: अखबारी युद्ध में नैतिकता ताक पर : मीडिया के बाजारीकरण ने नैतिकता को ताख पर रख दिया है. नैतिकता के बने बनाए नियम-प्रतिमान रोज टूट रहे हैं. किसी तरह एक दूसरे से आगे निकले की होड़ और भेड़चाल में अखबार और अखबार के लोग किसी भी हद तक जाने और गिरने को तैयार हैं. यहां कोई नियम नहीं है कोई लक्ष्मण रेखा नहीं है. मीडिया की स्थिति ऐसी हो गई है कि यह न तो शुद्ध रूप से सरोकार रहा और न ही शुद्ध रूप से प्रोफेशन.
ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश के इंदौर में देखने को मिला है. नईदुनिया और पत्रिका ने एक दूसरे को पीछे छोड़ने के लिए हद तक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इंदौर में पत्रिका के डिस्ट्रीब्यूटर ने हॉकरों को नईदुनिया कम करने और उसकी जगह पत्रिका का सर्कुलेशन बढ़ाने पर ग्रीष्म कालीन ऑफर दिया है. वहीं नईदुनिया ने अखबार में इस मामले को छापकर विरोध किया है तथा इसे अपनी लकीर बड़ी करने की बजाय लकीर को मिटाने वाली हरकत करार दिया है.
पत्रिका के डिस्ट्रीब्यूटर फडसे द्वारा हॉकरों के लिए जारी ग्रीष्मकालीन ऑफर –
– 50 प्रतियां बढ़ाने पर बैष्णोदेवी यात्रा, आने-जाने का खर्च 4 व्यक्तियों के लिए फणसे न्यूज पेपर एजेंसी की तरफ से दिया जाएगा. नई दुनिया की 50 प्रतियां पत्रिका में कनवर्ट करने पर पाठकों का नाम, पता देना होगा.
– नईदुनिया की जगह पत्रिका की 40 प्रतियां लगाने पर शिर्डी यात्रा का आ ने जाने खर्च 2 व्यक्तियों के लिए. फणसे न्यूज एजेंसी की तरफ से.
– नईदुनिया की जगह पत्रिका की 30 प्रतियां लगाने पर शिवाजी होटल में डिनर 4 व्यक्तियों के लिए. फणसे न्यूज एजेंसी की तरफ से.
– नई दुनिया की जगह पत्रिका की 25 प्रतियां लगाने पर 1 छोटा कूलर फणसे न्यूज एजेंसी की तरफ से.
– नईदुनिया की जगह पत्रिका की 15 प्रतियां लगाने पर 1 छत पंखा फणसे न्यूज एजेंसी की तरफ से.
लागू की गई स्कीम सिर्फ खजुरी बाजार के वितरकों के लिए है.
नोट– बढ़ी हुई प्रतियों के ग्राहकों का नाम, पता देना अनिवार्य है.
बढ़ी हुई प्रतियों को को छह माह तक जारी रखना अनिवार्य है.

पत्रिका के डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा हॉकरों को दिया गया ऑफर

नईदुनिया में प्रकाशित विनय छजलानी का लेख






