अंबाला के हल्का नारायणगढ़ के विधायक व हरियाणा के संसदीय सचिव रामकिशन गुर्जर की नारयणगढ़ के पत्रकार पंकज खन्ना आत्महत्या मामले में मांगी गई अग्रिम जमानत याचिका को रद्द कर दिया गया है। नारायणगढ़ के पत्रकार पंकज खन्ना ने 10 जून 2009 को आत्महत्या कर ली थी। मरने से पहले पंकज ने अपने लिखे सूइसाइड नोट में विधायक रामकिशन गुर्जर, अजीत और विजय कुमार को जिम्मेदार ठहराया था। पुलिस ने इस मामले में तब जाकर मामला दर्ज किया था जब पंकज खन्ना के पिता यशपाल खन्ना ने पंकज की लाश को दो दिनों तक सड़क पर रखकर जाम लगा दिया था।
मामला विधायक से जुड़ा था इसलिए पुलिस भी इस मामले में कुछ करने से परहेज कर रही थी। बाद में यशपाल खन्ना सहित हजारों लोगों ने जब हाईवे जाम किया तब जाकर सरकार नींद से जागी थी और विधायक के खिलाफ मामला दर्ज किया। हालांकि पुलिस ने अन्य दो आरोपियों अजीत व विजय कुमार को आरोपी बना दिया था परन्तु छानबीन में पुलिस ने रामकिशन गुर्जर को बेकसूर बता दिया था।
पुलिस की छानबीन में रामकिशन गुर्जर को बेकसूर बताने से नाराज यशपाल खन्ना ने अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस याचिका के खिलाफ रामकिशन गुर्जर ने भी हाईकोर्ट में अपने आप को बेकूसर बताते हुए याचिका दायर कर दी थी और यह मामला लंबे समय तक अदालत में विचाराधीन था। उसी बीच यशपाल खन्ना की 20 नंवबर 2012 को मौत हो गई और शिकायतकर्ता के न रहने के कारण हाई कोर्ट से ये मामला रद्द कर दिया गया था। इसके बाद अपने भाई को इंसाफ दिलाने के लिए पंकज खन्ना की बहन प्रीती खन्ना ने ये मामला अपने हाथ में लिया और प्रीती ने इस मामले को अंबाला की अदालत में दायर किया था। अदालत ने प्रीती की याचिका को स्वीकार करते हुए संसदीय सचिव रामकिशन गुज्जर को बीती 19 सिंतबर को 19 अक्टूबर के लिए समन जारी किए थे।






