पिथौरागढ़। उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की जिला इकाई के तत्वावधान में स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी का भावपूर्ण स्मरण किया गया। इस अवसर पर हिन्दी पत्रकारिता के मूल्यहीन, घोर व्यवसायिक और पेड न्यूज के मौजूदा दौर को वक्ताओें ने जी भर कोसा। पत्रकारिता के मूल्यों की हिफाजत के लिए समाज के संवेदनशील लोगों को अपना सर्वस्व दांव पर लगा देने की वक्ताओं ने अपील की। कहा कि समाजोन्मुख पत्रकारिता को आगे बढ़ाने के लिए पत्रकारों को ही नहीं वर्न अलग-अलग पेशे से जुड़े लोंगों को गणेश शंकर विद्यार्थी जैसी शख्सियतों की वसीयतों को कायम रखने का अब समय आ गया है।
उत्तराखंड राज्य की वर्तमान दशा-दिशा पर चिंता व्यक्त करते हुए सम्मेलन में मौजूद लोगों ने एक राय से कहा यदि उत्तराखंड को बचाना है तो संगठित प्रयास अब तेज कर देने चाहिए। पिथौरागढ़ के दूर-दराज क्षेत्रों से आए पत्रकारों ने इस मौके पर उनपर हो रहे असामाजिक तत्वों के हमलों, प्रताड़नाओं की जानकारी दी। कहा कि श्रमजीवी पत्रकार यूनियन का प्रत्येक सदस्य समाज के प्रति अपनी जीवट प्रतिबद्वता के साथ काम कर रहा है।
जिला सूचना विभाग के सभागार में स्वं गणेश शंकर विद्यार्थी को समर्पित संगोष्ठी ’आत्मोत्सर्ग की पत्रकारिता के 100 साल’ पर बोलते हुए विभिन्न जनसंगठनों, ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों ने गणेश शंकर विद्यार्थी को वर्तमान सामाजिक, राजनैतिक एवं पत्रकारीय परिवेश में याद किए जाने को सुखद बताया। कहा गया कि जिस गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपना पूरा जीवन समाज को अर्पित कर दिया उन्हें वह सम्मान आज तक नहीं मिल पाया जिसके वह वास्तविक हकदार है। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की यह पहल, समाज में उच्च आदर्श स्थापित करने की कड़ी में मील का पत्थर अवश्य साबित होगा।
संगोष्ठी का संचालन करते हुए यूनियन के जिलाध्यक्ष जगदीश कलौनी ने कहा कि विद्यार्थी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को समाज के सम्मुख रखने के लिए पूरे वर्ष भर विभिन्न दिवसों पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर उन्होंने यूनियन के प्रदेश महासचिव प्रयाग पाण्डेय के लिखित संदेश को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ यूनियन पूरे वर्श भर जिले में विभिन्न स्थानों में विचार गोष्ठियों, प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा। संगोष्ठी में राजकीय एल.एम.एस. महाविद्यालय में हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजय शुक्ल ने कहा कि स्वाधीनता आंदोलन के मुखपत्र एवं न्याय और औचित्य के रक्षक ’प्रताप’ को बीती नौ फरवरी को 99 साल पूरे हो गए। विद्यार्थी जी के संपादन में प्रकाशित प्रताप ने पत्रकारिता को सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक चेतना से जोड़ा। प्रताप ने सामाजिक विशमताओं के खिलाफ जमकर कलम चलाई, संघर्ष किया ओर इसकी भरपूर कीमत चुकाई, जेल गए, यातनाएं सही और अपने जीवन का सर्वस्व देश को सौंप दिया। कहा कि स्व. गणेश शंकर विद्यार्थी को समर्पित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान सामाजिक एवं राजनैतिक परिस्थितियों में गणेश शंकर विद्यार्थी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व पत्रकारों के साथ ही सभी प्रगतिशील लोगों के लिए अनुकरणीय है।
श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष जगत मर्तोलिया ने कहा कि देश को अंग्रेजों की दासता से मुक्त करने के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी ने समाचार पत्रों के प्रकाशन के साथ ही सीधे व्यवस्था में दखल देकर जिस क्रंति का सूत्रपात किया उसने पूरे देश को आजादी की राह में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने हिन्दी पत्रकारिता के साथ ही जनआंदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और गणेश शंकर विद्यार्थी ने इस मुहिम को अंजाम देने में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
ट्रेड यूनियन के जिला उपाध्यक्ष एवं रोडवेज संयुक्त कर्मचारी परिषद के वरिष्ठ आंदोलनकारी नेता मनोहर सिंह जेठी ने उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद पैदा हो रही सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक विषमताओं को उकेर कर रख दिया। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ जैसे दूरस्थ क्षेत्र के पत्रकारों की रचनाधर्मिता के कारण ही उत्तराखंड परिवहन निगम का अस्तित्व बच पाया खासकर पिथौरागढ़ जिले में जहां रोडवेज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया था पत्रकारों के रचनात्मक सहयोग से ही पिथौरागढ़ में रोडवेज का अस्तित्व रह पाया। ट्रेड यूनियन के महासचिव उमेद सिंह बिष्ट ने ट्रेड यूनियनों के आंदोलनों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि मौजूदा दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी जैसे सच्चे देशभक्त को याद करना और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को जन-जन तक पहुंचाने की यह मुहिम निश्चित ही सराहनीय है। उन्होंने श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा पिथौरागढ़ जिले में विभिन्न अवसरों पर दिखाई गई सक्रियता के प्रति ट्रेड यूनियन की तरफ से आभार व्यक्त किया और यूनियन को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
लगातार तीसरी बार निर्विरोध चुने गए जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एड. मोहन चंद्र भट्ट ने पिथौरागढ़ में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन द्वारा पिछले वर्षों में समसामयिक घटनाओं, मसलों एवं मुद्दों को लेकर की जा रही गतिविधियों को पूरे देश के लिए एक परिवर्तनकारी घटनाक्रम बताया उन्होंने यहां तक कह दिया कि श्रमजीवी यूनियन से जुड़े पत्रकार ही वास्तव में जनपक्षीय पत्रकारिता कर रहे हैं। कहा कि अपनी सुरक्षा को ताक पर रखकर जिस बेबाकी से यूनियन के साथी काम कर रहे हैं उन्हें सुरक्षा दिया जाना भी कल्याणकारी राज्य का पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। कहा कि यदि हालात नहीं बदले तो उत्तराखंड जल्द ही मर जाएगा और ऐसे नाजुक दौर में श्रमजीवी साथियों से ही उम्मीद भी की जा सकती है। उन्होंने पिथौरागढ़ बार एसोसिएशन की तरफ से श्रमजीवी पत्रकार यूनियन को प्रत्येक मुद्दे पर पूर्ण समर्थन एवं सहयोग देने का वायदा किया।
बार संघ के तीसरी बार महासचिव बने एड. निर्मल चौधरी ने कहा कि जिन कुर्बानियों से राज्य हासिल हुआ है, उन मानवीय मूल्यों को जिन्दा रखने का काम अब श्रम से जुड़े हुए लोग ही कर सकते हैं। जिन तौर-तरीकों से उत्तराखण्ड में लूट-खसोट जारी है उसे रोकने के लिए सभी श्रम संगठनों को एक बैनर तले आना होगा। उन्होंने श्रमजीवी पत्रकार यूनियन को भविष्य में भी निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन बार एसोसिएशन की तरफ से दिया। संगोष्ठी में यूनियन के जिला सचिव सुशील खत्री ने कहा कि आज के दौर में मीडिया का कारपोरेटीकरण हो रहा है पत्रकारिता अपने विश्वास को समाज के भीतर खोता जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक रूप से विपन्न समाज को दिशा देने के लिए पत्रकारों को ठीक उसी तरह जल जाना पड़ेगा जैसे अंधेरे को चीरने के लिए मोमबत्ती को जलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सीमान्त जनपद पिथौरागढ़ में आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ती, भोजन माता, पोनी-पोटर्स आदि को संगठित कर यूनियन ने जो महत्वपूर्ण कार्य किया है वह पूरे पत्रकार समुदाय के लिए गौरव एवं अनुकरण का विषय है। सम्मेलन में डीडीहाट के पत्रकार बिजेंद्र मेहता, पिथौरागढ़ के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रशेखर जोशी, कालिका रावल, मुकेश पंत, बिजेंद्र लुन्ठी, रमेश गड़कोटी, दीपक गुप्ता, जुगल पाण्डेय, बेरीनाग के गोंविंद चावला, योगेश पाठक, मुनस्यारी के पवन बत्रा, धारचूला के सुरेंद्र सिंह बिष्ट, प्रदीप तिवाड़ी आदि ने श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के नेतृत्व द्वारा समाज के सर्वागींण विकास हेतु किए जा रहे कार्यो को जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
वहीं सम्मेलन के द्वितीय सत्र में संगठन की आगामी रणनीति एवं पत्रकारों की समस्याओं पर चर्चा की गई। यूनियन जिलाध्यक्ष जगदीश कलौनी ने कहा कि श्रम से जुड़े प्रत्येक वर्ग को एक बौद्विक मंच प्रदान करने के लिए स्मारिका ’श्रम संवाद’ के प्रकाशन की रूपरेखा प्रस्तुत की कहा कि श्रम संवाद के लिए जनसरोकारों से जुड़े साथियों से आलेख एवं विज्ञापन सहयोग लिया जाएगा। कहा कि इस स्मारिका में उत्तराखण्ड राज्य के मौजूदा परिदृश्य को दृश्टिगत रखते हुए एक समानान्तर नीति दस्तावेज का प्रकाशन किया जाएगा। पिथौरागढ़ समेत अन्य जनपदों में इस स्मारिका का विमोचन होगा इस दौरान संगोष्ठियों के माध्यम से श्रम से जुड़े लोगों को संगठित किया जाएगा। उन्होंने साथी पत्रकारों से इस मुहिम को मुकाम तक पहुंचाने की अपील की। जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में पत्रकारों के साथ आए दिन होने वाले दुर्व्यहार के प्रकरणों पर यूनियन ने सख्त ऐतराज जताते हुए प्रदेश के शासनाधीशों को चेताया है। सम्मेलन में जिले भर के पत्रकारों ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान 15 से ज्यादा पत्रकारों ने श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की सदस्यता ली। सम्मेलन की अध्यक्षता जगत मर्तोलिया ने एवं संचालन जिलाध्यक्ष जगदीश कलौनी ने किया। सम्मेलन में अशोक पाठक, दिनेश अवस्थी, हरीश पाण्डेय, गिरीश जोशी, राकेश पंत, विपिन गुप्ता, जौहर खान, मनोज चंद, ललित जोशी, प्रकाश ज्याला, जीवन सिंह बोरा, सुरेंद्र बिश्ट, दिलीप वल्दिया, मदन आदि मौजूद थे। हल्द्वानी के पत्रकार मनोज गुप्ता के असामयिक निधन पर यूनियन ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर संवेदना व्यक्त की।






