: भ्रष्टाचार की बजाय लैपटॉप की बातें कर रही है मीडिया : यूपी में चुनावी सरगर्मी चरम पर है। पहले चरण का मतदान भी आज हो रहा है। स्वयं को नंबर एक बताने वाले बड़े अखबार से लेकर छोटे समाचार पत्र चुनाव कवरेज कर रहे हैं। इस दौरान कई नये चैनलों और अखबारों के होर्डिंग भी राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के कई शहरों में लग गये हैं। यह समझना कठिन नहीं है कि चुनावी मौसम में नये अखबारों और चैनलों की मैजूदगी का उद्देश्य क्या है। जो नये चैनल दिख रहे हैं उन पर केवल पार्टी नेताओं के लम्बे इंटरव्यू और एक दो चुनावी सभाओं का पूरा प्रसारण दिन भर दिखाया जा रहा है।
पेड न्यूज पर कड़ी निगाह रखने का दावा रहा चुनाव आयोग भी ऐसे चैनल और अखबारों का कुछ नहीं बिगाड़ पा रहा। पहले से स्थापित अखबार और चैनल भी इन दिनों यूपी के चुनाव में कवरेज के नाम पर पेड न्यूज कर रहे हैं। कई पार्टियों के नेता भी इस बात से खासे नाराज हैं कि प्रियंका गांधी केवल दो जिलों में घूम कर महज दस सीटों पर प्रचार कर रही हैं तो आईबीएन सेवन, एनडीटीवी और आजतक जैसे चैनल सुबह से शाम तक उनका गुणगान कर रहे हैं। जबकि उनके नेता दिन भर में दर्जनों सीटों और कई जिलों में प्रचार करने बावजूद उतना मीडिया कवरेज नहीं पा रहे जिसके वे हकदार हैं।
ऐसा ही हाल प्रदेश के बड़े अखबारों का भी है। एक-एक सीट का चुनावी विश्लेषण करते हुए बड़े अखबारों के कई पन्ने भरे रह रहे हैं। उसमें अपील, विज्ञापन, बयान सबकुछ है लेकिन यूपी की खाक छान रही टीम अन्ना की भारी जनसभाओं वाली खबरें नदारद हैं। टीम अन्ना को चुनौती देने वाले बेनी प्रसाद वर्मा के जिले बाराबंकी से टीम अन्ना ने अपना जन जागरुकता अभियान शुरु किया था। भारी भीड़ जुटाने वाली टीम अन्ना की सभाओं की छिटपुट खबरें एक दो दिन तो अखबारों में छपीं लेकिन अब सबने टीम अन्ना की खबरों से किनारा कर लिया है।
सूत्रों के मुताबिक आओ राजनीति करें का अभियान चलाने वाला हिन्दुस्तान सहित अमर उजाला, दैनिक जागरण आदि सभी अखबारों ने पार्टियों से टीम अन्ना को तवज्जो न देने की डील कर ली है। इंडिया अगेंस्ट करप्शन तले चल रहे टीम अन्ना का जागरुकता अभियान इस समय पूर्वांचल में आजमगढ़ के आस पास चल रहा है। इसके पहले टीम ने फैजाबाद, बहराइच, अकबरपुर व अयोध्या में जनसभाएं की जहां भारी भीड़ ऊमड़ी। ताज्जुब है कि पैसे खर्च करके भीड़ जुटा रही पार्टियों को कवरेज मिल रहा है जबकि रामलीला मैदान में टीम अन्ना के आगे दुम हिलाने वाली मीडिया उस भीड़ को भाव नहीं दे रही जो स्वेच्छा से जुट रही है। यह भी गौर करने वाली बात है कि चुनावी खबर के नाम पर लोगों से हेलीकॉप्टर, लैपटॉप पर सवाल पूछे जा रहे हैं भ्रष्टाचार और लोकपाल का सवाल नहीं उठाया जाता। मीडिया से हुए डील का एक पहलू यह भी है कि रोज शाम को सभी चैनलों पर होने वाली बहसों में अब टीम अन्ना से किसी को नहीं बुलाया जाता। चैनल पत्रकारिता के एक अनुभवी पत्रकार ने बताया कि यही तो डील है कि चुनाव तक टीम अन्ना को दरकिनार रखना है। यह तो ऐसा पेड का मामला है कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे।
मुकेश कुमार मिश्रा की रिपोर्ट.






