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पोंटी की चड्ढी में कितने रुपये? कोई कहे अरबों तो कुछ बोलें खरबों, गिनती चालू आहे

नई दिल्‍ली : इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पोंटी चड्ढा के ठिकानों से मिली रकम की गिनती शुरू कर दी है. कोई कह रहा है कि सौ करोड़ रुपये मिले हैं तो कोई कह रहा है कि दो सौ करोड़ रुपये हैं. तीन सौ करोड़ रुपये होने की भी चर्चा है. कुल कितने पैसे हैं, इसका पता गिनती के बाद ही चलेगा. यूपी की सीएम मायावती के करीबी पोंटी चड्ढा के नोएडा स्थित सेंटर स्टेज माल के बेसमेंट से मिली तिजोरी को खोल कर नोटों की गिनती का काम शुरू कर दिया गया है. आयकर विभाग की टीम ने कल सेंटर स्‍टेज मॉल के बेसमेंट से छह फुट लंबी और छह फुट चौड़ी तिजोरी बरामद की थी. बाद में सेंटर स्टेज मॉल में मिलने वाली तिजोरियों की संख्या 14 हो गई, जिनसे करीब दो से तीन सौ करोड़ रुपए बरामद किए जाने की खबर है.

नई दिल्‍ली : इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पोंटी चड्ढा के ठिकानों से मिली रकम की गिनती शुरू कर दी है. कोई कह रहा है कि सौ करोड़ रुपये मिले हैं तो कोई कह रहा है कि दो सौ करोड़ रुपये हैं. तीन सौ करोड़ रुपये होने की भी चर्चा है. कुल कितने पैसे हैं, इसका पता गिनती के बाद ही चलेगा. यूपी की सीएम मायावती के करीबी पोंटी चड्ढा के नोएडा स्थित सेंटर स्टेज माल के बेसमेंट से मिली तिजोरी को खोल कर नोटों की गिनती का काम शुरू कर दिया गया है. आयकर विभाग की टीम ने कल सेंटर स्‍टेज मॉल के बेसमेंट से छह फुट लंबी और छह फुट चौड़ी तिजोरी बरामद की थी. बाद में सेंटर स्टेज मॉल में मिलने वाली तिजोरियों की संख्या 14 हो गई, जिनसे करीब दो से तीन सौ करोड़ रुपए बरामद किए जाने की खबर है.

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी सीबीडीटी का कहना है कि छापेमारी के पीछे राजनीतिक वजह नहीं है, यह एक रूटीन छापेमारी है. फिलहाल आयकर विभाग ने पोंटी चड्ढा के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है.  इनकम टैक्स के 200 अफसरों और सीआरपीएफ के जवानों ने चड्ढा के दर्जनों ठिकानों पर कल छापेमारी की थी. आयकर विभाग ने दिल्ली के छतरपुर फॉर्म हाउस पर भी छापेमारी की. साथ ही न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के एक बंगले में छापा मारा. यूपी के मुरादाबाद में छापेमारी हुई और फिर आयकर विभाग ने नोएडा के सेंटर स्टेज मॉल में भी रेड डाला. अंदाजा लगाया जा रहा है कि पोंटी चट्डा के ठिकानों पर छापेमारी से करीब 300 करोड़ बरामद हो सकते हैं.

आयकर विभाग को पोंटी का छतरपुर में फार्म हाउस किले से कम नहीं नजर आया. 20 फीट ऊंची दीवारें. इतने ही बड़े गेट. एक नहीं, दो-दो गेट. मुख्य दरवाजे से अंदर जाने के बाद उससे सिर्फ दस फुट पर दूसरा गेट है. आयकर विभाग के अधिकारियों को अंदर की जानकारी मिल ही नहीं रही थी. इसलिए अफसरों की एक टीम ने फरीदाबाद से हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी और फार्म हाउस के ऊपर चक्कर लगाए. तब जाकर उन्हें कुछ अंदाजा मिला. बुधवार को अफसर अंदर गए, तब उन्हें पता चला कि पूरे घर में सीसीटीवी लगे हैं. कई कमरे शीशे के हैं और साउंडप्रूफ हैं.

बताया जा रहा है कि मॉल में मौजूद कई छोटी तिजोरियों को गैस कटर के जरिए काटा गया है. पॉन्टी के दामाद के घर से 38 करोड़ रुपए नगद मिले हैं जबकि दोस्त ललित कपूर के घर से इनकम टैक्स विभाग ने एक आदमी को दो सूटकेस लेकर भागते हुए पकड़ा. माना जा रहा है कि इनमें कई अहम कागजात हैं. लखनऊ के सहारागंज और एल्डिको ग्रीन में मौजूद दफ्तर, नोएडा के सेंटर स्टेज मॉल से करोड़ों रुपए से ज्यादा बरामद किए जा चुके हैं.

सूत्रों के मुताबिक पोंटी चड्ढा अपने पारिवारिक समारोह में शामिल होने दुबई गए हैं. कुछ लोगों का कहना है कि आयकर विभाग की छापेमारी के डर से शराब कारोबार का बादशाह पोंटी चड्ढा फरार हो गया है. आयकर सूत्रों के मुताबिक उसके दुबई में होने की खबर है और वह भारत में आयकर अधिकारियों की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए हैं. आयकर विभाग के सूत्रों के मुताबिक उसे पॉन्टी चड्ढा के खिलाफ शिकायत मिली थी कि यूपी में पोंटी की कंपनी के 3000 से ज्यादा शराब ठेकों से बीएसपी के लिए चुनाव में पैसे बांटे जा रहे हैं. शक ये भी था कि चुनाव में इस्तेमाल के लिए इन ठेकों से अवैध रूप से शराब भी बांटी जा रही है. इसके अलावा पोंटी चड्ढा पर टैक्स चोरी का भी आरोप था.

सूत्रों के मुताबिक विभाग को पिछले चार महीनों से इस तरह की शिकायतें लगातार मिल रही थीं. क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन यूनिट ने पोंटी के दोनों सहयोगियों से हाल में हुए कुछ लेनदेन को लेकर पूछताछ भी की. सूबे की मुखिया मायावती के करीबी माने जाने वाले पोंटी चड्ढ़ा के पास यूपी के करीब-करीब सभी शराब की दुकानों का ठेका है. मायावती के सरकार में आने के बाद कंपनी रीयल इस्टेट में भी तेजी से पैर पसार रही है.

दस फरवरी को पोंटी की बेटी की शादी है, लेकिन नौ दिन पहले ही आयकर अफसरों की टीमें उनके घर पहुंच गई. विधानसभा चुनाव से पहले शराब और रियल एस्टेट के मशहूर कारोबारी के आवास और प्रतिष्ठानों पर आयकर विभाग के छापे इत्तेफाक हैं या कुछ और? कार्रवाई बता रही है कि हिसाब का वक्त सोच समझकर चुना गया. कार्रवाई के सियासी निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं.  मुख्यमंत्री मायावती आज से ही चुनाव प्रचार पर निकली हैं. उनकी सरकार में पोंटी चड्ढा का रुतबा कौन नहीं जानता.

पोंटी और मुख्यमंत्री के भाई आनंद पर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव किरीट सौमेया लगातार आरोप जड़ रहे हैं. उन्होंने आनंद की कई बेनामी संपत्तियों व कंपनियों का परोक्ष रिश्ता पोंटी से जोड़ा है. कुछ माह पहले तक भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लगातार घेराबंदी की शिकार रही केंद्र सरकार को भ्रष्ट व्यवस्था के आरोपों के नाजुक वार से राहत तभी से मिली है, जबसे एनआरएचएम घोटाला गर्माने के साथ उत्तर प्रदेश में सीबीआइ की छापेमारी और माया सरकार के पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा को सवालों के घेरे में लेने के साथ उनके निकटस्थ मुरादाबाद के सौरभ जैन को गिरफ्तार भी कर लिया गया.  

मुरादाबाद में शराब दुकानों के छोटे नेटवर्क से बढ़ते-बढ़ते नोएडा समेत विभिन्न शहरों के शराब कारोबार, मल्टीप्लेक्स, सिनेमा हॉल, रियल स्टेट, फिल्म निर्माण तक कारोबारी दायरा बढ़ा चुके चड्ढा परिवार की हर दौर में सत्ता से नजदीकी जगजाहिर है. यूपी में मायावती सरकार आने के बाद जहां चड्ढा परिवार ने शराब कारोबार ने वेस्ट यूपी से निकलकर पूरे प्रदेश तक विस्तार किया. प्रदेश के आबकारी सिस्टम पर दिनोंदिन मजबूत होती इस ग्रुप की पकड़ के कारण ही प्रदेश की तमाम सहकारी चीनी मिलें व डिस्टलरी भी चढ्डा ग्रुप के नियंत्रण में देने का विवादित फैसला भी हुआ था.

पोंटी मूलत: नैनीताल के पास रामनगर के रहने वाले हैं. उनके पिता सरदार कुलवंत सिंह पांच भाई थे. वे 1960 के आसपास मुरादाबाद आए और वहां उन्होंने शराब के छोटे ठेके लेकर कारोबार शुरू किया. इसके बाद उन्होंने रामपुर, नजीबाबाद, बिजनौर और आसपास के इलाकों में भी शराब बिक्री का कारोबार बढ़ाया. शराब बिक्री के कारोबार में थोड़ा मजबूत हुए तो रामपुर के पास विलासपुर में पेपर मिल शुरू की. फिर रबर फैक्ट्री डाली. सरदार कुलवंत सिंह के तीन बेटे हैं जिनमें गुरदीप सिंह चड्ढा उर्फ पोंटी चड्ढा सबसे बड़े हैं.

पिता के बुढ़ापे और अक्सर बीमार रहने पर पोंटी ने कामकाज संभाला. शराब बिक्री के कारोबार के साथ उन्होंने बाल विकास पुष्टाहार यानि मिड डे मील का काम शुरू किया. दलिया, पंजीरी आदि के वितरण में भी उनकी खूब कमाई हुई. वर्ष 2000 से पोंटी का कारोबारी साम्राज्य परवान चढ़ता गया. माना जाता है कि इस दौरान उत्तर प्रदेश में जितनी भी सरकारें आईं, उन सबसे पोंटी के बेहतर रिश्ते रहे. खास तौर पर बीते पांच साल में सत्ता से उनकी करीबी की खासी चर्चा रही. उन्होंने खनिज उत्खनन, चीनी मिलों के साथ-साथ रियल स्टेट के कारोबार में कदम रखा. चण्डीगढ़, नोएडा, लखनऊ सहित अनेक स्थानों पर उन्होंने वेव शॉपिंग मॉल, मल्टीप्लेक्स की श्रृंखला खड़ी की. नोएडा में वेवसिटी के नाम से एक अत्याधुनिक आवासीय परियोजना भी शुरू की.

उन्होंने अलीगढ़ में शराब और बीयर फैक्ट्री डाली. माना तो यह भी जाता है कि पूरे उत्तर प्रदेश में थोक व फुटकर शराब बिक्री में उनका एकछत्र साम्राज्य है. मेरठ को स्पेशल आबकारी जोन बनाया गया तो वहां भी उनका वर्चस्व हो गया. आरोप तो यह भी लगते हैं कि चालू वित्त वर्ष में ही अगले वित्त वर्ष के लिए जो आबकारी नीति बनी, उसमें भी पोंटी की दखलंदाजी है. पोण्टी की कंपनी ए.बी.फिल्म्स फिल्म वितरण के साथ फिल्म निर्माण भी करती है. इसके नाम ह्यरेडी सहित कई चर्चित फिल्में हैं.

पोंटी चड्ढा के लोग यूपी में बोतल पर छपे दाम से 20 रूपया ज्यादा वसूलते हैं डंके की चोट पर. यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मायावती के करीबी पर छापे इस पूरे मामले को अहम बना देते हैं. वैसे सूत्रों के मुताबिक पोंटी ने शराब की बोतलों पर छपे दाम से 20 रुपए ज्यादा की जो वसूली की है उसे आधार बना कर पुख्ता सूचना पर छापेमारी हुई है. पोंटी को शराब के कारोबार ने सियासी गलियारों तक पहुंचाया. पंजाब से शुरुआत हुई. उत्तर प्रदेश की मुलायम सरकार के दौरान जड़ें जमाईं और इसके बाद मायावती सरकार में खूब फले फूले. लेकिन मायावती सरकार से उनकी करीबी से ही उनकी मुश्किलें बढ़ने लगीं.

साल दो हजार नौ यानी अब से दो साल पहले कुछ ऐसा हुआ जो देश में पहले कभी नहीं हुआ था. उत्तर प्रदेश सरकार ने शराब के कारोबार में राजस्व वसूली का छह हजार करोड़ का टेंडर पोंटी चड्ढा की प्राइवेट फर्म को सौंप दिया. चौंका देने वाले इस फैसले के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया था कि मायावती सरकार ने अपने करीबी पॉन्टी चड्ढा को पूरे प्रदेश के शराब कारोबार को अपने इशारों पर नचाने का अधिकार दे दिया है.

पॉ़न्टी चड्ढा का एक और पारिवारिक कारोबार भी विवादों के घेरे में रहा है. पिता कुलवंत सिंह ने साठ के दशक में पहली चीनी मिल मुरादाबाद में लगाई थी तब से ही पोंटी इसकी भी देखरेख कर रहे थे. पॉन्टी पर इल्जाम लगा कि मायावती सरकार के साथ मिल इस धंधे को उन्होंने गोरखधंधे में बदल दिया. दरअसल यूपी सरकार ने साल दो हजार दस में 10 मिलों की नीलामी की थी और इल्जाम ये था कि नीलामी की शर्ते ऐसी थीं कि सिर्फ दो कंपनियां ही नीलामी में शामिल हो पाईं जिसमें एक पोंटी चड्ढा की थी. ये भी आरोप था कि पॉन्टी को मिल बेचने के लिए रिजर्व दामों से आधे पैसे में ही नीलामी कर दी गई जबकि आमतौर पर ऐसा नहीं होता.

पोंटी चड्ढा की पूरी कहानी, सारे घपले घोटाले पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- जंगलराज में पोंटी का साम्राज्य

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