शहर में बढ़ रहे क्राइम ग्राफ को नोएडा पुलिस रोक पाने में नाकामयाब हो रही है। ऐसे में पुलिस ने क्राइम ग्राफ को कम दिखाने के लिये पत्रकारों को मुहैया कराने वाले प्रेस नोट में ही सूचनाएं देनी कम कर दी है। जो सूचनाएं प्रेस नोट के माध्यम से पत्रकारों को दी जाती है वो अपराध निम्न स्तर के होते है। मसलन आधे ब्लेड के साथ एक गिरफ्तार, चाकू, गांजा, लैपटॉप चोरी, बिजली चोरी, मारपीट, गाली गलौच सरीखे जैसी खबरें प्रेस नोट में होती है। ये ऐसी सूचनाएं है जिन्हें कोई भी अखबार जगह नहीं देता है। लिहाजा प्रेस नोट में से कोई न्यूज अखबार या टीवी पर नहीं आती।
ऐसे में पुलिस द्वारा मुहैया कराने वाले प्रेस नोट का औचित्य क्या है। भले ही पुलिस प्रेस नोट से खबर छुपा ले, लेकिन नोएडा के पत्रकार खुद मेहनत कर शहर में रोजाना घट रहे अपराधों के बारे में अखबारों और टीवी न्यूज के माध्यम से वास्तविक हकीकत दुनिया के सामने ला रहे हैं। शहर में घटी बड़ी घटनाओं का प्रेस विज्ञप्ति में बिल्कुल भी जिक्र नहीं होता है। प्रेस नोट में आमतौर पर क्षेत्र के सभी थानों में दर्ज होने वाले सारे मुकदमों का विवरण होता है। लेकिन नोएडा पुलिस प्रेस नोट में केवल निम्न स्तर के दर्ज होने वाले मुकदमों की सूचना ही पत्रकरों को ही देती है। इससे पुलिस दर्शाना चाहती है कि शहर में काइम रेट कंट्रोल में है। जो अखबारों में छपनी वाली खबरों के ठीक उलट है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





