कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में पीएचडी कर रहे अनुसूचित जाति के छात्र कमल ज्योति जाहिरे को विवि द्वारा निलंबन किए जाने के फैसले को छग अनुसूचित जाति आयोग ने एकतरफा कार्रवाई बताते हुए छात्र का निलंबन को रद्द कर दिया है। आयोग ने विवि के कुलसचिव डीएन वर्मा, उपकुलसचिव संजय शर्मा व आकाश चंद्रवंशी को नोटिस भेजकर तलब किया है। आयोग ने विवि से 11 बिंदुओं में प्रमाण के साथ जवाब भी मांगा है।
ज्ञात हो कि पत्रकारिता विवि में पीएचडी कर रहे छात्र कमल ज्योति जाहिरे के साथ 23 नवंबर को सूचना का अधिकार आवेदन लगाने पर मारपीट की घटना घटी थी। इस मामले की शिकायत छात्र ने अजाक थाने में भी की थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। छह दिनों तक अम्बेडकर अस्पताल में दाखिल रहने के बाद 29 नवंबर को यहा से छुट्टी मिली। विवि द्वारा आनन-फानन में की गई 15 दिनों के निलंबन की कार्रवाई से छात्रावास में रहने वाला कोरबा निवासी छात्र सड़क पर आ गया था। फुटपाथ में रात बिताने की नौबत आ गई थी। पीएचडी छात्र कमल के सारे कपडे़ व कागजात हास्टल में होने व खर्च के लिए जेब में रुपए नहीं होने से उसके सामने अजीबो गरीब परिस्थितियां पैदा हो गई थी।
आयोग द्वारा निलंबन रद्द किए जाने से छात्र को राहत मिली है, वहीं छात्र कमल ज्योति अभी भी डरा हुआ है। कमल ने आयोग से पत्र लिखकर बताया है कि विवि वीरान जगह पर है और वहां असुरक्षा का माहौल भी है, ऐसे में उनका रहना खतरनाक हो सकता है। पीएचडी छात्र ने हास्टल खाली करने में सहायता तथा शासन की ओर से आवास व्यवस्था के लिए मदद की गुहार भी लगाई है। कमल ज्योति पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के पेशे से भी जुडे़ हुए है। वर्ष 2001-2003 तक भास्कर, बिलासपुर संस्करण के कोरबा ब्यूरो में, 2003 से दिसंबर 2006 तक नवभारत में, 2007 जनवरी से जुलाई 2007 तक फिर भास्कर में, 2008 से 2009 तक रायपुर जनसत्ता में तथा 2009 से 2010 तक नवभारत में रहे। अन्य पत्र पत्रिकाओं में भी स्वतंत्र लेखन किया। फोटोग्राफी के क्षेत्र में छत्तीसगढ छायाकार सम्मान 2007 में प्राप्त किया। 2010 से 2011 तक पत्रकारिता विभाग शासकीय पी जी कालेज, कोरबा में सहायक प्राध्यापक भी रहे। कोरबा प्रेस क्लब में पत्रकार के रूप मे सदस्य भी हैं।






