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पुलिसकर्मी की दबंगई, फोटो खींच रहे संपादक पर उठाया हाथ

सिवनी  रेलवे में यात्रा करने के नाम पर भारतीय रेल द्वारा तत्‍काल की स्‍कीम लोगों की सुविधा के बजाए उनके गले की फांस ज्यादा बन रही है। दलालों द्वारा टिकट विंडो पर जाकर टिकट बनवाए जा रहे हैं और आम जनता मुंह देखती रह रही है। पुलिस की दबंगई की फोटो खींचने पर एक पुलिसकर्मी ने राष्ट्र चंडिका के संपादक अखिलेश दुबे के साथ हाथापाई कर डाली।

सिवनी  रेलवे में यात्रा करने के नाम पर भारतीय रेल द्वारा तत्‍काल की स्‍कीम लोगों की सुविधा के बजाए उनके गले की फांस ज्यादा बन रही है। दलालों द्वारा टिकट विंडो पर जाकर टिकट बनवाए जा रहे हैं और आम जनता मुंह देखती रह रही है। पुलिस की दबंगई की फोटो खींचने पर एक पुलिसकर्मी ने राष्ट्र चंडिका के संपादक अखिलेश दुबे के साथ हाथापाई कर डाली।

जानकारी के अनुसार आज सुबह रेलवे स्टेशन के रिजर्वेशन काउंटर पर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। इस विवाद में सुधीर बघेल नामक युवक ने बताया कि वह सुबह सवा आठ बजे तत्‍काल का टिकट बनवाने रिजर्वेशन काउंटर पर जाकर खड़े हुए। नौ बजे दो युवक आए और उन्होंने सुधीर बघेल को लाईन से यह कह कर हटा दिया कि कागज पर नाम लिखो तब नंबर आएगा। सुधीर बघेल ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि वे इस बात को समझ नहीं पाए। इसकी शिकायत उनके द्वारा स्टेशन में उपस्थित कर्मचारी मकसूद खान से की गई। इसकी सूचना शायद कोतवाली पुलिस को लग गई। कोतवाली पुलिस की पीसीआर में चार पांच पुलिस आरक्षक आरक्षण केंद्र जा पहुंचे।

प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार पुलिस आरक्षकों जिनमें रामलखन बघेल, मतीन, गौतम आदि का समावेश था, ने पहले टिकट काउंटर से बुकिंग क्‍लर्क से बात किए उसके उपरांत वे बुकिंग काउंटर के अंदर जा पहुंचे। जैसे ही वे अंदर गए वहां मौजूद राष्ट्र चंडिका के संपादक अखिलेश दुबे ने उनका वीडियो बनाना आरंभ कर दिया। प्रत्यक्ष दर्शियों के अनुसार संभवत: यह बात पुलिस आरक्षक गौतम को नागवार गुजरी और वे तत्काल बुकिंग आफिस से बाहर आए और अपशब्द बोलते हुए अखिलेश दुबे से हाथा पाई करने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि वहां मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने गौतम को एसा करने से रोका और बताया कि यह मीडिया से जुड़े हुए हैं।

बावजूद इसके गौतम रूके नहीं। प्रत्यक्ष दर्शियों ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि रेलवे स्टेशन पर जहां रेलवे पुलिस मौजूद रहना चाहिए, वह मौजूद नहीं थी। वस्तुत: इस कार्यवाही को रेलवे पुलिस द्वारा अंजाम दिया जाना चाहिए था, पर उनके स्थान पर कोतवाली पुलिस ने वहां जाकर कार्रवाई क्‍यों की! इस संबंध में जब स्टेशन अधीक्षक श्री अग्रवाल से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनसे संपर्क नहीं हो सका। इस बारे में अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किसकी शिकायत पर पीसीआर भरकर रेलवे स्टेशन परिसर में स्थित आरक्षण केंद्र पहुंची थी, और वह वहां तत्‍काल रिजर्वेशन के विवाद को निपटाने गई थी अथवा खुद का या किसी आला अधिकारी का रिजर्वेशन कराने गई थी।

वैसे जबसे तत्काल रिजर्वेशन का काम आरक्षण केंद्र से आरंभ करवाया गया है तबसे वहां दलालों की तादाद एकाएक बढ़ गई है। रेलवे बुकिंग क्‍लर्क जय कुमार ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस तरह का विवाद अवश्य हुआ था, पुलिस भी वहां आई थी किन्तु हाथापाई की जानकसरी उन्हें नहीं है। उधरए राष्ट्र चंडिका के संपादक अखिलेश दुबे ने बताया कि उन्होंने पुलिस के आते ही इस घटना को अपने कैमरे में कैद करना आरंभ कर दिया था। जब पुलिस का बल आरक्षण केंद्र के अंदर पहुंचा तो उन्होंने टिकट विंडो से वीडियो बनाना आरंभ किया। इस पर तैश में आए आरक्षक गौतम वहां से बाहर आए और उनके साथ हाथापाई पर उतर आए। अखिलेश दुबे ने इस घटना की लिखित शिकायत एसपी से की है।

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