दिनेशपुर। उत्तराखंड राज्य के छोटे से कस्बे दिनेशपुर से प्रकाशित लघु पत्रिका ‘प्रेरणा-अंशु’ द्वारा आयोजित ‘अखिल भारतीय लघु कथा प्रतियोगिता 2011’ का पुरस्कार वितरण समारोह और ‘साहित्य और समाज के लिए सावधिक पत्र-पत्रिकाओं का महत्व’ विषय पर संगोष्ठी यहां माता साहिब कौर गुरुद्वारे में स्थित एमएसके अकैडमी परिसर में आयोजित किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि सभ्य, सुसंकृत और संवेदनशील आदमी के निर्माण के लिए साहित्य और लघु पत्र-पत्रिकाएं आवश्यक हैं।
कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष बाबा कश्मीर सिंह, कांग्रेस नेता हरेंद्र सिंह लाडी, साहित्यकार पंकज बिष्ट, मास्टर प्रताप सिंह, विशिष्ट अतिथि जरनैल सिंह काली आदि ने मां सरस्वती एवं शहीदे-आजम भगत सिंह के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। नन्हीं नृत्यांग्ना मालती चटर्जी ने अतिथियों के स्वागत में नृत्य-गीत प्रस्तुत किया। ‘शैलनट’ नाट्य संस्था के कलाकारों ने भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता पर आधारित नाटक ‘तमाशा’ पेश किया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण में ‘प्रेरणा-अंशु’ के संपादक प्रताप सिंह ने पत्रिका की 24 वर्ष की यात्रा के बारे में संक्षेप में जानकारी दी और समाज के लिए लधु पत्र-पत्रिकाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। साहित्यकार शंभुदत्त पांडेय ‘शैलेय’ ने कहा कि साहित्य सामूहिकता की बात करता है। लघु पत्रिकाओं में मानवबोध व्यक्त होता है। यह समाज को जोड़ने का काम करती हैं। वरिष्ठ पत्रकार और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि देश के तमाम दिग्गज पत्रकारों, साहित्यकारों की प्रारंभिक रचनाएं पहले लघु पत्र-पत्रिकाओं में ही छपीं। छोटे अखबारों ने विभिन्न जनांदोलनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनके अनेक पाठक तमाम ऊंचाइयां हासिल करने के बावजूद हमेशा समाज की बेहतरी के पक्ष में खड़े रहे। इसी से छोटे पत्र-पत्रिकाओं का महत्व समझा जा सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार और ‘समयांतर’ पत्रिका के संपादक पंकज बिष्ट ने संगोष्ठी के मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए कहा कि हम वर्तमान में पूंजी के युग में जी रहे हैं। मुख्यधारा के मीडिया में बड़ी पूंजी लगी है। बड़ी पूंजी हमेशा अधिक मुनाफे के लिए निवेश की जाती है। अतः उसे जनसरोकारों से कोई मतलब नहीं होता। 90 प्रतिशत संसाधनों पर 10 प्रतिशत लोगों का कब्जा है। साहित्य, कला एवं संस्कृति हमारे भीतर विवेक और मूल्य पैदा करता है। यह बड़ी पूंजी को पसंद नहीं है इसलिए अखबारों में कला, संस्कृति और साहित्य के लिए जगह नहीं है और आम आदमी की दिक्कतों से उसे कोई सरोकार नहीं है। पूंजी अपने मुनाफे के हिसाब से लोगों के बीच विचार पैदा कर रही है, इससे समाज संकटों से लगातार धिर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में लघु पत्र-पत्रिकाओं का दायित्व और बढ़ जाता है।
जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने -मंदिर में या मस्जिद में या गुरुद्वारे में, मेरा बच्चा पूछ रहा था आज खुदा के बारे में, प्यार के बंधन में बंधने में लग जाती हैं सदियां भी, लेकिन दंगे हो जाते हैं आंख के एक इशारे में’, जैसे-तैसे महंगाई पर काबू पाया जा सकता है, भूखे रहकर भी घर का खर्च घटाया जा सकता है, कम बारिश ही जननी है महंगाई की, साथ मीडिया दे तो लोगों से मनवाया भी जा सकता है’ कभी धान से कभी गेहूं से तेरी मंडियों ने दगा किया, मेरी खेतियों से तुझे बैर है तेरी नीतियों ने बता दिया’ आदि अनेक शेर प्रस्तुत किए। वरिष्ठ पत्रकार और उमेश डोभाल स्मृति न्यास के अध्यक्ष गोविंद पंत राजू ने लघु पत्र-पत्रिकाओं के उत्तराखंड के विभिन्न जनांदोलनों के विस्तार में योगदान की चर्चा करते हुए इनके महत्व पर प्रकाश डाला। अखिल भारतीय लघु कथा प्रतियोगिता के निर्णायक दीपा पांडे और कस्तूरीलाल तागरा ने लघु कथा के कथ्य, शिल्प और उसके महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में लघु कथा प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार और स्मृति चिन्ह प्रदान किए गये। प्रथम पुरस्कार राजस्थान के सत्य नारायण ‘सत्य’, छत्तीसगढ़ के देवांशु पाल और उ0प्र0 की संगीता सिंह को क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गये। इसके अतिरिक्त राजकुमार आत्रेय, पवित्रा अग्रवाल, अमित कुमार, पूरन सिंह, शशांक मिश्र ‘भारती’, नीता मुनगली, सुमन सिंह को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गये। कार्यक्रम में विभिन्न कवियों की कविताओं पर आधारित प्रदर्शनी को लोगों ने सराहा। ‘जन चेतना’ और ‘आधाशिला’ के स्टालों से लोगों ने अनेक साहित्यिक और वैचारिक किताबें खरीदीं। कार्यक्रम का संचालन वीरेश कुमार सिंह ने किया। इस अवसर पर ‘शब्द सत्ता’ के संपादक सुशील सीतापुरी, ‘जनपक्ष आजकल’ के संपादक चारू तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार प्रभात ध्यानी, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, बीसी सिंघल, प्रह्लाद सिंह कार्की, सुब्रतो गोस्वामी, प्रेरणा-अंशु के उप संपादक रूपेश कुमार सिंह, भाजपा नेता रविंद्र बजाज, कांग्रेस नेता सुभाष बेहड़, छात्र नेता रवि कुमार, डाॅ0 जेएन सरकार, केके गाबा, भोला शर्मा, राजेश नारंग, पद्यलोचन विश्वास, संतोष आर्य, कैलाश चंदोला शिल्पी अरोड़ा, हीरा जंगपांगी सहित सैकड़ों कवि लेखक, पत्रकार, शिक्षक, नेता, सामाजिक कार्यकर्ता आदि मौजूद थे।
लेखक और पत्रकार अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ की रिपोर्ट





