पीपुल्स समाचार, भोपाल को लेकर चर्चा है कि अखबार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण यहां पत्रकारों को रखने और निकालने का खेल चल रहा है. इस तरह पत्रकारों के साथ प्रबंधन शर्मसार करने वाला व्यवहार कर रहा है. पीपुल्स समाचार में पत्रकारों की नियुक्ति की जाती है लेकिन दो तीन महीने कम करने के बाद उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता.
इस घटना के ताजा शिकार हुए हैं गिरीश कुमार उपाध्याय. उपाध्याय पीपुल्स समाचार में हायर एजुकेशन बीट देख रहे थे. इनके पहले अपराध बीट देख रहे शिव चौरसिया के साथ भी यह घटना घटित हुई. इस कार्य में प्रबंधन का पीपुल्स समाचार के साथ जुड़े संपादक स्तर के वरिष्ठ पत्रकार पूरा सहयोग कर रहे हैं. ये लोग पत्रकारों को नियुक्त कर लेते हैं फिर उन्हें ज्वायनिंग लेटर आज कल मिलने की बात कहकर गुमराह करते रहते हैं. इसी क्रम में उनकी बाइलाइन खबर भी छाप देते हैं जिससे उनको लगे की मेरी ज्वायनिंग पक्की है. बाद में वे पत्रकार को बाहर का रास्ता दिखा देते हैं.





