आशुतोष दीक्षित : बस दे दिया घुमा के झन्नाटेदार, पत्रकार न हो गया, चौराहे का घंटा हो, जिसका मन किया बस बजा दिया, अमे गुरु सवाल गलत था तो सन्नाटा थाम लेते, गरिमा का हनन हुआ तो दावा ठोक देते, पर आप तो हमार मुहल्ले के लल्लन निकले, वही ऑन द स्पॉट ठोक दिये, ऑन द स्पॉट तो ठीक है , पर अपनी आन और पत्रकार के सम्मान का तो मान रख लेते, बड़ा जल्दी गरमा गये आप ठंड़ी में…
Balendu Swami : कांग्रेसी शंकराचार्य के रूप में प्रसिद्ध स्वरूपानन्द ने एक पत्रकार को इसलिए थप्पड़ मार दिया क्योंकि उसने उनसे मोदी के प्रधानमंत्री बनने के विषय में सवाल पूछा! ये साधू हैं! ये सोने चांदी के सिंहासनों पर बैठते हैं! ये कुम्भ में उचित स्थान न मिलने पर अहंकार स्वरूप उसका बहिष्कार करते हैं! हालाँकि इस मामले में उनकी मुश्किल समझ में आ सकती है: हिन्दू ह्रदय सम्राट और राष्ट्रवादी हिन्दू और धर्म के नाम पर प्रधानमंत्री का सपना देखने वाले मोदी का विरोध अगर हिन्दू शंकराचार्य करेंगे तो हिन्दू चेले नाराज हो जायेंगे और अगर समर्थन करें तो कांग्रेसी आका नाराज होंगे और जिंदगी भर की वफादारी पर दाग लगेगा!
आशुतोष दीक्षित और बालेंदु स्वामी के फेसबुक वॉल से.
संबंधित खबरें:
91 साल का कांग्रेसी शंकराचार्य स्वरूपानंद क्रोध पर न पा सका काबू, पत्रकार को थप्पड़ मारा
xxx
आसाराम भी पत्रकारों को लप्पड़-झापड़-तमाचा-घूंसे मारने का उस्ताद था…






