आदरणीय यशवंत भाई, आपको जानकार बहुत खुशी होगी कि झारखंड जमशेदपुर के जादूगोड़ा थाना के पूर्व थाना प्रभारी नयन सुख दाडेल, जिन्होंने मुझे और मेरे भाई को झूठा मामला दर्ज कराकर जेल भेज दिया था, पर विभागीय गाज गिरनी शुरू हो गयी है. जहां पुलिस प्रशासन में दाडेल जैसे भ्रष्ट अधिकारी हैं वहीं बहुत से ऐसे अधिकारी भी हैं जिनकी वजह से जनता का विश्वास कानून व्यवस्था पर टिका हुआ है.
जादूगोड़ा के पूर्व थाना प्रभारी नयन सुख दाडेल ने जादूगोड़ा के अवैध कारनामों को उजागर करने की वजह से गुस्साकर हमें सबक सिखाने के उद्देश्य से एक साल में चार–चार झूठा मुकदमा दर्ज कराया. इसमें से दो को तो वरीय अधिकारियों ने जांच कर असत्य करार दिया. इसके बाद भी एक और झूठा जमीनी मामला दर्ज कर झूठी गवाही तैयार कर हमें जेल भेजा गया. सबक सिखाने एवं बेइज्जती करने के उद्देश्य से पैदल ही सरेबाजार घुमाया गया. इतने से भी थाना प्रभारी का मन नहीं भरा तो कानून की धज्जियां उड़ाते हुए बिना गिरफ्तारी ज्ञापन बनाए ही हमें न्यायालय की जगह मौभंडार आउटपोस्ट भेजा गया जहां पर थानेदार के खास लोग सहायक अवर निरीक्षक सुशील डांगा एवं सिपाही संजय राम ने वहां के सहायक अवर निरीक्षक सीताराम सिंह के सहायता से हम दोनों भाइयों पर जानलेवा हमला कर दिया.
सुशील डांगा ने चाक़ू से मेरी बांयीं कलाई काट दी एवं संजय राम ने मेरे भाई का हाथ एवं पैर कई जगह काट दिया. हम दोनों भाई जान बचाकर चिल्लाते हुए बाहर भागे एवं जनता की भीड़ की वजह से हमारी जान बच गयी. इस घटना के कारण हम दोनों भाई को चार दिन टाटा मुख्य अस्पताल में इलाज़ कराना पड़ा. इस पूरे मामले से हमने वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जिसके बाद कोल्हान के डीआईजी अरुण कुमार सिंह ने पूरे मामले की जांच की एवं थाना प्रभारी को दोषी पाया. कोल्हान डीआईजी के बाद पूरे मामले की जांच सीआईडी द्वारा की गयी और सीआईडी की जांच रिपोर्ट में भी थाना प्रभारी को दोषी पाया गया. यशवंत जी, अब मैं यह प्रतीक्षा कर रहा हूँ कि दोषी पाये जाने के बाद कब विभाग द्वारा पूर्व थाना प्रभारी पर कार्रवाई की जायेगी क्योंकि इस मामले को ६ माह से अधिक हो चुके हैं.
यशवंत जी, हमारे ऊपर किस प्रकार से फर्जी गवाही बनायी गयी, इसका एक छोटा उदहारण दे रहा हूँ. एक मुख्य गवाह धनंजय प्रजापति जिसका नाम प्राथमिकी में भी गवाही के रूप में अंकित है. इसने गवाही दी है कि १६/०३/२०१३ को सुबह आठ बजे हम दोनों भाई ने वादी से गाली गलौच किया है, जबकि सच्चाई यह है कि यह धनंजय प्रजापति यूसिल माइंस तुरामडीह में काम करता है जो घटना स्थल से २० किलोमीटर दूर है एवं वह १६/०३/२०१३ को सुबह ७.३० बजे से दोपहर २.३० बजे तक डयूटी किया था. अब आप इसी से समझ सकते है कि दाडेल जैसे पुलिस अधिकारी किस प्रकार से निर्दोषों को फंसाते हैं.
संतोष अग्रवाल
पत्रकार
जादूगोड़ा
मूल खबर…
जादूगोड़ा के थानेदार ने दो पत्रकार भाइयों को फर्जी फंसाया और जेल भेज दिया






