Mukesh Kumar : कल शीबा असलम फ़हमी जी से मुलाकात हुई। उन्होंने बताया कि किस तरह उन्हें उस जुर्म में फँसाया जा रहा है जो उन्होंने किया ही नहीं। सन् 2011 में उन्हें किसी ने धमकी दी थी जिसे उन्होंने कार्रवाई के लिए दिल्ली पुलिस की सायबर क्राइम सेल को भेज दिया था। इसके बाद वे भूल गईं कि उसका क्या हुआ। परसों अख़बार से उन्हें पता चला कि उन्हीं के ख़िलाफ़ मामला बना दिया गया है और उनकी गिरफ़्तारी के आदेश भी दे दिए गए हैं।
वे अग्रिम ज़मानत के लिए कोशिश कर रही हैं और बेहद परेशान हैं। सबसे ज़्यादा परेशान वे जज साहब की भूमिका को लेकर हैं, जिन्होंने न केवल ग़लत आधार पर धमकाने वाले की याचिका को स्वीकार कर लिया बल्कि करीब साल भर बाद के किसी फेसबुक स्टेटस को अपनी ओर से आधार बनाकर गिरफ़्तारी के आदेश दे डाले। शीबा जी आप वैसे भी साहसी महिला हैं और हमें मालूम है कि घबराने वाली भी नहीं हैं। फिर भी हम ये जताना चाहते हैं कि आपका साथ देने वाले बहुत हैं इसलिए हौसला रखिएगा।
(वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.)
Samar Anarya : अभी अभी Sheeba Aslam Fehmi ने फोन पर बताया कि ज़ामा मस्ज़िद थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गयी है और उन्हीं को दी गयी धमकी के मामले में उन्हीं को गिरफ्तार करने के मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के आदेश के तीन हफ्ते में अनुपालन के सिलसिले में कभी भी उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.
याद रखें कि शीबा लगातार शाही इमाम बुख़ारी के खिलाफ़ खड़ी रही हैं और ज़ामा मस्जिद थाने पर बुखारी के प्रभाव के बारे में कुछ कहने की जरूरत नहीं है. हम अपने स्तर पर सभी सम्भव कदम उठा रहे हैं. आपको भी उठाने ही होंगे क्योंकि यह सिर्फ शीबा का मामला नहीं है.
(अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारवादी अविनाश पांडेय समर के फेसबुक वॉल से.)
Ashutosh Kumar : हद है. सुप्रसिद्ध नारीवादी लेखिका Sheeba Aslam Fehmi को मोदी साहेब के खिलाफ की गयी फेसबुक टिप्पणियों के लिए धमकी दी जाती है. क्योंकि धमकी देने वाले की नज़र में वे 'राष्ट्रविरोधी' टिप्पणियाँ हैं. पुलिस में शिकायत करने पर माननीय मजिस्ट्रेट साहब न केवल धमकी देने वाले को बा-इज्ज़त बरी करते हैं, बल्कि खुद भी तसलीम करते हैं कि वे टीपें राष्ट्रविरोधी हैं और खुद अपनी ओर से पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का हुक्म जारी कर देते हैं. जरूर उन्होंने 'निष्पक्ष न्यायबुद्धि' से काम लिया होगा. लेकिन यह छोटी घटना नहीं है. फेसबुक पर एक नज़र दौडाकर कोई भी देख सकता है कि साम्प्रदायिक समूह कैसी अश्लील, आगलगाऊ और हिंसक भाषा में क्या क्या लिख रहे हैं. कहीं कोई पत्ता नहीं खड़कता. लेकिन जब बाल ठाकरे या मोदी साहेब की आलोचना होती है, वह राष्ट्रविरोधी अपराध माना जा सकता है, गिरफ्तारी हो सकती है, कुछ भी हो सकता है. फेसबुक से हाशिए की आवाजों को मुंह खोलने का, सांस लेने का मौक़ा मिला है. इस मौके को गंवाया नहीं जा सकता. आप वामपंथी हों या दक्षिणपंथी, लोकतंत्र में भरोसा करते हैं अभिव्यक्ति की आज़ादी को रोकने की हर कोशिश के खिलाफ मजबूती से खड़े होइए. आवाज़ उठाइये. शोर मचाइए. एकजुट हो जाइए.
(दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर आशुतोष कुमार के फेसबुक वॉल से.)
Masijeevi Hindi : Sheeba Aslam Fehmi से सहमति या असहमति हो सकती है होनी चाहिए, तेजपाल प्रकरण पर हमारी राय अलग रही है किंतु कोई, जिसमें देश के न्यायालय शामिल हैं उनके बोलने के खिलाफ धमकी, रपट से उनकी अभिव्यक्ति को रोकते हैं तो हमारा पुरजोर विरोध है। उनकी जिन टिप्पणियों को राष्ट्रविरोधी कहा जा रहा है मेरी नजर में ये असली राष्ट्रभक्ति है…बाकी डंडे की तरह सीधे खड़े होकर जन गण मन तो कोई बुड़बक भी गा सकता है।
(प्रोफेसर व ब्लॉगर मसिजीवी के फेसबुक वॉल से.)






