: यह रेड सायरन बजाने का समय : प्रेस कल्ब आफ इंडिया और यूनिसेफ के बीच इस बात पर सहमती बनी है कि ये दोनों मिलकर बच्चों विशेष रूप से लड़कियों के खिलाफ यौन हिंसा एवं अन्य तरह के उत्पीड़न के मसले पर मिलजुलकर काम करेंगे. पत्रकारों को इस समस्या से रूबरू कराने और इस दिशा में उनका सहयोग प्राप्त करने के लिए 21 अगस्त को प्रेस क्लब आफ इंडिया के सभागार में यूनिसेफ और प्रेस क्लब आफ इंडिया ने एक परिचर्चा का आयोजन किया. दरअसल यह प्रेस क्लब आफ इंडिया और यूनिसेफ के संयुक्त प्रयास से भविष्य में आयोजित किये जाने वाले विभिन्न सेमिनारों की कड़ी में पहला सेमिनार था, जिसके तहत बच्चों के खिलाफ होने वाला हिंसा विशेष रूप से लड़कियों के साथ होने वाले यौन हिंसा और शारीरिक उत्पीड़न पर केंद्रित था.
इस सेमिनार में यूनिसेफ की तरफ से कैरोलिन डेल डल्क, प्रमुख एडवोकेसी एंड कम्यूनिकेशन, डोरा ग्यूस्टी, चाईल्ड प्रोटेक्शन स्पेशलिस्ट, एवं इंडिया एलांर्इंस फॉर चाईल्ड राईट्स की रजिया इस्माईल ने अपनी बात रखी. प्रेस क्लब आफ इंडिया की तरफ से जनरल सेक्रेट्री अनिल दीवान व विनिता यादव, प्रमुख डिस्कशन कमिटी मौजूद रहीं. परिचर्चा की शुरूआत करते हुए इस वार्ता का आयोजन प्रेस क्लब की तरफ से किये जाने पर खुशी जाहिर करते हुए अनिल दीवान ने कहा कि दोनों संस्थाओं का एकसाथ काम करने के पीछे उद्देश्य यही है कि महिला एवं बच्चों से जुड़े मुद्दों को सक्रियता से उठाया जा सके और इसके विभिन्न पहलुओं को मिलजुलकर जनता के समक्ष लाने का प्रयास हो ताकि ऐसी घटनाओं के प्रति समाज को सजग किया जा सके.
इस परिचर्चा के दौरान आयोजकों द्वारा यूनिसेफ के गुडविल अम्बास्डर अमिताभ बच्चन की आवाज में दो वीडियो भी दिखाया गया, जिसके जरिए अमिताभ बच्चन जनता को इस बात के लिए आगाह करते हैं कि बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा एवं अन्य प्रकार के अपराध लगातार घटित हो रहे हैं. उनका कहना है कि आप बच्चों के खिलाफ घटित हो रहे हिंसा को नहीं देख पाते इसका मतलब यह कदापि नहीं है कि ऐसी घटनाएं घटित नहीं हो रही हैं. अमिताभ की आवाज गूंजती है ‘ अदृश्य को सदृश्य बनायें. बच्चों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने में हमारी मदद करें. हमारे साथ जुड़े. आवाज उठायें.’
एक आंकड़े के मुताबिक भारत में पिछले 10 वर्षो में जो मामले दर्ज किये गये हैं, उसमें 336 फीसदी की बढोतरी हुई है. वर्ष 2011 में बलात्कार के जो मामले दर्ज किये गये, उसमें एक तिहाई लड़कियां थीं जो कि 18 वर्ष की उम्र सीमा में शामिल थीं. ऐसे 7,112 मामले दर्ज हुए. यौन उत्पीड़न के इससे भी ज्यादा मामले हैं, ये मामले सामने नहीं आ पाते. लड़कियों को लोकलाज के डर से अपने दर्द को छिपाने को मजबूर करता है. विनिता यादव ने सरकारी आंकड़ो का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2011-12 मे बाल मजदूरों के ट्रैफिकिंग के 1 लाख 26 हजार मामले दर्ज किये गये. इनमें से सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में 29, 947 मामले और बिहार में 9, 673 मामले सामने आये. देश की राजधानी दिल्ली में 605 मामले दर्ज किये गये.
बचपन बचाओ आंदोलन के आंकड़ो के हवाले से विनिता यादव ने कहा कि वर्ष 2011 में 24, 744 बच्चे विभिन्न मेंट्रो शहरों कोलकाता, बेग्लुरू, मुंबई और दिल्ली से गायब हुए. इनमें सबसे ज्यादा बच्चे दिल्ली से 6,785 बच्चे गायब हुए. जिनमें से 850 बच्चों का अभी तक पता नहीं चल पाया है. विनिता ने प्रेस क्लब आॅफ इंडिया और यूनिसेफ की तरफ से पत्रकारों से कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आगे भी कराये जायेंगे. प्रेस क्लब आॅफ इंडिया और यूनिसेफ के तरफ से वैसे पत्रकारों को जो कि विभिन्न जगहों पर जाकर ऐसे सामाजिक मुद्दों पर रिर्पोटिंग करना चाहते हैं, जमीनी हकीकत को टटोलना चाहते हैं, और समस्या के प्रति अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना चाहते हैं, उनके लिए हर तरह की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आगे भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा.
प्रेस विज्ञप्ति