मनीष द्वारा लिखा गया लेख 'बिहार में किस्सा वही दोहराया गया, नीतीश से जुड़ी निगेटिव खबर को दबाया गया' न सिर्फ आधा-अधूरा सत्य है बल्कि यह पूरी तरह से भ्रामक भी है. मनीष बिना अखबार को पढ़े या तथ्यों को जाने-समझे लिखा है कि नीतीश को बचाने के लिए कुछ अखबारों ने खबर प्रकाशित नहीं की है जबकि हिंदुस्तान और प्रभात खबर ने इसे अंदर के पन्नों पर लिया है. खबर से लग रहा है कि मनीष या तो अखबार पढ़ते नहीं या किसी दुर्भावना से ग्रसित होकर उन्होंने यह लेख लिखा है.
मनीष लिखते हैं कि विनय कुमार सिन्हा के संस्थानों पर छापेमारी की खबर को प्रभात खबर ने 23 मार्च शुक्रवार को अपने नौंवें पन्ने पर प्रकाशित किया, परन्तु लग रहा है कि लेखक 22 मार्च का अखबार पढ़ना भूल गए. प्रभात खबर ने विनय कुमार सिन्हा तथा अन्य लोगों के ठिकानों पर आयकर की छापमारी की खबर को 22 मार्च गुरुवार को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया, वो भी अपने पहले पन्ने तथा टॉप पर.







