पश्चिम बंगाल की चिटफंड कंपनी तथा कई भाषाओं में अखबारों का प्रकाशन कर चुकी चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप पर पुलिससिया कार्रवाई तेज हो गई है. बिद्धानगर में पुलिस ने इस चिटफंड कंपनी के एक डाइरेक्टर को अरेस्ट कर लिया है जबकि मालिक अभी भी फरार है. पुलिस ने चिटफंड कंपनी के मालिक को अरेस्ट करने के लिए कई जगहों पर खोजी अभियान चला रखा है. कंपनी के डाइरेक्टरों पर निवेशकों का करोड़ों रुपये लेकर भागने का आरोप है.
गौरतलब है कि चिटफंड कंपनी शारदा ग्रुप ने एक साल पहले मीडिया के माध्यम से अपना बचाव करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू तथा हिंदी में अखबारों का प्रकाशन कोलकाता और सिलीगुड़ी समेत कुछ और जगहों से शुरू किया था. शारदा ग्रुप हिंदी में 'प्रभात वार्ता', अंग्रेजी में 'बंगाल पोस्ट', उर्दू में 'कलम' तथा बंगाली में 'साकाल बेला' का प्रकाशन कोलकाता और सिलीगुड़ी से कर रहा था. परन्तु आर्थिक नुकसान तथा चिटफंड कंपनियों पर सरकार का शिकंजा कसने के बाद कंपनी ने सभी चारों अखबारों का प्रकाशन बंद कर दिया.
शारदा समूह के इस निर्णय से कम से कम 1300 पत्रकारों तथा गैर पत्रकार कर्मचारियों की रोजी रोटी छीन गई. हिंदी, उर्दू अखबार में काम करने वालों को प्रबंधन ने पूरी तरह ठग लिया. उनके पीएफ तथा बकाया वेतन तक चुकते नहीं किए गए. जबकि बांग्ला अखबार के कर्मचारियों ने ऑफिस के सामानों को उठाकर अपने घर ले गए तथा अपने सैलरी की कुछ हद तक भरपाई कर ली. हालांकि इसमें भी कई कर्मचारी चुक गए. नाराज कर्मचारी अब प्रबंधन के खिलाफ सड़क से लेकर कोर्ट तक में आंदोलन करने की तैयारी कर रहे हैं. तमाम पत्रकार तथा गैर पत्रकार कर्मचारियों की सैलरी तथा पीएफ कंपनी ने चुकता नहीं किया है.
इस बीच चिटफंड कंपनी में धांधली के आरोपों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने शनिवार को कंपनी के मनोज कुमार नागेल को अरेस्ट कर लिया है. मनोज कुमार कंपनी में डाइरेक्टर बताए जा रहे हैं. जबकि पुलिस चिटफंड कंपनी शारदा समूह के चेयरमैन सुदीप्त सेन की तलाश कर रही है. बिद्धानगर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सुदीप्त सेन की पुलिस कई जगहों पर तलाश कर रही है. हवाई अड्डे पर भी एलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि सुदीप्त सेन कहीं बाहर न भाग सके.
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुदीप्त सेन के गिरफ्तारी का आदेश जारी कर चुकी है. सुदीप्त सेन की चिटफंड कंपनी शारदा समूह पर निवेशकों से भारी पैमाने पर ठगी करने का आरोप है. हालांकि पत्रकारों से कंपनी प्रबंधन ने धोखा किया है. गौरतलब है कि पत्रकार कोटे से तृणमूल कांग्रेस द्वारा राज्यसभा सांसद बनाए गए कुणाल घोष शारदा समूह के अखबार में सीईओ के रूप में जुड़े हुए थे. अब देखना है कि बंगाल सरकार पत्रकारों का साथ देती है या प्रबंधन का.






