Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

प्रेस एसोशियेशन का चुनाव और कैसे-कैसे उम्‍मीदवार

नई दिल्ली में पीआईबी के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की एक संस्था है, प्रेस एसोशियेशन. बहुत पहले इसके बाकायदा चुनाव हुआ करते थे. आजकल तो एक ही व्यक्ति इस पर जमा हुआ है, चुनाव को अपने हिसाब से मैनेज कर लेता है. बहुत पहले एक बार प्रेस एसोशियेशन के चुनाव के दौरान कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि कल आप प्रेस क्लब आकर प्रेस एसोशियेशन के चुनाव को देखें और हम लोगों को थोड़ा सहयोग करें. मैंने उन लोगों से कहा कि भाई लोगों, मैं तो आपके एसोशियेशन का सदस्य नहीं हूँ. उन्होंने कहा कि इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

नई दिल्ली में पीआईबी के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की एक संस्था है, प्रेस एसोशियेशन. बहुत पहले इसके बाकायदा चुनाव हुआ करते थे. आजकल तो एक ही व्यक्ति इस पर जमा हुआ है, चुनाव को अपने हिसाब से मैनेज कर लेता है. बहुत पहले एक बार प्रेस एसोशियेशन के चुनाव के दौरान कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि कल आप प्रेस क्लब आकर प्रेस एसोशियेशन के चुनाव को देखें और हम लोगों को थोड़ा सहयोग करें. मैंने उन लोगों से कहा कि भाई लोगों, मैं तो आपके एसोशियेशन का सदस्य नहीं हूँ. उन्होंने कहा कि इस से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

मैं उनके द्वारा बताये गए समय पर सीढियां चढ़कर चुनाव स्थल पर पंहुच गया. वहां कुछ लोगों ने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए चार उम्मीदवार हैं. माधवन कुट्टी, शैलेन्द्र चटर्जी, राजेन्द्र प्रभु और वीवी बनियाल. बनियाल साहब हिन्दुस्तान टाइम्स में नौकरी करते थे. हाल में बैठे लोगों में से एक ने माइक से मेरा नाम पुकारा और कहा, 'दोस्तों हमारे बीच में त्यागी जी हैं, वह आप लोगों से कुछ बात करना चाहते हैं. उनमें से एक ने मुझे ले जाकर माइक के सामने खड़ा कर दिया और कहा कि आप निःसंकोच अपनी बात कहिये. मैंने कहा कि वैसे तो मुझे आप लोगों के बीच आना नहीं चाहिए था परन्तु जब यहाँ पर आ कर अपनी बात कहने का आदेश हुआ है तो कह देता हूँ.

मैंने आपके चुनाव में अध्यक्ष पद के चार उम्मीदवार देखे हैं. आप लोगों के सामने मैं भी इन सभी का सम्मान करता हूँ. परन्तु शायद आप लोग इन लोगों का बैक ग्राउंड नहीं जानते हैं. इनमें से एक उम्मीदवार शैलेन्द्र चटर्जी हैं. बुज़ुर्ग आदमी हैं. चटर्जी साहब कहते घूमते हैं कि मैं गांधी जी का परिचित हूँ. मैं नोआखाली में उनके साथ था. हमने माना कि साथ थे परंतु जिस दिन यानी ३० जनवरी, १९४८ को गांधी जी की बिरला हाउस में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर हत्या की, उस दिन शैलेन्द्र चटर्जी साहब ने गांधी जी की हत्या की खबर अपनी एजेंसी को क्यों नहीं दी? लोगों का कहना है कि चटर्जी साहब किसी न्यूज़ एजेंसी के लिए काम नहीं करते थे, वे तो ब्रिटिश इंटेलिजेंस एजेंसी के लिए काम करते थे. दोस्तों आप लोग बताएं कि  क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जितायेंगे जैसे कि चटर्जी साहब हैं.

दूसरे उम्मीदवार माधवन कुट्टी साहब हैं. कुट्टी साहब पूर्व रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन के पीए रह चुके है. इनकी पत्नी शैली माधवन और इन्होंने कृष्णा मेनन साहब की खूब सेवा तन और मन से की थी. उन्होंने इन्हें सब कुछ दिया. यहाँ तक कि नई दिल्ली के वसंत विहार में डेढ़ एकड़ का प्लाट भी दिलवाया. इसमें यह एक स्कूल चलाते हैं. विदेशी एम्बैसी के कर्मचारियों से डालर में पैसा लेते हैं. कोचीन में एक फैक्टरी है जो बियर बनती है. अन्य मादक पदार्थ भी बनाती है. माधवन कुट्टी साहब उसके डाइरेक्टर हैं. इनका कुछ धंधा डालर को रूबल में बदलने का भी है. क्योंकि उनकी कोचीन वाली फैक्टरी का मालिक रूस में रहता है. अगर आप देखना चाहते हैं तो उस सुपर स्टार डिस्टिलरी की एनुअल जनरल बाडी की प्रिंटेड रिपोर्ट यह आपके सामने है. मैं यह रिपोर्ट प्रेस एसोशियेशन को उसके रिकार्ड के लिए देता हूँ. क्या आप माधवन कुट्टी को अब भी अपना अध्यक्ष चुनेंगे?

तीसरे उम्मीदवार राजेन्द्र प्रभु साहब हैं. सरकार ने इन्हें भोपाल में एक सरकारी मकान एलाट कर रखा था, उसका इन्होंने किराया नहीं दिया था, जब मध्य प्रदेश सरकार ने किराया वसूलने के लिए दबाव बनाया तो यह भोपाल से दिल्ली भाग आये. जब उगाही के लिए नोटिस दिल्ली आया तो इन्होंने लिखवा दिया कि राजेन्द्र प्रभु की मौत हो गयी. कुछ समय बाद वह अधिकारी दिल्ली आया तो उसने मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एक संवाददाता सम्मलेन बुलाया. उसमें राजेन्द्र प्रभु साहब मौजूद थे. उस आईएएस अधिकारी ने अपने जूनियर अधिकारी से राजेन्द्र प्रभु के बारे में जानकारी माँगी और बताया कि रिकार्ड में तो इनकी मौत हो चुकी है. इस खुलासे के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने इनके खिलाफ वारंट जारी किया. फिर मध्य प्रदेश पुलिस इन्हें गिरफ्तार करके दिल्ली से हथकड़ी पहनाकर भोपाल ले गयी थी. मित्रों आप बताइये कि क्या आप ऐसे व्यक्ति को प्रेस एसोशियेशन का अध्यक्ष चुनेंगे.

अब बचे हैं चौथे उम्मीदवार बनियाल साहब. बनियाल साहब पंडित सुखराम से तालमेल रखते हैं. लोग कहते हैं कि बनियाल साहब तत्कालीन संचारमंत्री सुखराम के चमचे हैं. बताते हैं कि   बनियाल कांग्रेसी मंत्री की चमचागीरी इसलिए करते हैं कि बनियाल साहब हिमाचल प्रदेश से चुनाव लड़ना चाहते हैं और सुखराम साहब इन्हें टिकट दिलाने में सहयोग करेंगे. मित्रों चमचागीरी इतना बड़ा अपराध नहीं है. आपको अपना अध्यक्ष तो इन्हीं चारों उम्मीदवारों में से ही चुनना है इसलिए बनियाल साहब कम अपराधी हैं. आप इन्हें ही जिताइये मेरा ऐसा म़त है. शाम को जब परिणाम आया तो बनियाल साहब माला पहने नीचे प्रेस क्लब के बार में आये मुझसे कहने लगे कि गुरु मैं तो जीत गया.

लेखक विजेंदर त्यागी देश के जाने-माने फोटोजर्नलिस्ट हैं और खरी-खरी बोलने-कहने-लिखने के लिए चर्चित हैं. पिछले चालीस साल से बतौर फोटोजर्नलिस्ट विभिन्न मीडिया संगठनों के लिए कार्यरत रहे. कई वर्षों तक फ्रीलांस फोटोजर्नलिस्ट के रूप में काम किया और आजकल ये अपनी कंपनी ब्लैक स्टार के बैनर तले फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हैं. ''The legend and the legacy : Jawaharlal Nehru to Rahul Gandhi'' नामक किताब के लेखक भी हैं विजेंदर त्यागी. यूपी के सहारनपुर जिले में पैदा हुए विजेंदर मेरठ विवि से बीए करने के बाद फोटोजर्नलिस्ट के रूप में सक्रिय हुए. विजेंदर त्यागी को यह गौरव हासिल है कि उन्होंने जवाहरलाल नेहरू से लेकर अभी के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तस्वीरें खींची हैं. वे एशिया वीक, इंडिया एब्राड, ट्रिब्यून, पायनियर, डेक्कन हेराल्ड, संडे ब्लिट्ज, करेंट वीकली, अमर उजाला, हिंदू जैसे अखबारों पत्र पत्रिकाओं के लिए काम कर चुके हैं. विजेंदर त्यागी से संपर्क 09810866574 के जरिए किया जा सकता है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...