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पत्रकार शिवानी मर्डर में आरके शर्मा को नोटिस

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा से दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा जिसमें उसे शिवानी भटनागर हत्याकांड मामले में दोषमुक्त करार दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में श्री भगवान और सत्य प्रकाश को भी नोटिस जारी किए। दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 में इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी की उसके पूर्वी दिल्ली स्थित फ्लैट में हुई हत्या के सनसनीखेज मामले में इन दोनो को भी बरी कर दिया  दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के 12 अक्तूबर 2011 के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें शर्मा तथा दो अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्त आईपीएस अधिकारी आरके शर्मा से दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर सोमवार को जवाब मांगा जिसमें उसे शिवानी भटनागर हत्याकांड मामले में दोषमुक्त करार दिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने इस मामले में श्री भगवान और सत्य प्रकाश को भी नोटिस जारी किए। दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 1999 में इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार शिवानी की उसके पूर्वी दिल्ली स्थित फ्लैट में हुई हत्या के सनसनीखेज मामले में इन दोनो को भी बरी कर दिया  दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के 12 अक्तूबर 2011 के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें शर्मा तथा दो अन्य को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि हालांकि शिवानी की हत्या का कारण स्पष्ट नहीं है लेकिन यह सवाल उठते हैं कि क्या प्रदीप शर्मा ने अकेले या आर के शर्मा और अन्य के कहने पर या किसी और के कहने पर इस कृत्य को अंजाम दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष हत्या का कारण साबित नहीं कर पाया और बरी किए गए तीनों सह आरोपियों और 23 जनवरी 1999 को पूर्वी दिल्ली के नवकुंज अपार्टमेंट में शिवानी की हत्या करने वाले प्रदीप शर्मा के बीच संबंध भी साबित नहीं कर पाया।

पीठ ने अभियोजन पक्ष की यह दलील खारिज कर दी कि शिवानी की हत्या पूर्ववर्ती एयर इंडिया के सतर्कता निदेशक आर के शर्मा के कहने पर की गई क्योंकि शर्मा अपने कथित प्रेम संबंधों से पीछा छुड़ाना चाहता था। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि शिवानी के पास कुछ गोपनीय दस्तावेज थे और उसने शर्मा को धमकी दी थी कि वह दस्तावेज सार्वजनिक कर उसकी असलियत उजागर कर देगी। पिछले साल 12 अक्तूबर को हाईकोर्ट द्वारा बरी किए जाने से पहले तक शर्मा ने करीब दस साल जेल में बिताए। अपराध में कथित भूमिका सामने आने के बाद उसे 23 अगस्त 2002 को बर्खास्त कर दिया गया था और 27 सितंबर 2002 को उसने अदालत में समर्पण किया था। निचली अदालत ने उसे और तीन अन्य को 24 मार्च 2008 को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। (एजेंसी)

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