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पवन बजाज की पोल खोलने की सजा पा रहे हैं वेब जर्नलिस्‍ट मुकेश भारतीय

भारत में कानून की परिभाषा अब थोड़ी बदल गयी है। शरीफों के लिए कानून डंडा है और दबंगों को लिए सुविधा। 31 मई की रात्रि 12.30 बजे झारखंड की राजधानी राँची में उपर्युक्त परिभाषा चरितार्थ हुई। राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय को राँची शहर से 22 किलोमीटर दूर ओरमाझी स्थित उनके घर से झारखंड पुलिस के गोंदा थाना एवं ओरमाझी थाना के 9 राइफलधारी जवानों ने जिस प्रकार से एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करते हुए धर दबोचा, ऐसा किसी खूंखार आतंकवादी को पकड़ने में किया जाता है।

भारत में कानून की परिभाषा अब थोड़ी बदल गयी है। शरीफों के लिए कानून डंडा है और दबंगों को लिए सुविधा। 31 मई की रात्रि 12.30 बजे झारखंड की राजधानी राँची में उपर्युक्त परिभाषा चरितार्थ हुई। राजनामा डॉट कॉम के संचालक-संपादक मुकेश भारतीय को राँची शहर से 22 किलोमीटर दूर ओरमाझी स्थित उनके घर से झारखंड पुलिस के गोंदा थाना एवं ओरमाझी थाना के 9 राइफलधारी जवानों ने जिस प्रकार से एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार करते हुए धर दबोचा, ऐसा किसी खूंखार आतंकवादी को पकड़ने में किया जाता है।

मुकेश भारतीय के ओरमाझी स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल (छत) पर दूसरे के मकान पर चढ़कर धर दबोचा गया, साथ ही उनका लैपटॉप, मोबाइल एवं मोडम भी पुलिस वाले उठाकर ले गये। पुलिस की इस बर्बरतापूर्ण व्यवहार से झारखंड की कानून-व्यवस्था तो शर्मसार हुई ही, मानवाधिकार की धज्जी भी उड़ाई गयी। झारखंड में घटित इस बर्बर पुलिसिया कहर पर यहाँ के स्थानीय प्रिंट मीडिया एवं टीवी चैनलों को कोई फर्क नहीं पड़ा। किसी ने इस बात की सुध लेने की कोशिश नहीं की, जबकि राँची स्थित सभी प्रिंट मीडिया, चैनलों एवं समाचार एंजेसियों को उनकी पत्नी रात भर फोन करके अपना दुखड़ा सुनाती रहीं।

मुकेश को आतंकवादी की तरह धर दबोचने के पीछे की कहानी यह है कि पवन बजाज राँची का एक दबंग बिल्डर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि झारखंड सरकार के मुखिया अर्जुन मुण्डा का खासम-खास आदमी है। उस पर एक कोयला व्यावसायी की हत्या का भी इलजाम है। इससे संबंधित मामला सीबीआई में लंबित है। ( http://raznama.com/?p=12481) राँची में आम चर्चा है कि पवन बजाज ने पायनियर अखबार के राँची संस्करण की फ्रेंचाइजी पायनियर के मालिक चंदन मित्रा से 1 नवम्बर को अपने नाम 80 लाख देकर करा लिया है, जो  31 अक्तूबर 2011 तक विनोद सरवगी के नाम पर था। इस अखबार में जो पैसा लगा है, वह सूबे के मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा का है। दिखाने के लिए पवन बजाज द्वारा संचालित किया जा रहा है। और सरकार के एक महत्वपूर्ण विभाग के बड़े अधिकारी से लेकर छोटे अधिकारी तक इसमें अपना योगदान दे रहे हैं।

कहा तो यह भी जाता है कि शाम 5 बजे के बाद सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक आलोक कुमार गुप्ता, सहायक निदेशक अजयनाथ झा, सहायक निदेशक एवं अपर सचिव राजीव लोचन बक्शी भी पायनियर के दफ्तर में देखे जाते हैं। यानी सरकारी काम के साथ-साथ पायनियर अखबार को चलाने का जिम्मा भी इन्हीं अधिकारियों को सौंपा गया है। इस में क्या सच्चाई है, मुकेश द्वारा बेव साइट पर प्रकाशित किये गये समाचार के बाद भी किसी ने अभी तक इसका खंडन नहीं किया है।इसी आशय का समाचार मुकेश भारतीय ने अपने वेबसाइट राजनाम डॉट कॉम (http://raznama.com/?p=12443) पर प्रकाशित किया था। इसी समाचार के असलियत से तिलमिलाकर मुख्यमंत्री सचिवालय के एक अधिकारी के इशारे पर पवन बजाज ने मुकेश भारतीय पर 15 लाख की रंगदारी मांगने के आरोप लगा कर गोंदा थाना में एक एफआईआर दर्ज करवा कर उन्‍हें भारतीय दण्ड संहिता की धारा 385, 387, 66 ए, 66 बी एवं 67 के तहत 11 बजे राँची स्थित हटवार के बिरसा मुंडा केन्द्रीय कारागार में भेज दिया गया।

इस पुलिसिया वारदात से यह साफ जाहिर होता है कि झारखंड में लोकतंत्र का लोप हो गया है। और व्यवस्था गुंडे मवालियों के हाथों में आ गयी है। मुंडा सरकार में नागरिक सुरक्षा भारी खतरे में है। जंगल राज का द्योतक झारखंड की व्यवस्था हो गयी है, जहाँ किसी की जान-माल की सुरक्षा अनिश्चित है। इसी का परिणाम है कि आये दिनों दिन-दहाड़े बलात्कार, छिनैती, चोरी, अपहरण एवं हत्या आम बात हो गई है। एक बात उल्लेखनीय है कि अर्जुन मुण्डा को हेलीकॉप्टर दुर्घटना बाद से अपने बिस्‍तर पर ही पड़े-पड़े उसी मजबूरी की हालत में राजकाज भी चलना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की लाचारी का गलत फायदा उठाते हुए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक कनीय आईएफएस अधिकारी, दलालों, बिल्डरों और दबंगों के साथ मिल कर अपनी मनमानी चला रहे हैं। इसी मनमानी का एक नमूना है कि एक स्वाभिमानी वेब-पत्रकार मुकेश भारतीय को सुनियोजित रूप से एक साजिश के तहत रंगदार बनाने पर तुले हुए हैं।

यहाँ एक अहम सवाल खड़ा होता है कि मुकेश भारतीय पर पवन बजाज के अखबार पायनियर के काली करतूतों को उजागर करने के बाद ही रंगदारी मांगने का आरोप क्यों लगया गया? यदि मुकेश को रंगदारी ही मांगनी होती तो पहले भी मांग सकता था। इस सवाल से यह साफ जाहिर हो जाता है कि पवन बजाज एवं मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों की कुत्सित मंशा कितनी खतरनाक एवं खौफनाक था। वहीं उन्होंने यह दिखला दिया कि कानून-थाना-पुलिस वे अपने ठेंगे पर जब चाहें रख सकते हैं। यह बड़े आश्चर्य की बात है कि 24 घंटे के अंदर प्राथमिकी दर्ज कर मुकेश की गिरफ्तार कर ली जाती है और जेल भी भेज दिया जाता है। इस पर अनुसंधान करने की कोई आवश्यकता भी महसूस नहीं की गयी। क्या झारखंड की पुलिस सब के साथ ऐसी ही करती है?

यह भी ज्ञात हो मुकेश भारतीय द्वारा सूचना एवं जन संपर्क विभाग से कुछ सूचनाधिकार के तहत कई बिन्दुओं पर सूचना मांगी थी।  http://raznama.com/?p=12396 उक्त सूचना को समय बीत जाने के बाद भी नहीं देने के बाद, जब मुकेश ने अपनी बात को विभाग के अपर सचिव-सह-प्रथम अपीलीय पदाधिकारी राजीव लोचन बक्शी के सामने रखी तो वे मुकेश को यह आश्वासन दिया कि आपको 5 दिनों के भीतर सूचना दिलवा दी जायेगी, फिर 18 दिनों बाद पुनः इसी बात को उक्त अधिकारी के समक्ष दोहराया तो उक्त अधिकारी ने कल यानि कि 31 मई 2012 को सूचना देने के लिए व्यक्तिगत रूप से अपने कार्यालय में बुलाया था, लेकिन भारत बंद होने के कारण मुकेश सूचना लेने नहीं पहुँचा। और इसी तिथि की आधी रात को उसे पुलिस द्वारा धर दबोचा गया। उक्त घटना के बाद पुलिस की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ गयी है। ऐसी हालात में उक्त पत्रकार को न्याय दिलाने के लिए पवन बजाज एवं संबंधित  अधिकारियों के संदेहात्मक कृत्यों की सीबीआई एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा जाँच कराई जाय।

राम प्रकाश तिवारी

संपादक

सर्चटाइम्स (पाक्षिक समाचार पत्र)

रांची

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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