देहरादून। कई अखबार ऐसे हैं जो सिर्फ डीएवीपी की वेबसाइट पर नजर आते हैं, जनता के बीच कतई नहीं. इन समाचार पत्रों को चलाने वाले सम्पादक राज्य सरकार से विज्ञापनों का खेल बड़े पैमाने पर खेल रहे हैं और राज्य सरकारें भी फाइलों तक सीमित होने वाले इन अखबारों को मोटे विज्ञापन देकर इनकी झोली भर रही है.
उत्तराखण्ड राज्य के 503 समाचार पत्र वर्तमान में डीएवीपी से मान्यता प्राप्त समाचार पत्रों की सूची में शामिल हैं. ज्यादातर समाचार पत्रों की सिर्फ फाइल कापी छपती है और विभागों से मोटी रकम वसूल रहे हैं. इसका कुछ हिस्सा सुचना विभाग के अधिकारियों की जेबों में भी जा रहा है.
प्रभा वर्मा नामक एक महिला दर्जन भर से अधिक समाचार पत्र संचालित करती हैं. ये महिला गलत तरीके से समाचार पत्रों का प्रकाशन कर डीएवीपी से रेट तक हासिल कर चुकी हैं. इन समाचार पत्रों को जिस प्रिन्टिंग प्रेस में छपना दर्शाया गया था वहां उक्त समाचार पत्र छपते तक नहीं थे. उत्तराखण्ड तहकीकात, टाइटैनिक एक्सप्रैस सहित दर्जन भर से अधिक समाचार पत्रों की सम्पादक के तौर पर प्रभा वर्मा का यह खेल खुल गया.
डीएवीपी ने शिकायत होने पर प्रभा वर्मा के समाचार पत्रों को रेट लिस्ट से हटा दिया. वर्तमान में टाइटैनिक एक्सप्रैस वीकली ही डीएवीपी की रेट लिस्ट में शेष रह गया है. प्रभा वर्मा की तरह उत्तराखण्ड की मीडिया में कई अन्य सम्पादक भी यह खेल बखूबी खेल रहे हैं.






