: 85 जन्मदिन पर याद किए गए : पटना। बिहार राष्ट्रभाषा परिषद की ‘‘परिषद पत्रिका‘‘ के पूर्व संपादक और प्रख्यात भाषा वैज्ञानिक डा. श्रीरंजन सूरिदेव ने कहा है कि रामजी मिश्र मनोहर पाटलिपुत्र के विश्वकोश थे। पत्रकारिता पेशा अपनाने के बावजूद वे प्राचीन पाटलिपुत्र की एतिहासिक धरोहरों की खोज में लगे रहे। देश की हिंदी पत्रकारिता में ऐसे विरले उदाहरण हैं कि एक ही परिवार की छह पीढ़ी पत्रकारिता में ही हो। मनोहरजी चौथी पीढ़ी थे। इनके बाद इनके पुत्र और पौत्र भी सक्रिय पत्रकारिता में हैं।
पटना की प्रमुख साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘‘रंगमच‘‘ की ओर से मनोहरजी के 85 वें जन्म दिवस पर 1 अप्रैल को आयोजित संगोष्ठी में डा. सूरिदेव ने कहा कि पत्रकारिता और पटना के प्रति इतिहास-प्रेम उनके जीबन का संबल रहा। इसमें कोई सन्देह नहीं कि मनोहरजी बिहार की पत्रकारिता के शलाका पुरूष थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार विश्वनाथ शुक्ल चंचल ने की। ज्ञातव्य है कि मनोहरजी का जन्म सन 1927 में रामनवमी के दिन ही हुआ था। ‘‘दास्ताने पाटलिपुत‘‘, और ‘‘बिहार में हिन्दी

मनोहरजी
पत्रकारिता का विकास‘‘ शीर्षक दो उनकी महत्वपूर्ण पुस्तकें हैं। मनोहरजी ने कई अन्य पुस्तकें भी लिखी हैं। आरंभ में अतिथियों ने मनोहरजी के चित्र पर माल्यापर्ण किया। साहित्यसेवी नारायण भक्त ने मनोहरजी के साथ बीते अपने अंतरंग क्षणों की चर्चा की।
वरिष्ठ पत्रकार रामसरेख सिंह सरेख ने कहा कि पं. रामजी मिश्र मनोहर कालजयी पुरूष थे। उन्होंने एक रुपये मासिक से पत्रकारिता जीवन का सफर शुरू किया था। शैक्षिक संस्था ‘शिक्षायतन‘ के निदेशक डा. राजीव गंगौल ने मनोहरजी के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि वे पत्रकार ही नहीं बल्कि इतिहास पुरूष थे। रामजी मिश्र मनोहर मीडिया फाउंडेशन के न्यासी और वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानवर्द्धन मिश्र ने कहा कि वे पिता ही नहीं बल्कि मेरे पत्रकार गुरु भी थे। अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री चंचल ने कहा कि मनोहरजी सर्जनधर्मी पत्रकार थे। साठ वर्षों तक पत्रकारिता जीवन में उन्होंने कठोर तपस्या की। वे सादा जीवन उच्च विचार के प्रतिमूर्ति थे। इस अवसर पर कविवर वीरेन्द्रनाथ विभावसु, डा.प्रेम शंकर शर्मा, पत्रकार रजनीकांत शुक्ल आदि ने मनोहरजी के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुए पत्रकारिता और पाटलिपुत्र के प्रति उनके अगाध प्रेम की चर्चा की।





