आजकल अखबारों से तेवर गायब हो गया है. लेकिन कभी कभी कहीं कहीं कुछ अखबार तेवर दिखाते नजर आ जाते हैं. राजस्थान पत्रिका समूह ने छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमन सिंह के घटिया कारनामों का साहस के साथ भंडाफोड़ किया है. रमन सिंह ने किस तरह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मध्य प्रदेश में अपने करीबियों को खदानें दिलवाई, इसकी विस्तृत रिपोर्ट पत्रिका ने प्रकाशित किया. हालांकि इन खबरों से रमन सिंह पूरी तरह बौखला गए हैं और पत्रिका समूह को नेस्तनाबूत करने की धमकियां दे रहे हैं लेकिन पत्रिका ग्रुप बिना डरे सच्चाई का खुलासा करता जा रहा है. पेश है पत्रिका में प्रकाशित रमन सिंह से संबंधित खबर जिससे सीएम साहब को भयंकर गुस्सा आ गया है. -एडिटर, भड़ास4मीडिया
07.12.2011
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपने ससुरालियों को सीधी जिले में दिलाई खदानें
: कांग्रेस ने की सीबीआई से जांच कराने की मांग, कहा- भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कर्नाटक की तरह उठाए कदम : बेल्लारी से बड़ा खनिज घोटाला! : जयपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए मध्यप्रदेश के सीधी जिले में अपने ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों को बेशकीमती खदानें दिला दी हैं। डॉ. रमन सिंह के ससुरालियों को ९२० हेक्टयर जमीन पर आयरन, निकिल व मैगनीज का खनि पट्टा दिया गया है। कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इसे बेल्लारी से बड़ा खनन घोटाला बताते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने खदानों की लीज तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए कहा है कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को कर्नाटक और उत्तराखंड की तरह यहां भी कदम उठाना चाहिए। मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष अजय राहुल सिंह ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए इसकी जांच कराने की मांग की। उन्होंने दस्तावेज प्रस्तुत किया है कि डॉ. रमन सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने ससुराल पक्ष के रिश्तेदारों के नाम सीधी जिले के गोपाल बनास तहसील के ग्राम अंधरी गड़ई में ९२० हेक्टेयर जमीन पर सात खदानों का खनि पट्टा करा लिया है।
९ दिसम्बर २०१० को जारी आदेश में मेसर्स नाड प्रा.लि. को सीधी के २४५८ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर आयरन ओर, मैग्नीज ओर, टाइटेनियम, वेनेडियम एवं निकिल खनिजों की खोज के लिए ४ फरवरी २००९ से ३ फरवरी २०१२ तक की अवधि के लिए रिकोनेसेंस परमिट स्वीकृत किया गया है। यह फर्म विकास सिंह चौहान के नाम से है। मेसर्स नाड प्रा.लि. का कार्यालय सी-१२ रविनगर, ईएसी कालोनी, रायपुर ४९२००१ है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
केन्द्र करे कार्रवाई : पटेल
इस मामले पर कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की खनिज सम्पदा बेचने के बाद डॉ. रमन सिंह की नजर अब पड़ोसी मध्यप्रदेश तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक और उत्तराखंड में हुए घोटालों की तुलना में यह बड़ा घोटाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ बड़े नेताओं का डॉ. सिंह का संरक्षण प्राप्त है। इस कारण पार्टी नेतृत्व उन पर कार्रवाई करने से घबराता है। केंद्र सरकार अगर इसकी जांच कराए, तो पता चलेगा कि देश की सबसे भ्रष्टतम सरकार छत्तीसगढ़ की होगी और मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के इतिहास में डॉ. रमन सिंह पहले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे, जो इतने भ्रष्ट हैं। उन्होंने दावा किया कि डॉ.रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश की तुलना में तीन गुना अधिक खदानें रसूखदारों को गलत तरीके से आवंटित कर दी हैं। यहां भ्रष्टाचार का यह आलम है कि मंत्री रुपयों में नहीं, डॉलरों में रिश्वत मांगते हैं।
हर फोरम में जाएंगे : जोगी
पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने इसे बेल्लारी से बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि चूंकि मामले में मुख्यमंत्री का नाम आया है, लिहाजा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए भाजपा नेतृत्व ने जिस तरह कर्नाटक और उत्तराखंड में हिम्मत दिखाई है, छत्तीसगढ़ में भी वही हिम्मत दिखानी चाहिए। जोगी ने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर हर फोरम पर जाकर लड़ाई लड़ेगी। खदानों की लीज तुरंत निरस्त करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र व अदालत तक इस मामले को ले जाया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह पर लगाए गए आरोपों पर प्रदेश भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है। पार्टी की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में आरोपों को तो बेबुनियाद बताया है, पर इसमें किसी प्रवक्ताा के नाम का जिक्र नहीं है। विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि खदान आवंटन में जिस नाड प्रा.लि. का जिक्र किया गया है, उसके प्रमुख प्रशांत सिंह ने जानकारी दी है कि उनके परिवार का डॉ. रमन सिंह से कोई सम्बंध नहीं है। मध्यप्रदेश में आवंटित खदानें उनकी पत्नी के नाम से हैं और आवंटन में कोई अनियमितता नहीं हुई है।
डॉ. रमन सिंह के ससुरालियों को मध्यप्रदेश में खदानें दिलाने के मामले पर मंगलवार को एक चैनल ने भी रिपोर्ट प्रसारित की। दस्तावेजी प्रमाणों के साथ चैनल ने बताया कि डॉ. रमन सिंह ने किस तरह अपने रिश्तेदारों को बेशकीमती जमीन पर खदानें दिलाई हैं। चैनल पर इस खबर के प्रसारित होने के साथ ही छत्तीसगढ़ के राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया। संगठन महामंत्री रामप्रताप सिंह मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। आला अफसर भी वहां पहुंच गए। खबर के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन सह महामंत्री सौदान सिंह भी बुधवार को सुबह राजधानी पहुंच रहे हैं।
क्या है बेल्लारी खनन घोटाला
कर्नाटक के खनिज बहुल जिले बेल्लारी में यहां के चर्चित रेड्डी बंधुओं जी. करुणाकर रेड्डी, जी. जनार्दन रेड्डी और जी. सोमशेखर रेड्डी के स्वामित्व वाली ओबलापुरम माइनिंग कम्पनी (ओएमसी) खनन करती है। ये रेड्डी बंधु उस दौरान चर्चा में आए जब भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी से पर्चा भरा। सुषमा तो हार गईं, लेकिन रेड्डी बंधु भाजपा में रातोरात स्टार बन गए।
कर्नाटक में जब भाजपा की सरकार बनी तो जी. जर्नादन रेड्डी खनन मंत्री बने। प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए रेड्डी बंधुओं ने बेल्लारी के निकट आंध्रप्रदेश की सीमा के अंदर तक जाकर माइनिंग कराई। इस अवैध खनन से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। आंध्र सरकार की शिकायत पर सीबीआई ने दिसम्बर 2009 में कम्पनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक के तत्कालीन लोकायुक्तन्यायमूर्ति संतोष एन. हेगड़े को अवैध खनन आरोपों की जांच सौंपी गई। न्यायमूर्ति हेगड़े ने करीब 5000 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2009 से मई 2010 के बीच चौदह महीने में अवैध खनन से लगभग 1800 करोड़ रु. से अधिक घोटाला हुआ है। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, उनके मंत्रियों और खननकर्मियों की संलिप्तता थी। इस रिपोर्ट के बाद येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। जबकि खनन मंत्री जर्नादन रेड्डी जेल में हैं।
९ दिसम्बर २०१० को जारी आदेश में मेसर्स नाड प्रा.लि. को सीधी के २४५८ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर आयरन ओर, मैग्नीज ओर, टाइटेनियम, वेनेडियम एवं निकिल खनिजों की खोज के लिए ४ फरवरी २००९ से ३ फरवरी २०१२ तक की अवधि के लिए रिकोनेसेंस परमिट स्वीकृत किया गया है। यह फर्म विकास सिंह चौहान के नाम से है। मेसर्स नाड प्रा.लि. का कार्यालय सी-१२ रविनगर, ईएसी कालोनी, रायपुर ४९२००१ है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी इस मामले की जांच कराने की मांग की है।
कर्नाटक में जब भाजपा की सरकार बनी तो जी. जर्नादन रेड्डी खनन मंत्री बने। प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए रेड्डी बंधुओं ने बेल्लारी के निकट आंध्रप्रदेश की सीमा के अंदर तक जाकर माइनिंग कराई। इस अवैध खनन से सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। आंध्र सरकार की शिकायत पर सीबीआई ने दिसम्बर 2009 में कम्पनी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक के तत्कालीन लोकायुक्तन्यायमूर्ति संतोष एन. हेगड़े को अवैध खनन आरोपों की जांच सौंपी गई। न्यायमूर्ति हेगड़े ने करीब 5000 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में कहा कि मार्च 2009 से मई 2010 के बीच चौदह महीने में अवैध खनन से लगभग 1800 करोड़ रु. से अधिक घोटाला हुआ है। इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, उनके मंत्रियों और खननकर्मियों की संलिप्तता थी। इस रिपोर्ट के बाद येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। जबकि खनन मंत्री जर्नादन रेड्डी जेल में हैं।
साभार : पत्रिका





