भोपाल : इस समय पीपुल्स समाचार आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रहा है. हालत यह है कि पिछले तीन माह से सम्पादकीय विभाग के लोगों को वेतन तक नहीं मिला है. पिछले एक माह में एक दर्जन से आधिक लोगों के पीपुल्स समाचार छोड़ के जाने की पुष्टि हो चुकी है. चर्चा तो यह भी है कि अखबार के मालिकान पीपुल्स समाचार को बंद करने कि घोषणा किसी भी समय कर सकते हैं. यही कारण है कि पीपुल्स समाचार से जुड़े पत्रकार नए ठिकाने कि तलाश में जुट गए है.
समूह सम्पादक के रूप मे दिनेश गुप्ता की नियुक्ति इसी जद्दोजेहद का परिणाम है. दिनेश गुप्ता को जुगाडू पत्रकार के तौर पर पहचाना जाता है. दिनेश गुप्ता की नियुक्ति के बाद भी यदि पीपुल्स ग्रुप की आर्थिक हालत नहीं सुधरी तो अख़बार का बंद होना लगभग तय है. यहाँ बता दें कि पीपुल्स ग्रुप की आर्थिक हालत इतनी कमज़ोर नहीं है जितनी बताई जा रही है. सच तो यह है की अखबार के मालिकान चाहते हैं कि अखबार का खर्चा अखबार से ही निकले. जब कि स्टाफ चाहता है कि जब पीपुल्स ग्रुप के दूसरे सभी धंधे अख़बार की आड़ में चल रहे हैं तो अखबार का खर्च भी उन्हीं धंधों के मद से उठाया जाए. क्योंकि आखबार की आमदनी से अखबार चलाना संभव नहीं है.
भोपाल से अरशद अली खान की रिपोर्ट.






