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पी7न्यूज का स्ट्रिंगर कर रहा था स्टिंग, पकड़े जाने के बाद बनारस में मचा बवाल

बनारस के सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू) के मेडिसिन विभाग से जुड़े बहिरंग चिकित्सा विभाग (ओपीडी) में 21 अगस्त को एक इलेक्टॉनिक न्यूज चैनल को लेकर हुए बवाल ने पांच माह पूर्व स्थानीय अर्दली बाजार के एक प्रसिद्ध जांच घर में हुई घटना की याद ताजा कर दी है। दोनों में फर्क बस इतना है कि पांच माह पूर्व हुई घटना में स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर एक डॉक्टर को ब्लैकमेल करने की कोशिश से उपजा विवाद था जबकि इस बार जो कुछ हुआ वह असली स्टिंग ऑपरेशन का नतीजा रहा। इस असली स्टिंग को अंजाम दे रहे पी 7 न्यूज चैनल के स्थानीय प्रतिनिधि अभ्युदय द्विवेदी को कुछ देर के लिए बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने घेरे में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इस बीच पता चला है कि फिलहाल अभ्युदय द्विवेदी को बनारस में पी7 का काम करने से रोक दिया गया है।

बनारस के सर सुंदरलाल अस्पताल (बीएचयू) के मेडिसिन विभाग से जुड़े बहिरंग चिकित्सा विभाग (ओपीडी) में 21 अगस्त को एक इलेक्टॉनिक न्यूज चैनल को लेकर हुए बवाल ने पांच माह पूर्व स्थानीय अर्दली बाजार के एक प्रसिद्ध जांच घर में हुई घटना की याद ताजा कर दी है। दोनों में फर्क बस इतना है कि पांच माह पूर्व हुई घटना में स्टिंग ऑपरेशन के नाम पर एक डॉक्टर को ब्लैकमेल करने की कोशिश से उपजा विवाद था जबकि इस बार जो कुछ हुआ वह असली स्टिंग ऑपरेशन का नतीजा रहा। इस असली स्टिंग को अंजाम दे रहे पी 7 न्यूज चैनल के स्थानीय प्रतिनिधि अभ्युदय द्विवेदी को कुछ देर के लिए बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों ने घेरे में लिया, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इस बीच पता चला है कि फिलहाल अभ्युदय द्विवेदी को बनारस में पी7 का काम करने से रोक दिया गया है।

न्यूज चैनल पी7 के स्थानीय प्रतिनिधि अभ्युदय द्विवेदी 21 अगस्त को बीएचयू पहुंचे और अपने एक स्टिंग ऑपरेशन के क्रम में मेडिसिन विभाग के ओपीडी में वीडियो फोटोग्राफी करने लगे। उस समय वहां मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मधुकर राय मरीजों को देख रहे थे। मरीजों की लाइन लगी हुई थी। इस बीच डॉ. राय की नजर वीडियोग्राफर पर पड़ी तो उन्होंने कड़ा ऐतराज जताते हुए अभ्युदय द्विवेदी से उनका परिचय पूछा। इसपर अभ्युदय ने खुद को न्यूज चैनल पी 7 का स्थानीय प्रतिनिधि बताया। इसके बाद डॉ. राय ने बीएचयू के सुरक्षाकर्मियों को बुला लिया जो अभ्युदय द्विवेदी को कैमरे सहित पकड़ लिये। थोड़ी देर बाद ओपीडी में खींची गई वीडियो क्लिप को डिलीट कराकर छोड़ दिया गया।

इस बारे में डॉ. मधुकर राय ने बताया कि अभ्युदय द्विवेदी पिछले कई दिनों से मुझसे फोन पर बात कर रहे थे और इस दौरान वो बराबर यह आग्रह करते रहे कि मुझे आपसे अलग से बात करनी है। डॉ. राय के अनुसार अभ्युदय द्विवेदी ने कहा कि आप पर कई आरोप हैं, मैंने स्टिंग ऑपरेशन किया है जिससे यह पता चलता है कि आपके आसपास दलाल रहते हैं जो दवाओं की खरीद और चिकित्सीय जांच में कमीशन दिलाते हैं। डॉ. राय ने बताया कि जब अभ्युदय द्विवेदी मेरे ओपीडी में वीडियोग्राफी कर रहे थे तो मेरे पूछने पर उन्होंने खुद को न्यूज चैनल पी7 का प्रतिनिधि बताया। लेकिन उनके पास इस चैनल का कोई परिचय पत्र नहीं था। इसकी जगह उन्होंने ‘काशी पत्रकार संघ’ का परिचय पत्र दिखाया। डॉ. राय ने इस बात से इनकार किया कि अभ्युदय द्विवेदी ने पैसों की मांग की। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि अभ्युदय ने मुझसे अकेले में बात करने की बात कई बार कही थी।

डॉ. राय ने सफाई दी कि मैं लेक्चर देने के लिए माह में 15-20 दिन शहर से बाहर रहता हूं तो फिर मैं प्राइवेट प्रैक्टिस कैसे कर सकता हूं। मुझ पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने और कमीशन लेने का आरोप पूरी तरह बकवास है। दूसरी ओर अभ्युदय द्विवेदी ने बताया कि डॉ. मधुकर राय सर सुंदरलाल अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रमुख चिकित्सकों में से एक हैं। वो अपने चितईपुर स्थित आवास पर प्रतिदिन 35-40 मरीज देखते हैं और हर मरीज से तीन सौ रुपये लेते हैं। द्विवेदी के अनुसार इस हिसाब से वो प्रतिदिन 10 से 12 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई करते हैं। साथ ही वो मरीजों की जांच और दवाओं की खरीद पर कमीशन भी लेते हैं।

द्विवेदी ने बताया कि डॉ. राय के घर के पास दवा की दो दुकानें पवन मेडिकल व शिवगंगा मेडिकल हैं। इन दोनों दुकानों पर डॉ. राय की लिखी पर्चियों पर दवा मिलती है। इन दुकानों से डॉ. राय की घर पर उपस्थिति के बारे में पूरी जानकारी मिल जाती है। इस बारे में पी7 के यूपी हेड ज्ञानेन्‍द्र शुक्‍ल ने बताया की अभ्‍युदय हमारे स्‍ट्रींगर के रूप में वाराणसी में कार्यरत हैं और काफी सिन्‍सीयर हैं, मझे इस बात का भरोसा है कि वे ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकते। ज्ञानेन्‍द्र ने माना कि वे इस स्टिंग आपरेशन से अनभिज्ञ थे।

डॉ. राय ने अभ्युदय द्विवेदी के चैनल पी7 का स्थानीय प्रतिनिधि होने की पुष्टि के लिए 22 अगस्त को चैनल के उत्तर प्रदेश प्रमुख ज्ञानेंद्र शुक्ल से फोन पर बात की। वहां से इस बात की पुष्टि हो गई कि द्विवेदी ही चैनल पी7 के स्थानीय प्रतिनिधि (स्ट्रींगर) हैं। तब जाकर डॉ. राय का शंका समाधान हुआ। यहां यह बात किसी के भी जेहन में आ सकती है कि आखिरकार मीडिया के लोग संदेह के घेरे में क्यों आ जाते हैं। मौजूदा प्रकरण में भी सवाल उठता है कि अभ्युदय द्विवेदी ने पूछे जाने पर अपने जाने-माने चैनल पी 7 का परिचय पत्र दिखाने की बजाय काशी पत्रकार संघ का परिचय क्यों दिखाया। साथ ही यदि कोई स्टिंग आपरेशन प्रख्‍यात चिकित्‍सक डॉ. मधुकर राय से संबंधित है तो उसका प्रसारण क्‍यों नहीं किया गया।

डॉ. राय ने यूपी हेड ज्ञानेन्‍द्र शुक्‍ल से जानना चाहा कि क्‍या श्री अभ्‍युदय को इस प्रकार के किसी स्टिंग आपरेशन के लिए आपने अधिकृत किया था तो उन्‍होंने इससे इनकार किया। डॉ. राय ने पी7 के यूपी हेड से लम्‍बी वार्ता की और उन्‍होंने बताया कि फिलहाल श्री द्विवेदी को वाराणसी में अगले आदेश तक चैनल के लिए कार्य करने से रोका गया है। अभ्युदय द्विवेदी की काशी पत्रकार संघ की सदस्यता के सत्यापन के लिए डॉ. राय ने संघ के अध्यक्ष कृष्णदेव नारायण राय से फोन पर बात की। उन्होंने पूछा कि क्या न्यूज चैनल पी 7 का कोई प्रतिनिधि काशी पत्रकार संघ का सदस्य है? इस पर पहले तो केडीएन राय ने अनभिज्ञता जताई लेकिन बाद में बताया कि चैनल पी 7 के स्थानीय प्रतिनिधि अभ्युदय द्विवेदी संघ के सदस्य हैं।

काशी पत्रकार संघ में तमाम ऐसे लोग सदस्य हैं जो किसी समाचार पत्र या इलेक्ट्रॉनिक चैनल के कर्मचारी नहीं हैं लेकिन उनके पास संघ का परिचय पत्र है। इस शहर में तमाम ऐसे लोग हैं जो क्षेत्रीय या राष्ट्रीय न्यूज चैनलों के स्ट्रिंगर के रूप में काम कर रहे हैं। उनसे स्ट्रिंगर के रूप में इसलिए काम लिया जाता है ताकि उनको उचित मेहनताना न देना पड़े। यह भी एक बड़ा कारण है भ्रष्टाचार का। आर्थिक तंगी के कारण कभी कोई लाशों पर सट्टा होता दिखाने लगता है तो कोई भ्रूण परीक्षण के नाम पर डॉक्टर से सौदेबाजी करने लगता है। ऐसा नहीं है कि इस प्रकार की गड़बड़ी केवल इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनलों के ही साथ है। प्रिंट मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। बनारस में विभिन्न अखबारों के संवाद सूत्रों की एक बड़ी फौज है। इनमें से बहुत से ऐसे संवाद सूत्र हैं जो आये दिन मीडिया का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग करने से बाज नहीं आते हैं। पिछले दिनों बनारस के एक बड़े अखबार के संवाद सूत्र ने शिवपुर क्षेत्र के एक मिट्टी कारोबारी की कोई कमी बताकर उसका भयादोहन करना शुरू कर दिया था। ये मामला पुलिस तक भी पहुंच गया था लेकिन बाद में मिट्टी कारोबारी ने बात को आगे बढ़ाना उचित नहीं समझा। इसके कारण तात्कालिक तौर पर मामला शांत हो गया लेकिन संवाद सूत्र को अखबार से हटा दिया गया।

साभार- क्लाउन टाइम्स

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