देखकर)

राष्ट्रीय अध्यक्ष- आशीर्वाद..आशीर्वाद….आइए बैठिए, मैंने आपको पहचाना नहीं, आपका परिचय !

संवाददाता- अध्यक्ष जी मेरा नाम दिनेश चंद्र मिश्र है, बस्ती जिले का रहने वाला हूं, छात्र राजनीति में सक्रिय रहा हूं, आज भी युवाओं के बीच अच्छी पैठ है। बस आपका आशीर्वाद चाहिए, इस बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरना चाह रहा हूं। आपका आशीर्वाद मिल जाए तो कुछ करके दिखा दूंगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष (बुझी आंखों में अचानक चमक आ जाती है)- आप अपना बायोडाटा दे दीजिए, विचार किया जाएगा, टिकट के लिए आवेदन बहुत हैं फिर भी आपके अंदर कुछ कर गुजरने की ऊर्जा दिखाई दे रही है। आपके नाम पर गंभीरता से विचार होगा।

संवाददाता (राष्ट्रीय अध्यक्ष को बायोडाटा थमाते हुए)- अध्यक्ष जी यह है बायोडाटा, आप आज आशीर्वाद दे दीजिए, बस्ती शहर में विकास पार्टी के नाम के साथ आपका भी नाम गूंजेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बस्ती तो जगदम्बिका पाल का इलाका है, इस बार तो उनका बेटा लड़ रहा है, उसके सामने टिक पाएंगे?

संवाददाता-अध्यक्ष जी किसान डिग्री कालेज बस्ती में छात्रसंघ पदाधिकारी रहा हूं, आज की तारीख में युवाओं के बीच अच्छी-खासी पैठ है, आप टिकट दीजिए, बस्ती के लोग ‘बस्ती का लाल-फलाने पाल’ का नारा भूल जाएंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- आपके अंदर कुछ करने का जो जज्बा है, वह अच्छी बात है, लेकिन चुनाव लडऩे के लिए कुछ खर्च-वर्च तो करना ही पड़ेगा।

संवाददाता- अध्यक्ष जी आप आदेश दीजिए, परिवार की दाल-रोटी में से समाज के लिए भी कुछ खर्च कर सकता हूं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- सबसे पहले तो आपको पार्टी की सदस्यता आपको लेनी होगी, इसके लिए 675 रुपए शुल्क तय है। टिकट का आवेदन करने के लिए दस हजार रुपए शुल्क निर्धारित है।

संवाददाता- अध्यक्ष जी युवाओं को कुछ रियायत नहीं मिल सकती है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- चुनाव लडऩा आज की तारीख में आम आदमी के वश की बात नहीं है। बड़ी-बड़ी पार्टियों में टिकट बिकता है, हम तो केवल आपसे शुल्क देने के लिए कह रहे हैं, जो पार्टी ने तय किया है।

संवाददाता- वह तो हम दे ही देंगे अध्यक्ष जी, बस पूछ रहा था कुछ रियायत मिल सकती है क्या? टिकट के लिए सबसे पहले आपके पास ही आए हैं, वैसे किन-किन पार्टियों में टिकट बिक रहा है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बहुजन समाज पार्टी से जिनको टिकट नहीं मिला, वह तो मीडिया में जाकर आरोप लगा रहे हैं, अखबार में यह सब पढ़ते ही होंगे। समाजवादी पार्टी में भी यही सब हो रहा है। पीस पार्टी ने तो बकायदा 20 से 25 लाख रुपए रेट तय कर दिए हैं। (पार्टी दफ्तर के भीतर एक सजी-संवरी अधेड़ महिला अचानक आ जाती है, अध्यक्ष जी उसको दो मिनट तक देखते हैं फिर उसको बोलते हैं, कल आओ बात करेंगे)

संवाददाता- पार्टी कब चुनाव आयोग में पंजीकृत हुई अध्यक्ष जी, विधानसभा चुनाव में कितने लोग पार्टी से लड़ रहे हैं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- सन् 96 में पार्टी का पंजीकरण हुआ, चुनाव आयोग के निमयों के अनुसार कम से कम 45 टिकट देना ही होगा, ताकि सबको एक ही चुनाव निशान मिल सके। अब तक सत्तर-पचहत्तर आवेदन आ चुके हैं?

संवाददाता- आप भी अध्यक्ष जी कहीं से चुनाव नहीं लड़ रहे हैं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- लखनऊ से चुनाव लड़ा था अटल जी के टक्कर में। विधानसभा में नहीं लड़ रहा हूं, चुनाव दौरा करना होगा। हम ही फंस जाएंगे तो कहां जाएंगे, चुनावी दौरा करना होगा ना। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी की ओर से मिर्जापुर से लालती देवी, भदोही से लड़े थे सैलानी गुप्ता, रायबरेली से परचा खारिज हो गया था, लखनऊ में भी परचा खारिज हो गया था। परचा बड़़ी बारीकी से भरना होगा। प्रस्तावक मजबूत होना चाहिए, प्रस्तावक को जांच के समय हाजिर रहना चाहिए। बेहतर होगा किसी अधिवक्ता की मदद ले लीलिए।

संवाददाता- अब तक कुल कितने टिकट दे दिए हैं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार हमको कुल 45 टिकट देना है। चुनाव आयोग के नियम के अनुसार दस फीसदी सीटों पर लडऩे के बाद ऐसे दलों को एक चुनाव निशान मिलेगा।

संवाददाता- विकास पार्टी के नाम पर क्या यह दफ्तर एलाट हुआ है अध्यक्ष जी?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- एलाट नहीं हुआ है, कब्जे पर है। मायावती तोड़वाना चाहती थी, कब्जे के आधार पर हाईकोर्ट में पेटीशन दायर किया, वहां से यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। कोई भी सरकार आए, दफ्तर देना ही होगा, जब तक कहीं दूसरे जगह पार्टी के लिए आफिस नहीं मिलेगा, यहां अपना कब्जा है।

संवाददाता- चुनावी घोषणापत्र छपा है कि नहीं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- छपे हैं, कुछ प्रेस में हैं। (दो पन्ने का घोषणापत्र का पम्पलेट थमाते हुए) यह है विकास पार्टी का घोषणापत्र। अब इसको बड़ा रूप देकर बड़े अक्षरों में छपवाया जाएगा।

संवाददाता- टिकट वाले में कुछ कनशेसन नहीं हो सकता है अध्यक्ष जी, जो दस हजार शुल्क है उसमें?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- वह पार्टी का शुल्क है, उसमें कुछ रियायत नहीं हो सकती है। दस हजार जमानत राशि भी देनी होगी। पडरौना के एक मैनेजर सिंह थे, वे अपने बूते पांच टिकट ले गए थे। तब पडरौना था, कुशीनगर नहीं बना था। नामांकन कराए.. यहां भी पैसा दिए, वहां भी पैसा दिए थे। पडरौना में वह दावा किए थे कि पांचों सीट जीत कर आएंगे। पाचों प्रत्याशियों का पूरा खर्चा उठाया था, भगवान को मंजूर नहीं था जिस दिन सिंबल मिलना था, उसी दिन उनका इंतकाल हो गया।

संवाददाता- भगवान के आगे किसी की नहीं चलती, सब ऊपर वाले की माया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बुजुर्ग थे काफी बेचारे।

संवाददाता- यहां बाकी पार्टियों में भी क्या पैसा लेकर टिकट मिल रहा है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- वो तो जिसका जितना है उतना ले रही है। बाकी पार्टियां बहुत पैसा ले रही हैं। सपा-बसपा करोड़ों रुपए ले रही है, पीस पार्टी भी लाखों ले रही है। हर आवेदन के साथ दस हजार तो सभी पार्टियां ले रही है। पार्टी मजबूत हुई तो ज्यादा ले रही है पैसा।

संवाददाता- पीस पार्टी कितना ले रही होगी?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- पीस पार्टी जैसा प्रत्याशी पा रही है, वैसा पैसा ले रही है। अखिलेश सिंह ने तो पांच करोड़ एक मुश्त दिया है। सदर विधायक ने पांच करोड़ एकमुश्त दिए। पूरी जिम्मेदारी ली पंद्रह-बीस प्रत्याशियों को लड़ाने की। उनके पास पैसे की कौन कमी?

संवाददाता- पीस पार्टी में अध्यक्ष पैसा ले रहे हैं या महासचिव?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- पीस पार्टी में पैसा एकाउंटेंट लेता है।

संवादाता- पार्टियों में पैसा जो दिया जाता है उसकी लिखा-पढ़ी थोड़े होती होगी, वह तो काला धन होता होगा?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- कहीं से भी पैसा लाएं, उससे थोड़े मतलब है। काला धन कहीं से ले आएं वह पार्टी में आकर नंबर एक का हो जाएगा। कोई दिक्कत नहीं है। काला धन पार्टी में लाइए सफेद धन हो जाएगा। चुनाव आयोग अब सख्त हो गया है, हमारे पास भी कम से कम चार बार इनकम टैक्स वाले आए।

संवाददाता- इनकम टैक्स वाले क्या आपके पास आए?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- आपका पैन नंबर क्या है? रिर्टन दाखिल किया है कि नहीं? अधिकारियों ने चुनावी शिकंजा कस रखा है। उत्तर प्रदेश में 1307 पार्टियां हैं। इसमें ज्यादा से ज्यादा पचीस पार्टियों का पता राजधानी में चला है, बाकी का पता ही नहीं पा रहे हैं। कई पार्टियां तो बैग में ही हैं, राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के बैग में ही पार्टी चलती रहती है। हमारी पार्टी का पता सत्याग्रह मार्ग लिखा है, खोजने में दिक्कत नहीं हुई। इनकमटैक्स वाले बहुत खुश हुए, कहा आपकी पार्टी को खोजने में दिक्कत नहीं हुई लेकिन बाकी पार्टियों का पता नहीं चल रहा है, कई पार्टियों का पता हम लोगों ने बताया।

संवादादाता- काला धन सफेद हो सकता है इन सब पार्टियों में? जैसे अगर यहां कोई आपको एकाध करोड़ काला धन दे तो व्हाइट हो जाएगा?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बस यही सब तो ढूंढऩा है आपको (जवाब सुनकर हंसी आ गयी)

संवाददाता- (हंसते हुए….) कहा हमें ढूंढऩा है ऐसे लोगों को, ब्लैक मनी कहां से आए जो आप तक पहुंचा जाए?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- यही करना है, जितना काला धन आएगा, सबको हम सफेद कर देंगे।

संवाददाता- अगर काले धन वाले एकाध सौदागरों को मैं पकडक़र लाऊं तो आपके पास आकर वह व्हाइट मनी हो जाएगा?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- ऐसा कोई मिलेगा तो पैसा लाने में सावधानी बरतिएगा।

संवाददाता- क्या सावधानी बरतनी होगी?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- यही कि रास्ते में काला धन कहीं कैच न हो, इनकम टैक्स वाले जगह-जगह सूंघ रहे हैं। इसको बड़ी बारीकी से देखना है। यहां आ गया और हमारे एकाउंट में चला गया तो नंबर एक को पैसा हो गया। अब यह धन कहां से आया इसका जवाब हम दे देंगे।

संवाददाता- आप क्या जवाब देंगे, अगर इसके बारे में पूछताछ हुई?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- हम कह देंगे, हमारे दो लाख कार्यकर्ता हैं। सबसे चंदा लिए है। कोई बीस लाख तो कोई पचास लाख दिया है। कहां-कहां इनकमटैक्स वाले खोजने जाएंगे। इतने कार्यकर्ताओं को गिना दिया जाएगा कि उनकी समझ में नहीं आएगा।

संवाददाता- क्या इनकमटैक्स वाले चंदा देने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं की पड़ताल नहीं करेंगे?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- कितनी पड़ताल करेंगे, जितना चाहेंगे उतने कार्यकर्ताओं का रजिस्टर बन जाएगा। उसकी चिंता आपको नहीं करनी है, बस ऐसे लोगों को खोजिए जो काला धन सफेद कराना चाह रहे हों। काला धन लाने वालों को परसेंटेज भी दिया जाएगा।

संवाददाता-काला धन लाने वालों को कितना परसेंटेज दिया जाएगा?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बीस परसेंट, पचीस परसेंट, चालीस परसेंट काला धन सफेद करके वापस दिया जा सकता है। पचास परसेंट तक दिया जा सकता है। वह कहेंगे पार्टी को चंदा दिए, हम उनका पचास प्रतिशत काला धन सफेद करके वापस दे देंगे।

संवाददाता-पिछले चुनाव मे काला धन को सफेद करने वाले कुछ लोग आए थे?

राष्ट्रीय अध्यक्ष-हां आए थे, लोकसभा चुनाव में आए थे।

संवाददाता- काला धन वालों को खोजने का तरीका क्या है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष-देखिए कारपोरेट वाले पार्टियों की दो लिस्ट बना लेते हैं, जिसके संपर्क में हैं उसके माध्यम से यह काम होता है। हमारे राष्ट्रीय महासचिव हैं टीएन पांडेय जी वहीं ऐसे कारपोरेट धरानों से संपर्क रखते है।

संवाददाता- टीएन पांडेय जी कहां के रहने वाले है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- इनका जन्मस्थान तो गोरखपुर है। रहते देवरिया में है। अब वह आलराउंडर हो गए हैं। पूरा देश घूमते हैं। कारपोरेट कंपनियों के संपर्क में रहते हैं, बड़ी -बड़ी कंपनियों को करोड़ों रुपए का इसी तरीके से लाभ पहुंचाते हैं। उनका कहना है प्रत्याशियों की लिस्ट दे दीजिए, फिर हम उन लोगों के लिए कुछ व्यवस्था करते हैं। उनके संपर्क में बहुत हैं। वह यही काम ही करते हैं।

संवाददाता- काला धन सफेद करने का काम पांडेय जी ही करते हैं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- हां वह यही काम ही करते हैं। बताया न आल राउंडर है।

संवाददाता- पांडेय जी लखनऊ नहीं आएंगे?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- आएंगे, पार्टियों की लिस्ट जारी करने के बाद उनसे फोन पर वार्ता हो जाएगी फिर वह व्यवस्था करेंगे।

संवाददाता- पांडेय जी का फोन नंबर होगा क्या?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- रोमिंग में रहते हैं, आएंगे तो संपर्क हो जाएगा।

संवाददाता- मैं चाहता हूं आपका आर्शीवाद लेते हुए टिकट व सिंबल के साथ फोटो हो जाए?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- प्रेस फोटोग्राफर वर्मा जी को बुलाता हूं। ( फोन के कुछ देर बाद वह आ जाते हैें)

संवाददाता- अध्यक्ष जी आपके साथ एक फोटो हो जाए तो बस्ती सदर विधानसभा चुनाव में जाकर प्रचार-प्रसार करने के साथ अखबार में बयान जारी कर दूं

राष्ट्रीय अध्यक्ष- ठीक है कोई दिक्कत नहीं है। चुनाव मजबूती से लडि़ए, आप ऊर्जावान हैं, कुछ कर दिखाएंगे।

संवाददाता- अध्यक्ष जी यही सोचा कि इस बार चुनाव मैदान में उतरूं, सोचा इस बार चुनाव में उतरकर किस्मत अजमाई जाए। तमाम अंगूठाछाप विधानसभा से लेकर संसद तक पहुंच गए हैं, इसलिए सोचा क्यों न मैं भी चुनाव लड़ूं। बीएससी किया, लखनऊ विश्वविद्यालय से एमजेएमसी किया है सोचा क्यों नहीं एक बार किस्मत अजमाई जाए।

(पार्टी के पैड पर इस संवाददाता की उम्मीदवारी की घोषणा की बात लिखते हुए अध्यक्ष जी कहते हैं, लक्ष्मी जी का आशीर्वाद है न आपके ऊपर?)

संवाददाता-लक्ष्मी जी यह देखकर नहीं आती हैं कि कौन कितना पढ़ा-लिखा है। मां सरस्वती के साधक हैं, इसलिए लक्ष्मी जी उतनी मेहरबान नहीं हैं। बस इतना है दाल-रोटी का खर्चा चल जाता है। अध्यक्ष जी वैसे आप जो ब्लैक मनी को मंत्र बता रहे हैं, उस काम में मैं आपकी मदद करूंगा। (अध्यक्ष जी पैसा पाने के बाद उम्मीदवारी का पत्र लिखने में मशगूल रहे)

संवाददाता- बिजली का मीटर न देखकर जब यह पूछा कि पार्टी दफ्तर में बिजली का कोई चार्ज नहीं लगता क्या

राष्ट्रीय अध्यक्ष- कोई चार्ज नहीं है।

संवाददाता- आपका आवास भी यहीं है

राष्ट्रीय अध्यक्ष- गोमती नगर

संवाददाता-गोमतीनगर में कहां रहते हैं?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- विनीत खंड में रहते हैं।

संवाददाता- नाम कहीं पूरा लिख दीजिएगा, नाम दिनेश चंद्र मिश्रा, पिता का नाम श्रीकृपाशंकर मिश्रा, नार्मल स्कूल के पीछे गांधीनगर जिला बस्ती।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- यह लीजिए आपका पत्र तैयार हो गया (उम्मीदवारी घोषणापत्र और पार्टी का झंडा सौंपते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष फोटो खिंचवाते हैं)

संवाददाता- धन्यवाद अध्यक्ष जी, अब मैं फिर आऊंगा, बाकी का शुल्क देने, अध्यक्ष जी पार्टी के झंडे के साथ एक फोटो हो जाए

राष्ट्रीय अध्यक्ष- यह लीजिए वीआईपी झंडा और उम्मीदवारी घोषणा का पत्र। (दोनों के साथ फोटो होती है)

संवाददाता- अध्यक्ष जी आज शाम का क्या प्रोग्राम है?

राष्ट्रीय अध्यक्ष- कुछ नहीं यहीं मिलूंगा।

संवाददाता- आज शाम को आप मेरा डिनर कबूल करें, अभी कुछ अपना प्राइवेट काम निपटा लूं, आपके ब्लैक मनी वाले कुछ एजेंट को खोजता हूं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष- बहुत अच्छा, बाकी बात रात को होगी।

(जय हिंद बोलकर यह खबरनवीस विकास पार्टी के दफ्तर से निकल जाता है )

पत्रकार दिनेश विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ टिकटार्थी बनकर टिकट लेने के बाद फोटो खिंचाते

पत्रकार दिनेश विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ टिकटार्थी बनकर टिकट लेने के बाद फोटो खिंचाते


संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनीता सी मेश्राम को स्टिंग वाली सीडी सौंपते पत्रकार दिनेश चंद्र मिश्र

दैनिक कैनविज टाइम्स द्वारा विकास पार्टी के टिकट बेचने के खुलासे को निर्वाचन आयोग ने गंभीरता से लिया है। खबर के तथ्य के रूप में विकास पार्टी के अध्यक्ष से हुई बातचीत की सीडी संयुक्त मुख्य निर्वाचन आयुक्त अनीता मेश्राम को सौंप दी गई है। गौरतलब है शनिवार को काले धन का सियासी गणित समझने के लिए कैनविज टाइम्स ने विकास पार्टी के कारनामों का खुलासा किया था। विधान भवन के सामने सत्याग्रह मार्ग पर स्थित विकास पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतू राम रत्ना से एक घंटे की मीटिंग के बाद टिकटार्थी बने इस पत्रकार को न सिर्फ पार्टी में शामिल कराया गया था बल्कि बस्ती सदर विधानसभा से पार्टी प्रत्याशी घोषित करने का खत और पार्टी का झंडा भी थमा दिया गया था।

समाजसेवा के नाम छोटे-मोटे राजनीतिक दलों की करतूत बताने के लिए हुए इस स्टिंग आपरेशन की खबर छपने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने स्वत: संज्ञान में लिया। लोकपथ पर घूम रहे भ्रष्ट नेताओं की पोल खोलने के लिए कैनविज टाइम्स के इस खुलासे से जुड़े साक्ष्य शनिवार की शाम को संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अनीता सी मेश्राम को सौंप दिए गए। संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा, यह एक गम्भीर मसला है, इसकी आयोग जांच करेगा। राजनीतिक गंदगी को साफ करने के पवित्र उद्देश्य से किए गए इस स्टिंग आपरेशन में आयोग को जांच में हर तरीके से मदद करने का विश्वास कैनविज टाइम्स की ओर से इस संवाददाता ने दिलाया। संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस मसले को सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मंत्रणा के बाद भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त से भी सलाह ली जाएगी।

कैनविज टाइमस में प्रकाशित दिनेश चंद्र मिश्र की रिपोर्ट

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