अगर कोई पत्रकार फिल्म बनायेगा तो प्रचार के लिये मुफ्त का साधन ढूढ़ ही लेगा. ऐसा ही किया है पूर्व पत्रकार और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता जानकी विश्वनाथन ने अपनी पहली हिन्दी फिल्म बकरापुर के प्रचार के लिये. इसमें एक बकरा है जिसका नाम शाहरुख है.
एक इन्टरव्यू में फिल्म में बकरे का नाम शाहरुख रखे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि गांवों में लोग अपने पालतू जानवरों का नाम फिल्मस्टारों के नाम पर रखते हैं इसीलिये ऐसा किया गया है. इसका उद्देश्य किसी भी तरह शाहरुख के नाम से प्रचार पाने के लिये नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि एक पत्रकार के तौर पर मेरी ट्रेनिंग ने मुझे सिखाया है कि ऐसे विषयों पर फिल्में बननी चाहिये जो रियलिटी के करीब हों. यह ग्रामीण भारत के पिछड़ेपन पर सामाजिक और राजनीतिक व्यंग करता हुआ सिनेमा है.
जानकी विश्वनाथन ने अब तक कुल चार फिल्में बनायी हैं. 2001 में रिलीज उनकी पहली फिल्म कुट्टी को दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं. यह फिल्म बाल श्रम पर बनी थी. उन्होंने सभी फिल्में सामाजिक मुद्दों पर बनायी हैं. बकरापुर के इस साल के अंत तक सिनेमाघरों में आने की उम्मीद है.





