भास्कर की आहट के बाद बिहार के सभी अखबार अपने तीर-कमान पर से जंग छुड़ाने में जुट गए हैं। प्रभात खबर के पटना समेत बिहार के अन्य यूनिटों में कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया है। यह प्रमोशन सीनियर से चीफ सब एडीटर तक का है। एकाध को डीएनए भी बनाया गया है। बताया जाता है कि प्रमोशन के साथ पैसों में भी इजाफा हुआ है।
चर्चा है कि भास्कर का टारगेट प्रभात खबर ही है। इस बात से प्रबंधन भी अवगत है। यही कारण है कि कर्मचारियों के असंतोष को कम करने और अखबार से जोड़े रखने के लिए प्रभात खबर ने प्रोन्नति दी है। हालांकि इसका लाभ सभी को नहीं मिला है। प्रोमोशन से वंचित लोगों में असंतोष भी बताया जा रहा है।
उधर हिन्दुस्तान कनटेंट के स्तर पर एक्सरसाइज शुरू कर दिया है। हिन्दुस्तान प्रबंधन का मानना है कि उच्च वेतन वाले कर्मचारी अखबार नहीं छोड़ेंगे, लेकिन मध्यम वेतन लोगों के लिए विकल्प खुला है। यही वजह है कि हिन्दुस्तान कुछ सुपर स्ट्रिंगरों को स्टाफर बनाने पर विचार कर रहा है।
इस बीच भास्कर ने अभी बड़े पैमाने पर नियुक्ति की शुरुआत नहीं की है। माना जा रहा है कि छठ के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होगी। हांलाकि एका-दुका नियुक्ति अभी भी हो रही है। भास्कर से जुड़ने की अपेक्षा रखने वाले लोग उसके वेतनमान को लेकर संशय की स्थिति में हैं। दूसरे अखबारों से टूटने व भास्कर से जुड़ने की गति बहुत कुछ भास्कर के वेतनमान व कार्यशैली पर भी निर्भर कर सकती है।
उधर सभी अखबार आक्रमक मार्केटिंग पर उतर आए हैं। सभी का अभी सदस्यता अभियान चल रहा है और एक से बढ़कर एक प्रलोभन पाठकों को दिया जा रहा है। इस मामले में भास्कर को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्राहक पहले अखबार की मांग कर रहे हैं और भास्कर का अभियान चलाने वाले अभी सिर्फ आश्वासन व अखबार निकलने की तिथि भर बता रहे हैं।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






