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पोंटी के ठिकानों पर छापेमारी से उत्‍तराखंड के कई नेताओं की नींद उड़ी

उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश से शुरू करके देश के कई राज्यों में शराब की गंगा बहाने वाले शराब किंग से व्यवसायी व उद्योगपति बने पोंटी चड्ढा के ठिकानों पर छापेमारी के बाद आयकर विभाग हैरान है तो कई नेता व नौकरशाह परेशान. यद्यपि  पोंटी के उत्तराखंड के ठिकानों पर छापे नहीं पड़े पर इन छापों की तपिश उत्तराखंड में भी महसूस होने लगी है. चुनाव की थकान मिटाने वाले उन नेताओं की नींद हराम हो गयी है, जो इस शराब किंग के पेरोल पर हैं और चुनावों के लिए उसकी मदद ली है.

उत्तराखंड व उत्तरप्रदेश से शुरू करके देश के कई राज्यों में शराब की गंगा बहाने वाले शराब किंग से व्यवसायी व उद्योगपति बने पोंटी चड्ढा के ठिकानों पर छापेमारी के बाद आयकर विभाग हैरान है तो कई नेता व नौकरशाह परेशान. यद्यपि  पोंटी के उत्तराखंड के ठिकानों पर छापे नहीं पड़े पर इन छापों की तपिश उत्तराखंड में भी महसूस होने लगी है. चुनाव की थकान मिटाने वाले उन नेताओं की नींद हराम हो गयी है, जो इस शराब किंग के पेरोल पर हैं और चुनावों के लिए उसकी मदद ली है.

बताया जाता है कि इसने अपने राजनीतिक गुर्गों को आदेश दिया है कि खंडूड़ी को किसी भी कीमत पर सत्ता में न आने दें ताकि वे निर्विघ्‍न ढंग से राज्य की संपदा को लूट सके. राज्य में उसने नेताओं व नौकरशाहों की मदद से जमीने कौड़ियों के भाव पर ली है. उत्तराखंड के नेताओं में पोंटी से नाम जुड़ना स्टेटस सिम्बल माना जाता है. पहाड़ों में शराब की अधिकांश दुकानें सिंडिकेट की है. ये दुकाने भले ही स्थानीय लोगों के नाम पर निकली हैं पर इसका पूरा संचालन सिंडिकेट करता है. और इस सिंडिकेट के तार पोंटी की शराब फैक्टरियों से जुड़े हैं. बताया जाता है कि उससे मदद पाने वाले नेता भी पोंटी के दर्शनों को तरसते हैं. वह सारा काम वह अपने एजेंटों के माध्यम से करता है. पोंटी को अपना पुराना मित्र बताने वाले एक नेता के  अनुसार, वह सिर्फ खंडूड़ी से भय खाता है. उसे पता है कि खंडूड़ी शासन में उसकी लूट नहीं चल सकेगी. इसलिए उसके गुर्गों ने खंडूड़ी के खिलाफ काम किया. बताया जाता है कि भाजपा के ही शासन में उसने पहाड़ों में करोड़ों की जमीने हथियाई है. पोंटी के पेरोल पर पलने वाले नेताओं व नौकरशाहों को डर है कि कहीं पोंटी की ब्लैक डायरी में उनका नाम निकला तो लेने के देने पड़ सकते हैं.

उत्‍तराखंड से वरिष्‍ठ पत्रकार विजेंद्र रावत की रिपोर्ट.

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