उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड के तत्कालीन सदस्य आईजी रंजन द्विवेदी ने 24 मई 2011 को तत्कालीन डीजीपी, यूपी बृज लाल पत्र लिख कर कहा था कि रैंकर उपनिरीक्षक की प्रोन्नति के लिए हो रही परीक्षा में शारीरिक दक्षता परीक्षण (दौड़) को समाप्त कर दिया जाये क्योंकि इस परीक्षा के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित है, लेकिन दस साल के बाद परीक्षा होने के नाते 50 साल तक के अभ्यर्थियों ने इसमें भाग ले रहे हैं.
उन्होंने मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस के लिए हुई दौड़ में दो अभ्यर्थियों की मौत का हवाला देते हुए यह कहा था. तत्कालीन डीजीपी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. इसी का नतीजा रहा कि इन दौड़ में पांच पुलिसवालों की मौत हो गयी और 117 अभ्यर्थी बीमार या बेहोश हुए.
यह बातें लखनऊ की आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा प्राप्त सूचना से सामने आई हैं. इसके अनुसार वर्ष 2011 में मुख्य आरक्षी दौड़ में बलिया में तैनात कॉन्स्टेबल शम्भू राम और इलाहाबाद में तैनात महावीर पाण्डेय की मृत्यु हुई जबकि रैंकर उपनिरीक्षक दौड़ में 44वीं वाहिनी पीएसी, मेरठ के अग्रज कुमार दूबे की मृत्यु 20/07/2011 को, वाराणसी के अनिसुज्जमा की मौत 27/07/2011, चतुर्थ वाहिनी पीएसी के अवनींद्र सिंह की मौत 28/07/2011, लखनऊ में तैनात घनश्याम यादव की मौत 04/08/2011 और 32वीं वाहिनी पीएसी, लखनऊ के हरिराम यादव की मृत्यु 04/08/2011 को हुई थी. इसके अलावा कुल 117 अभ्यर्थी बीमार या बेहोश हुए थे.
डॉ. ठाकुर ने इस सम्बन्ध में पूर्व चेतावनी के बाद भी उसे नज़रंदाज़ करने के कारण हुई इन मौतों और बीमारी के सम्बन्ध में जिम्मेदारी नियत करने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है. नीचे मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र-
सेवा में,
मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ
विषय- पांच पुलिसलार्मियों की मौत और सैकड़ों के बीमार/बेहोश होने के सम्बन्ध में उत्तरदायित्व निर्धारित करने और इन सभी पुलिसकर्मियों को वाजिब क्षतिपूर्ति देने विषयक
महोदय,
मैं आपके समक्ष उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड से आरटीआई में प्राप्त कतिपय जानकारी प्रस्तुत कर रही हूँ. इनके अनुसार उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड के तत्कालीन सदस्य श्री रंजन द्विवेदी ने 24 मई 2011 को तत्कालीन पुलिस महानिदेशक, यूपी श्री बृज लाल पत्र लिख कर कहा था कि रैंकर उपनिरीक्षक की प्रोन्नति के लिए हो रही परीक्षा में शारीरिक दक्षता परीक्षण (दौड़) को समाप्त कर दिया जाये क्योंकि इस परीक्षा के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष निर्धारित है लेकिन दस साल के बाद परीक्षा होने के नाते 50 साल तक के अभ्यर्थियों ने इसमें भाग ले रहे हैं. उन्होंने मुख्य आरक्षी, नागरिक पुलिस के लिए हुई दौड़ में दो अभ्यर्थियों की मौत का हवाला देते हुए यह कहा था. श्री बृज लाल, तत्कालीन डीजीपी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया. इसी का नतीजा रहा कि इन दौड़ में पांच पुलिसवालों की मौत हो गयी और 117 अभ्यर्थी वीमार या बेहोश हुए.
इस जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में मुख्य आरक्षी दौड़ में बलिया में तैनात कॉन्स्टेबल श्री शम्भू राम और इलाहाबाद में तैनात श्री महावीर पाण्डेय की मृत्यु हुई जबकि रैंकर उपनिरीक्षक दौड़ में 44वीं वाहिनी पीएसी, मेरठ के श्री अग्रज कुमार दूबे की मृत्यु 20/07/2011 को, वाराणसी के श्री अनिसुज्जमा की मौत 27/07/2011, चतुर्थ वाहिनी पीएसी के श्री अवनींद्र सिंह की मौत 28/07/2011, लखनऊ में तैनात श्री घनश्याम यादव की मौत 04/08/2011 और 32वीं वाहिनी पीएसी, लखनऊ के श्री हरिराम यादव की मृत्यु 04/08/2011 को हुई थी. इसके अलावा कुल 117 अभ्यर्थी वीमार या बेहोश हुए थे.
अतः मैं आपसे निवेदन करती हूँ कि इस सम्बन्ध में पूर्व चेतावनी के बाद भी उसे नज़रंदाज़ करने के कारण हुई इन मौतों और बीमारी के सम्बन्ध में जिम्मेदारी नियत किये जाने के लिए सम्बंधित अधिकारियों को निर्देशित करने की कृपा करें. साथ ही यह भी निवेदन है कि कृपया सभी मृत पुलिसकर्मियों के परिवारजनों तथा बेहोश/बीमार पुलिसकर्मियों को अलग-अलग समुचित मुआवजा प्रदान किये जाने हेतु आदेश निर्गत करने की कृपा करें.
पत्र संख्या- NT/CM/Death/01
दिनांक-23/03/2013
भवदीया,
(डॉ नूतन ठाकुर)
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ






