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सुख-दुख...

पत्रकार से बदसलूकी करने वाले हुड्डा ने फिर दी मीडिया को नसीहत

पानीपत । एक दिन पहले पत्रकारों को हड़काने के बाद अब हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों को सच लिखने की सलाह दे डाली है। यही नहीं उन्होंने तो दुख जताकर यहां तक कह दिया है कि मीडिया अपने लक्ष्य से दूर होता जा रहा है और खोजी पत्रकारिता दूर होती जा रही है। हुड्डा का यह बयान किसी प्रेस कांफ्रेंस या प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से नहीं आया है, बल्कि पत्रकारों के एक संगठन के सम्मेलन के दौरान बयां किया गया है। यह सम्मेलन पानीपत में हुआ। जिसमें हुड्डा बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
पानीपत । एक दिन पहले पत्रकारों को हड़काने के बाद अब हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों को सच लिखने की सलाह दे डाली है। यही नहीं उन्होंने तो दुख जताकर यहां तक कह दिया है कि मीडिया अपने लक्ष्य से दूर होता जा रहा है और खोजी पत्रकारिता दूर होती जा रही है। हुड्डा का यह बयान किसी प्रेस कांफ्रेंस या प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से नहीं आया है, बल्कि पत्रकारों के एक संगठन के सम्मेलन के दौरान बयां किया गया है। यह सम्मेलन पानीपत में हुआ। जिसमें हुड्डा बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे थे।
 
शुक्रवार को वे अंबाला में पत्रकारों पर भड़क उठे थे, जब एक पत्रकार ने हरियाणा सिविल सर्विस के अफसरों की भर्ती से संबंधित सवाल उठाते हुए हुड्डा से जवाब मांगा था। दरअसल दैनिक भास्कर अखबार ने यह समाचार प्रकाशित किया था कि अफसरों की भर्ती में मुख्यमंत्री के रिश्तेदार और हरियाणा के विधायकों व अधिकारियों के रिश्तेदारों की भर्ती की गई है। हुड्डा एक कार्यक्रम के सिलसिले में अंबाला पहुंचे तब उनसे सवाल किया गया था। तब उनका गुस्सा साफ देखने को मिला था।
 
अंबाला की घटना को अभी एक ही दिन बीता था कि हरियाणा के मुख्यमंत्री आज पानीपत में सलाहकार की भूमिका में आ गए। सम्मेलन पत्रकारों के संगठन का था, इसलिए उन्हें भी मौका मिल गया। अपने दिल में जो कुछ भड़ास थी, वह जमकर निकाली। अब यहां हुड्डा का विरोध करने वाला भी कोई नहीं था। करता भी कौन, किसी में इतनी हिम्मत है ही कहां। जब आप अपने सम्मेलन में पत्रकारों का एक दिन पहले अपमान करने वाले को मुख्य अतिथि ही बुला रहे हैं तो फिर हिम्मत कहां से पैदा होगी। किसी ने जिक्र तक करना उचित नहीं समझा। नहीं तो होना तो यह चाहिए था कि हुड्डा का कार्यक्रम ही स्थगित कर देते या फिर अगर वे आ ही गए तो मंच से ही अंबाला की घटना की कड़े शब्दों में मुख्यमंत्री के सामने ही निंदा की जाती। अब चुप रहने की बाद में कीमत भी मिली। मुख्यमंत्री ने संगठन को दस लाख रूपए देने की घोषणा जो कर डाली। 
 
अब बात हुड्डा की सलाहकार संपादक वाली भूमिका की हो जाए। सम्मेलन के दौरान मंच से अपने संबोधन में भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब एक बार शुरू हुए तो फिर बोलते ही चले गए। बकौल हुड्डा पत्रकार को खबर लिखते समय सच्चाई तक जाने की आवश्यकता है और उसको एक सकारात्मक सोच के साथ चलना चाहिए। सकारात्मक सोच से समाज व देश का फायदा होता है। लेकिन यह दुःख की बात है कि मीडिया अपने लक्ष्य से दूर होता जा रहा है। खोजी पत्रकारिता खत्म होती जा रही है। हुड्डा यहीं नहीं रूके। आगे उन्होंने आजादी से पूर्व पत्रकारिता का जिक्र कर डाला। बोले आजादी से पूर्व जिस प्रकार पत्रकारों का लक्ष्य था, उसी मिशन भावना से ही आज एक पत्रकार को अपनी लेखनी का प्रयोग करना चाहिए तभी एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकेगा। यही नहीं हुड्डा यह बताना भी नहीं भूले कि हरियाणा में कांग्रेस सरकार ने पत्रकारों के लिए अनेक कल्याणकारी कार्यक्रम किए हैं। हरियाणा देश का ऐसा पहला राज्य है, जहां मीडिया नीति लागू की गई है। हर नीति में सुधार की सदैव सम्भावना होती है और वे चाहते हैं कि हरियाणा और अधिक बेहतर मीडिया नीति लेकर आए, जिससे पत्रकारों के लाभ के साथ-साथ समाज का भी भला हो।
 
हुड्डा की इन दिनों इस कार्यशैली से तो ऐसा लगता है कि हरियाणा में पत्रकारों के लिए आने वाले दिन ठीक नहीं लगते। हो सकता है कि आगे हुड्डा साहब कागज कलम लेकर खुद ही खबर लिखकर न दिखा दें।
 
हरियाणा से दीपक खोखर की रिपोर्ट
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