Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

दिल्ली

प्रधानमंत्री नामक नाटक अपने दुखान्त की ओर

सोनिया कांग्रेस इस देश में अपनी सरकार चला रही है । इस पार्टी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गान्धी और उपाध्यक्ष उनके सुपुत्र राहुल गान्धी हैं । सरकार के प्रधानमंत्री फ़िलहाल मनमोहन सिंह हैं । मनमोहन सिंह की सहायता के लिये या फिर उनकी घेराबन्दी करने के लिये एक कैबिनेट भी है । इस कैबिनेट में भी अधिकांश सदस्य सोनिया कांग्रेस से ही ताल्लुक रखते हैं । सोनिया कांग्रेस द्वारा इस देश में पिछले दस साल से जो प्रधानमंत्री नामक नाटक खेला जा रहा है , उस नाटक के यही मुख्य पात्र हैं । नाटक की इस पूरी पटकथा में प्रधानमंत्री की भूमिका में डा० मनमोहन सिंह हैं ।इस लिहाज़ से वही नाटक के नायक के रुप में जाने जाते हैं । 

सोनिया कांग्रेस इस देश में अपनी सरकार चला रही है । इस पार्टी की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गान्धी और उपाध्यक्ष उनके सुपुत्र राहुल गान्धी हैं । सरकार के प्रधानमंत्री फ़िलहाल मनमोहन सिंह हैं । मनमोहन सिंह की सहायता के लिये या फिर उनकी घेराबन्दी करने के लिये एक कैबिनेट भी है । इस कैबिनेट में भी अधिकांश सदस्य सोनिया कांग्रेस से ही ताल्लुक रखते हैं । सोनिया कांग्रेस द्वारा इस देश में पिछले दस साल से जो प्रधानमंत्री नामक नाटक खेला जा रहा है , उस नाटक के यही मुख्य पात्र हैं । नाटक की इस पूरी पटकथा में प्रधानमंत्री की भूमिका में डा० मनमोहन सिंह हैं ।इस लिहाज़ से वही नाटक के नायक के रुप में जाने जाते हैं । 

वैसे सोनिया गान्धी नाटक के शुरू में ही स्वयं नायक की भूमिका में रहना चाहतीं थीं , लेकिन क्योंकि वे मूल रुप से विदेशी हैं और इटली से एक विवाह सम्बध द्वारा इस देश में आईं हैं , अत: भारतीय सांविधानिक नाट्यशास्त्रियों ने व्यवस्था दी कि वे इस नाटक में प्रधानमंत्री की भूमिका नहीं निभा सकतीं । अत: बहुत जल्दी में मनमोहन सिंह को यह भूमिका दी गई ।

चाहे नाटक वही था , लेकिन नायक के रुप में नये व्यक्ति के आ जाने से पटकथा लेखक को मूल स्क्रिपट में आमूल परिवर्तन करने के लिये कहा गया । नाटक में एक नई भूमिका एवं नये पात्र को डाला गया । यह नई भूमिका राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के अध्यक्ष की थी । नाटक में यह नई भूमिका सोनिया गान्धी को दी गई । ज़ाहिर है नाटक में इस नई भूमिका एवं नये पात्र के आ जाने से नाटक की पटकथा में परिवर्तन होता । नाटक की पहली पटकथा में तो प्रधानमंत्री नामक पात्र की भूमिका सबसे जानदार थी , लेकिन अब नई पटकथा में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की अध्यक्षा की भूमिका जानदार बना दी गई । व्यवहारिक रुप से प्रधानमंत्री की सारी भूमिका इस नये पात्र को दे दी गई । और प्रधानमंत्री के नये संवाद अर्थहीन ,दिशाहीन लिखे गये और पूरे नाटक में नायक की भूमिका में होने के बाबजूद उसकी भूमिका को दीन हीन बना दिया । रंगमंच पर इस नायक को देख कर दर्शकों को पहले पहल तरस आता था , फिर ग़ुस्सा आने लगा और अब मामला हास्य संचार तक पहुँच गया । उधर पटकथा लेखक अपनी पीठ ठोकने लगे । नाटक में एक ही पात्र नाट्य शास्त्र के सभी रसों की निष्पत्ति एक साथ कर रहा था ।

भारतीय रंगमंच पर यह नाटक पिछले दस साल से चल रहा है । लेकिन लगता है अब इस नाटक का पटाक्षेप होने वाला है । शायद इसीलिये नाटक की पटकथा और अंकों में इतनी जल्दी परिवर्तन किये जा रहे हैं कि दर्शकों के लिये कथा में तारतम्य बिठाना मुश्किल होता जा रहा है । दो उदाहरण पर्याप्त होंगे । पिछले दिनों उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि जिन लोगों को तीन या उससे ज़्यादा साल की सजा किसी आपराधिक मामले में हो जायेगी , उनकी संसद सदस्यता या विधानमंडल की सदस्यता समाप्त हो जायेगी । यह इस नाटक के रंगमंच पर अचानक हुआ धमाका था जिसकी किसी ने कल्पना तक न की थी । लेकिन जल्दी ही इस से नाटक चला रही कम्पनी सोनिया कांग्रेस के अनेक सदस्यों के बाहर हो जाने का ख़तरा पैदा हो गया । राजवंश में हड़कम्प मच गया । कल कहीं राजवंश का ही कोई जन पकड़ में आ गया तो ? सारा खेला बिगड़ रहा था । क्या कोई इस बात से इंकार करेगा कि आगे की कथा राजमहल के भीतर माँ सोनिया गान्धी और बेटे राहुल गान्धी ने ही लिखी होगी ? आख़िर रंगमंच पर हुये इस धमाके से जिनके आहत होने की संभावना बढ़ गई थी , उनको बचाने का प्रश्न था । उनको खरोंच तक न आये , इसकी व्यवस्था करनी थी । यह व्यवस्था राजमहल ही कर सकता था , क्योंकि वहीं पिछले दस साल से इस नाटक के नये अंक का प्रदर्शन होने से पहले रिहर्सल होती रही है । नया अंक तैयार हो गया था । इस अंक में भाग लेने वाले सभी पात्रों को उनके संवाद बता दिये गये थे । नये सिरे से रंगमंच सजाया गया । पर्दा उठा । कैबिनेट की बैठक चल रही है । प्रधानमंत्री ने नया अध्यादेश पढ़ कर सुना दिया । इसके अनुसार अब किसी आपराधिक मामले में सजा हो जाने के बाद भी राजनैतिक कम्पनियों के अंशधारकों का बाल बाँका नहीं होगा । कैबिनेट में सभी ने प्रधानमंत्री के संवाद पर तालियाँ बजा कर उसका समर्थन किया । अध्यादेश राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया । उधर माँ बेटे ने इस अंक के सफलता पूर्वक निष्पादित हो जाने पर अपनी प्रबन्धकीय योग्यता पर स्वयं को ही बधाई दी । राजमहल के आगे बैसे भी दरबारी आने लगे थे ।

नाटक का अगला अंक सुदूर वाशिंगटन में खेला जाने वाला था । वहाँ नाटक के नायक मनमोहन सिंह को अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नबाज शरीफ़ के साथ रुआबदार आवाज़ में सख़्त संवाद बोलने थे । अंक की गंभीरता को देखते हुये पटकथा लेखक ने भी नायक के लिये इसी प्रकार के संवादों की रचना कर दी थी । नायक ने भी अंक को प्रभावी बनाने के लिये ज़ोरदार रिहर्सल कर रखी थी । आख़िर यह भारत की प्रतिष्ठा का सवाल था । कहीं भी चूक हो गई तो देश की भद्द पिटेगी । वाशिंगटन में रंगमंच सज गया । नायक मनमोहन सिंह भी जान तोड़ रिहर्सल के बाद एक झपकी ले रहे थे । पर्दा उठा ।

लेकिन यह क्या ? नाटक कम्पनी ने इधर दिल्ली में भी  इसी नाटक का एक नया अंक खेलने के लिये रंगमंच सजा दिया । दर्शकों में हड़कम्प मचा । उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था । एक ही नाटक के एक साथ दो अंक कैसे खेले जा सकते हैं ? वह भी दो अलग अलग स्थानों पर । फिर नाटक का नायक तो वाशिंगटन में पहले ही रंगमंच पर पहुँच चुका है । दिल्ली में आख़िर रंगमंच सजाया ही क्यों जा रहा है ? दर्शक दरबारी सब गिरते पड़ते दर्शक दीर्घा की ओर आ रहे थे । सब की साँस अटकी हुई थी । अभी भी कुछ को विश्वास था , किसी ने मज़ाक़ किया होगा । बिना नायक के खेला कैसे होगा भाई ? नायक की ग़ैरहाजिरी में खेला तो नायक की पीठ में छुरा घोंपना होगा । सभी को पर्दा उठने का इंतज़ार था । पर्दा उठा । मंच पर आस्तीन चढ़ाते हुये ग़ुस्से में युवराज राहुल गान्धी नमूदार हुये । दर्शक समझ गये । अब की बार कोई बडा खेला होने वाला है । तब तक राहुल गान्धी ने गर्जना शुरु कर दिया था । यह जो अध्यादेश है यह बकवास है । दर्शक हैरान हैं । कौन सा अध्यादेश भाई ? अरे वही जिसे मनमोहन सिंह ने माँ बेटे के कहने पर राष्ट्रपति के पास भेजा है । नाटक के पिछले अंक नहीं देखे का ? राहुल गान्धी यहीं नहीं रुके । यह अध्यादेश फाड़ कर बाहर फेंक देना चाहिये । उन्होंने एक बार फिर आस्तीन चढ़ाते हुये गंभीर और चिन्तक होने का असफल अभिनय किया । विदूषक ने घोषणा की । आज का खेला यहीं समाप्त होता है । अब आप वाशिंगटन में होने वाले खेला को आराम से देख सकते हो । लेकिन वहाँ के खेला में देखने लायक बचा ही क्या था ?

रंगमंच सजा रहे स्टाफ़ ने दिल्ली में खेले गये इस अंक की आँखों देखी झपकी ले रहे मनमोहन सिंह को जगा कर सुना दी । बेचारे मनमोहन सिंह ! अब वे ओबामा और नवाज़ शरीफ़ से कैसे ताक़त से बात कर सकेंगे । वाशिंगटन में चिमगोईंयां हो रही हैं । भारत में खेले जा रहे प्रधानमंत्री नाम के इस नाटक का असली नायक कौन है ?  वैसे भी अमेरिका नक़ली नायकों से बात नहीं करता , वह सीधा असली नायक से ही बतियाता  है ? पाकिस्तान में वह वहाँ के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को घास नहीं डालता , सीधा सेना से ही बात कर लेता है ।

आख़िर सवाल यह है कि माँ बेटे ने नाटक के भीतर यह नया नाटक क्यों किया , जिससे विदेशों में भारत के प्रधानमंत्री का अपमान हुआ । यह तो सभी जानते हैं कि दस साल से चल रहे इस नाटक का शीघ्र ही पटाक्षेप होने वाला है । भारतीय नाट्यशास्त्र में नाटक का अंत सुखान्त होना चाहिये । यह यहाँ की परम्परा रही है । लेकिन यूरोप में हर नाटक का अन्त दुखान्त होता है । विद्वान लोग इटली के मैकयावली की किताबें उलट पुलट रहे हैं । शायद माँ बेटे के व्यवहार का रहस्य वहीं से समझ में आ जाये । यह ठीक है कि माँ बेटा मिल कर इस नाटक का संचालन कर रहे हैं , लेकिन फिर भी उन्हें भारत के प्रधानमंत्री का इस प्रकार अपमान करने का अधिकार तो नहीं हैं । उस प्रधानमंत्री का जिसने आज तक लिख कर दिये गये संवादों के अतिरिक्त एक शब्द भी अपनी ओर से नहीं बोला । कहीं ऐसा तो नहीं कि हम समझते रहें कि नाटक की सूत्रधार सोनिया गान्धीं हैं , लेकिन असली सूत्रधार कोई और ही निकले ? पर्दे के पीछे का सूत्रधार । भारत को अपमानित करने के पीछे कोई बडा कारण तो ज़रुर रहा होगा । नहीं तो आस्तीन चढ़ा कर संवाद बोलने का अभिनय राहुल गान्धी चार दिन बाद मनमोहन सिंह के देश परत आने के बाद भी कर सकते थे । लगता है भीतर ही भीतर कोई बडा खेला होने वाला है ।

Dr Kuldip Chand Agnihotri

[email protected]

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...