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पहली बार किसी फिल्म को देखकर रात भर नींद नहीं आई

Mohammad Anas : शाहिद आज़मी मेरा हीरो है, उस पर बनी फिल्म 'शाहिद' देश भर में चल रही है. फिल्म ज़रूर देखें. जब बहुत से नौजवान हिंसा , तिरस्कार ,अपमान एवं नफरत के बाद बंदूक उठा लेते हैं और बीहड़ से लेकर बम्बई तक खून बहाते हैं तब शाहिद ने देश के संविधान के दायरे में रह कर व्यवस्था के क्रूर पक्षपात के शिकार मुसलामानों का मुकदमा लड़ा और एक दिन अज्ञात हत्यारों की गोली का शिकार हो गया.

Mohammad Anas : शाहिद आज़मी मेरा हीरो है, उस पर बनी फिल्म 'शाहिद' देश भर में चल रही है. फिल्म ज़रूर देखें. जब बहुत से नौजवान हिंसा , तिरस्कार ,अपमान एवं नफरत के बाद बंदूक उठा लेते हैं और बीहड़ से लेकर बम्बई तक खून बहाते हैं तब शाहिद ने देश के संविधान के दायरे में रह कर व्यवस्था के क्रूर पक्षपात के शिकार मुसलामानों का मुकदमा लड़ा और एक दिन अज्ञात हत्यारों की गोली का शिकार हो गया.

मुझे पता है जिन्होंने शाहिद को मारा था असल में वे वही लोग हैं जो बेगुनाह मुसलमानों को जिंदगी भर जेलों में सड़ने के लिए छोड़ देते हैं. उनमें सब शामिल हैं. हां आप भी, मैं भी. फिल्म देखने से पता चलेगा, शाहिद और उसके जैसे नौजवानों की हत्या में हम कितना शामिल हैं. जाइए अगर आपको अपनी गलती देखनी है और उसे सुधारने की ज़रा सी चाहत हैं. अगर नहीं, तो सब कथा है, कुछ कहानी है ..बाकी सब तो किस्सा ही है.

Zafar Irshad : हर मुसलमान आतंकवादी होता है…ज़बरदस्त आँख खोल देने वाली फिल्म है "शाहिद"…अगर आपके घर के आसपास कोई आतंकी घटना हुई है, और आप मुसलमान है तो अपने घर से उर्दू–अरबी या किसी विदशी भाषा की पुस्तक है तो हटा दें, हिन्दुस्तान का नक्शा भी घर में हो तो हटा दें, अगर उस दौरान विदश से आपके किसी रिश्तेदार-दोस्त का फ़ोन आता है, तो न रिसीव करें… क्योंकि यह सब कारण एक मुसलमान को आतंकी साबित करने के लिए काफी हैं…

आतंकी वारदात तो सीमा पार बैठे कुछ दुश्मन करते है, लेकिन फंसता कौन है? कोई गरीब बेगुनाह मुस्लिम…इसी कहानी और जद्दोजहद पर बनी है फिल्म. सलाम निर्देशक हंसल मेहता को, जिन्होंने इतनी इमानदारी से बिना किसी तरफ झुके जेल में आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमानों के हालात पर एक अच्छी फिल्म बनायीं…पहली बार किसी फिल्म को देखकर रात भर नींद नहीं आई, और मन भर आया…ज़रूर देखिये "शाहिद"….

Nadim S. Akhter :  एक फिल्म आई है 'शाहिद'. क्या आपने देखी है? नहीं देखी है तो जरूर देखिएगा. इस मुल्क और यहां की तहजीब पर एहसान होगा आपका. शाहिद को मार दिया गया था, उसे किसने और क्यों मारवाया, अगर ये समझना हो तो ये वीडियो देखिए, मेरी तरह आप भी कुछ अंदाज लगा सकें शायद.

युवा पत्रकार मोहम्मद अनस, वरिष्ठ पत्रकार जफर इरशाद और तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

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