भारत सरकार मनरेगा में कम से कम 100 दिन और औसतन 200 दिन के काम की गारंटी दे रही है….दूसरी ओर प्रसार भारती ने एक आदेश निकाल कर कैजुअल काम करने वाले कलाकारों, पत्रकारों, न्यूज रीडरों, एनाउन्सरों, वीडियो एडिटरों जैसे कर्मियों को माह में अधिकतम 7 बुकिंग देने का फरमान जारी कर दिया…. अर्थात साल में अधिकतम 84 दिन के काम की गारंटी…. क्या थके हुए दूरदर्शन-आकाशवाणी को धक्का देकर चलाने वाले ये लोग मनरेगा के मजदूर से भी गए बीते हैं…
क्या मनीष तिवारी, प्रसार भारती बोर्ड, पत्रकार यूनियनें इस तरफ ध्यान देंगीं? यहां यह भी स्पष्ट कर दूं कि यह आदेश आकाशवाणी और दूरदर्शन दोनों की संयुक्त बुकिंग पर लागू होता है…अर्थात वह दोनों जगह कुल मिलाकर अधिकतम 7 बुकिंग ले सकता है.. क्या बात है प्रसार भारती…आप अपने बेहतरीन स्टफ को…..न्यूनतम गारंटी देने को तैयार नहीं हो…..आप श्रम कानून का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हो…आपने अधिकतम बुकिंग का जो प्रावधान पहले 10 बुकिंग प्रति माह था, उसे बढाने की बजाए घटाकर 7 बुकिंग प्रतिमाह कर दिया…. तय है कि आप सरकार को सुसाइड कराने के लिए आए हो… या फिर आपको इस सिस्टम की धेले भर समझ नहीं है.
राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार धीरज कुलश्रेष्ठ की रिपोर्ट.






