ये ख़बर उन पत्रकार बंधुओं के लिए नसीहत हो सकती है जो कि क्षणिक लाभ के लिए अपने ही पत्रकार बंधुओं के खिलाफ़ षडयंत्र रचते हैं। मालिकान के सामने नंबर बढ़ाने की होड़ में ये लोग अपनी ही बिरादरी के लोगों से दुश्मनी मोल लेते है हालांकि बाद में जब इन्हे इनकी ग़लती का अहसास होता है- तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
ऐसा ही एक उदाहरण सहारा समय भोपाल ब्यूरो से है। यहां के ब्यूरो चीफ- कॉर्डिनेटर अजय भटनागर ने अपने नोएडा स्थित बॉस को खुश करने की होड़ में पूर्व ब्यूरो चीफ प्रकाश तिवारी के खिलाफ़ एक फर्जी पुलिस रिपोर्ट दर्ज करा दी। इस रिपोर्ट में अजय भटनागर ने प्रकाश तिवारी को सट्टेबाज़ क़रार दिया। अपनी इस कारस्तानी को अंजाम देने की सनक में अजय भटनागर ने भोपाल के एडिशनल एसपी का एक फर्जी लैटर तक तैयार कर डाला, जिसमें प्रकाश तिवारी के खिलाफ़ जांच किये जाने की बात लिखी थी।
अजय भटनागर का ये झूठ उस वक्त पकड़ा गया जब प्रकाश तिवारी, जो कि आज कल साधना न्यूज़ मप्र-छग के चैनल हेड के तौर पर कार्यरत हैं, ने, सूचना के अधिकार के ज़रिए इस लैटर की हकीक़त उजागर कर दी। सूचना के अधिकार के तहत पुलिस द्वारा ये स्वीकार किया गया कि उनके विभाग के द्वारा ऐसी कोई जांच नहीं की जा रही है और उक्त लैटर पूर्ण तरह फर्जी है।
दरअसल, अजय भटनागर ने प्रकाश तिवारी की छवि धूमिल करने के लिए उनके खिलाफ़ फर्जी पुलिस का लेटर तैयार किया और अपने आका को खुश कर अपने को ब्यूरो चीफ बनाये जाने का कर्जा चुकाया। लेकिन उनका ये दांव अब उन पर ही भारी पड़ गया है और अब भोपाल की एमपी नगर पुलिस ने अजय भटनागर के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 193, 182 एवं 211 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
इस एफआईआर के बाद से ही पुलिस जहां, अजय भटनागर को ढू़ंढ़ते हुए कई मर्तबा सहारा समय के दफ्तर जा चुकी है, वहीं अजय भटनागर यहां वहां छिपते छिपाते मदद मांगते नज़र आ रहे हैं। बताया जाता है कि इस मामले में अजय भटनागर ने अपने आकाओं से मदद मांगी तो उन्होंने भी अपने हाथ खड़े कर दिये हैं। ऐसे में सहारा ब्यूरो चीफ की स्थिति बेहद पतली हो गई है। गलत तरीके से दूसरे को नीचे दिखाने का अंजाम अब अजय भटनागर को खुद भुगतना पड़ रहा है।
इस संदर्भ में पूछे जाने पर प्रकाश तिवारी ने कहा कि इस तरह की मामला उन पत्रकारों के लिए नजीर होगा, जो अपने मालिकों के कहने पर कोई भी गलत काम करने से नहीं चूकते हैं। गलत काम करने का खामियाजा भुगतना ही पड़ता है। अपने चरित्र पर लगाए गए फर्जी आरोपों के चलते सालों मैं मानसिक परेशानियों से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को खबरों की लड़ाई लड़नी चाही गलत या फर्जी लेटरों की नहीं। यह मामला ऐसा करने वाले पत्रकारों के लिए उदाहरण है।







