23 जून की रात 12 बजे मैं मुण्डेरवा थाना क्षेत्र के खजौला चौकी के पास नेशनल हाईवे 28 पर पहुंचा। जैसे ही 12 बजकर 5 मिनट हुये खजौला चौकी के दो सिपाही एक मोटर साइकिल पर सवार होकर टोल प्लाजा की तरफ भागे। यह सारी तस्वीरें मैं गोपनीय कैमरे से कैद रहा था। कुछ ही देर बाद मैंने देखा दोनों सिपाही भैंसों से लदी एक ट्रक को रोक लिया। दोनों में से एक सिपाही ट्रक के अंदर जाकर सेटिंग में जुट गया। 10 मिनट के बाद वह सिपाही ट्रक से उतरा और अपने साथी सिपाही के साथ चौकी वापस चला गया।
इसी तरह से दर्जनों ट्रकों के साथ सिपाही की वसूली होती रही। जिस ट्रक से इन सिपाहियों ने वसूली की थी मैंने उसे अपनी टीम के साथ मिलकर पलेट नगर टोल प्लाजा पर रोका और पूछताछ की। पता चला कि सिपाहियों ने ट्रक वाले से 1500 रुपये लिये हैं। ट्रक में लदे पशुओं के बारे में पूछा तो पता चला कि ये सभी भैंस कटने के लिये ले जाई जा रही हैं। इतनी जानकारी मिलने के बाद मैंने एसपी आनन्द कुलकर्णी को फोन से सूचना दी। वह भी मौके पर पहुंच कर अपने तस्कर पुलिस कर्मियों की हकीकत को देखा। लगभग आधे घंटे तक एसपी की मौजूदगी में मैंने और मेरे साथियों ने 3 ट्रक को और इस तरह के कार्य में लिप्त पाये जाने पर जानकारी देकर उन्हें पकड़वाया।
एसपी साहब अपने सिपाहियों की हकीकत जानने के लिये चुपके से चौकी पर भी गये थे, जहां उन्हें कुछ भी सबूत नहीं मिले और वे वापस लौट गये। एसपी ने हमें इंटरव्यू में कहा कि इस मामले में जांच कर रहे हैं और कार्रवाई करेंगे। मगर अपने पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करना उनके लिये आसान नहीं। फिर डीआईजी ने मेरे इस स्टिंग आपरेशन की फुटेज देखी और एसपी को तुरन्त चौकी के सभी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने का आदेश दिया। कुछ ही देर बाद एसपी ने खजौला चौकी से सभी पुलिस कर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया।
इस स्टिंग आपरेशन की खबर करने के बाद मेरे उपर ऐसे ऐसे लोगों का दबाव था, जिसे मैं आपसे शेयर नहीं कर सकता। मगर इतना जरूर कहुंगा कि पत्रकारिता में भी कुछ बेईमान लोग हैं जो हमें ईमानदारी के रास्ते से भटकाते हैं। इस स्टिंग आपरेशन में हाईवे पर पशुओं से भरे ट्रक ने हमें कुचलने का पूरा प्रयास किया मगर कामयाब नहीं हो सका और मेरी मेहनत रंग लाई कि गलत करने वाले पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया।
सतीश श्रीवास्तव
बस्ती
यूपी






