Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

प्रेस परिषद की टीम को बताया गया हिंदुस्‍तान, जागरण के विज्ञापन फर्जीवाड़े का सच

 

मुंगेर।‘‘माई लार्ड, बिहार में सरकारी दवाब में प्रिंट मीडिया काम नहीं कर रहा है। उल्टे, सभी प्रभावशाली प्रिंट मीडिया के मालिकों के दवाब में सरकार काम कर रही है। यदि ऐसी बात नहीं होती तो वर्षों पूर्व अंकेक्षण रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार विज्ञापन फर्जीवाड़ा में लिप्त दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधकों और संपादकों को जेल भेज चुकी होती। हां, यदि कहीं सरकारी दवाब में प्रिंट मीडिया काम भी कर रहा है, तो अपने करोड़ो-अरबों के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा में जेल जाने से बचने के लिए कर रहा है। प्रिंट मीडिया बिहार में स्वयं दवाब में काम कर रहा है। जब गर्दन पर कानून की तलवार लटक रही हो, तो भ्रष्टाचारी और अपराधी क्या कभी तन कर खड़ा रह सकता है, हुजूर?

 

मुंगेर।‘‘माई लार्ड, बिहार में सरकारी दवाब में प्रिंट मीडिया काम नहीं कर रहा है। उल्टे, सभी प्रभावशाली प्रिंट मीडिया के मालिकों के दवाब में सरकार काम कर रही है। यदि ऐसी बात नहीं होती तो वर्षों पूर्व अंकेक्षण रिपोर्ट आने के बाद भी सरकार विज्ञापन फर्जीवाड़ा में लिप्त दैनिक हिन्दुस्तान के प्रबंधकों और संपादकों को जेल भेज चुकी होती। हां, यदि कहीं सरकारी दवाब में प्रिंट मीडिया काम भी कर रहा है, तो अपने करोड़ो-अरबों के सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा में जेल जाने से बचने के लिए कर रहा है। प्रिंट मीडिया बिहार में स्वयं दवाब में काम कर रहा है। जब गर्दन पर कानून की तलवार लटक रही हो, तो भ्रष्टाचारी और अपराधी क्या कभी तन कर खड़ा रह सकता है, हुजूर?
 
बिहार में अवैध जिलावार संस्करणों के छापने, अवैध संस्करणों के जरिए विगत दशकों से सरकारी विज्ञापन की लूट मचाने और विभिन्न जांच एजेंसियों के द्वारा विज्ञापन फर्जीवाड़ा के पकड़े जाने के कारण प्रिंट मीडिया स्वयं ‘बेसहारा‘और‘कमजोर‘हो गया है। प्रिंट मीडिया ने असीमित धन कमाने के मोह में बिहार में हर स्तर पर केवल जालसाजी-ही-जालसाजी, धोखाधड़ी-ही-धोखाधड़ी की है। करोड़ों-अरबों के सरकारी विज्ञापन के लूट में दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण ने बिहार में प्रतियोगिता मैच आयोजित की है। ऐसा ही विज्ञापन फर्जीवाड़ा हिन्दुस्तान और जागरण झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और देश के अन्य प्रांतों में भी कर रहा है। इन परिस्थितियों में मुंगेर के अधिवक्ता और पत्रकार भारतीय प्रेस परिषद से मांग करता है कि इस राष्‍ट्रव्‍यापी विज्ञापन फर्जीवाड़ा की विस्तृत और गहरी जांच के लिए परिषद भारत सरकार से पूरे प्रकरण में सीबीआई जांच की सिफारिश करे।‘‘
 
उपर्युक्त बातें भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू के द्वारा गठित भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी के समक्ष मुंगेर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की टीम ने लिखित रूप में की। टीम का नेतृत्व मुंगेर के वरिष्ठ पत्रकार-अधिवक्ता व टाइम्‍स ऑफ इंडिया के काशी प्रसाद, सामाजिक कार्यकर्ता मंटू शर्मा, अधिवक्‍ता बिपिन कुमार मंडल आदि कर रहे थे। भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी 12 जून को बिहार के मुंगेर में स्थानीय राज पैलेस होटल में समाज के बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं की ‘‘बिहार में सरकारी दवाब में मीडिया‘‘विषय पर मंतव्य जानने की हरसंभव कोशिश की। परिषद की जांच टीम दिन भर सुनवाई करती रही।
 
जांच कमिटी में कमिटी के अध्यक्ष राजीव रंजन नाग अैर सदस्य अरूण कुमार (टाइम्स आफ इंडिया) शरीक थे। अस्वस्थता के कारण जांच कमिटी के तीसरे सदस्य नहीं आ सके। इस जांच कमिटी ने 11 जून को बिहार के मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय में भी ‘‘बिहार में सरकार के दवाब में मीडिया‘‘विषय पर सुनवाई की थी। मुजफफरपुर में रमण कुमार यादव ने दैनिक जागरण के अवैध संस्करण और सरकारी विज्ञापन फर्जीवाड़ा से संबंधित लिखित आवेदन पत्र जांच कमिटी के समक्ष सुपुर्द किया। उन्होंने जांच कमिटी को दैनिक जागरण के मुजफ्फरपुर और आसपास के आठ जिलों के जिलावार आठ संस्करणों की मूल प्रतियां सुपुर्द कीं और आरोप लगाया कि पटना संस्करण की निबंधन संख्या-बी0आई0एच0एच0आई0एन0/2000/3097 को मुजफ्फरपुर और आस-पास के आठ जिलों के अवैध संस्करणों के प्रिंट लाइन में जालसाजी और धोखाधड़ी की नीयत से छापकर दैनिक जागरण सरकारी विज्ञापन का लूट मचा रहा है।
 
मुंगेर में अधिवक्ता काशी प्रसाद, अधिवक्ता बिपिन मंडल, सामाजिक कार्यकर्ता मीरा प्रसाद, मिथिलेश कुमार, राजेश कुमार एवं अन्य ने अपने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन के साथ भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी के समक्ष दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण के भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय और अन्य जिलों की 9 जून, 2012 की जिलावार अवैध संस्करणों की मूल प्रतियां सुपुर्द कीं। जांच कमिटी को उन्होंने बताया कि दैनिक हिन्दुस्तान के भागलपुर संस्करण की निबंधन संख्या-बी0आई0एच0एच0आई0एन0/2011/41407 है। परन्तु, इसी हिन्दुस्तान के मुंगेर, लखीसराय और अन्य जिलों के जिलावार संस्करणों में जालसाजी और धोखाधड़ी की नीयत से निबंधन संख्या-बी0आई0एच0एच0आई0एन0/2011/41407 छापकर सरकारी विज्ञापन का लूट मचाया जा रहा है।
 
भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी को बताया गया कि किस प्रकार जिलावार संस्करणों का अवैध प्रकाशन अन्दर के पृष्ठों के समाचारों को बदल कर किया जा रहा है। मुंगेर जिला के संस्करण के प्रथम पृष्ठ पर मुंगेर संस्करण छापा जा रहा है जबकि लखीसराय संस्करण पर हिन्दुस्तान पूर्व बिहार संस्करण छाप रहा है। सभी जिलावार संस्करणें में संबंधित जिलों की खबरों को चार से छह पृष्ठों में अन्दर के पृष्ठों में जालसाजी कर छापा जा रहा है। समाचार की प्रमुखता को देखते हुए जिला बार संस्करणों के प्रथम पृष्ठों पर भी समाचार में समुचित बदलाव किया जा रहा है।
 
जालसाजी आखिर क्यों : भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी को बताया गया कि दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण जिलावार संस्करणों का फर्जीवाड़ा क्यों कर रहा है? भारतीय प्रेस परिषद को बताया गया कि प्रेस एण्ड रजिस्ट्रेशन आफ बुक्स एक्ट,1867 के तहत प्रत्येक जिले या क्षेत्र विशेष के पाठकों के लिए जिला या क्षेत्र विशेष के स्थानीय समाचारों के साथ अलग-अलग फारमेट में मुद्रित, प्रकाशित और वितरित प्रत्येक दैनिक अखबार को (1) जिला पदाधिकारी के समक्ष घोषणा पत्र दाखिल करना, (2) जिला पदाधिकारी के द्वारा समर्पित घोषणा पत्र का प्रमाणीकरण किया जाना, (3) प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली से निबंधन प्रमाण पत्र और निबंधन संख्या प्राप्त करना और (4) कंपनी रजिस्ट्रार से अनुमति प्राप्त करना ‘कानूनी बाध्यताएं‘हैं। परन्तु, बिहार में दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण राज्य के पटना और एक-दो अन्य स्थानों से अपने जिलावार संस्करणों/क्षेत्रीय संस्करणों के लिए सारी कानूनी बाध्यताएं पूरी की है। परन्तु, एक-दो निबंधन संख्या प्राप्त कर राज्य के अन्य 35-36 शेष जिलों के पाठकों के लिए उसी निबंधन संख्या को जालसजी और धोखाधड़ी की नीयत से उपयोग कर अलग-अलग जिलावार अवैध संस्करण मुद्रित, प्रकाशित और वितरित करता आ रहा है दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण।
 
केन्द्रीय सरकार की विज्ञापन नीति-2007 के अनुसार चूंकि डी0ए0वी0पी0, नई दिल्ली की विज्ञापन सूची में सम्बद्धता के लिए ।1। आर0एन0आई0 प्रमाण पत्र संख्या, (2) 36 माह (तीन वर्ष) नियमित प्रकाशन के साक्ष्य, (3) प्रसार संख्या का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना एवं अन्य शर्तों का पालन करना प्रत्येक दैनिक अखबार के लिए कानूनी बाध्यताएं हैं। इन कानूनी बाध्यताएं पूरा करने पर ही डी0ए0वी0पी0, नई दिल्ली संबंधित दैनिक अखबार को विज्ञापन सूची में शामिल करता है और प्रसार संख्या के प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी विज्ञापन -दर निर्धारित करता है।
 
इस डी0ए0वी0पी0 विज्ञापन दर के आधार पर ही बिहार सरकार संबंधित दैनिक अखबार को राज्य विज्ञापन सूची में शामिल करता है और उसे सरकारी विज्ञापन जारी करता है। बिहार सरकार की विज्ञापन नीति-1981 और विज्ञापन नीति-2008 में सरकारी विज्ञापन की सूची में सम्बद्धता पाने और सरकारी विज्ञापन प्रकाशन के लिए प्रत्येक दैनिक अखबार को (1) प्रेस रजिस्ट्रार, नई दिल्ली से निबंधित होना, (2) हिन्दी समाचार पत्रों की बिक्री संख्या कम से कम 45 हजार होना और (3) प्रसार संख्या का प्रमाणीकरण ए0बी0सी0 से होना अनिवार्य है।
 
इस प्रकार इन कानूनी बाध्यताएं के पालन करने में प्रत्येक दैनिक अखबार के प्रत्येक संस्करण को पूरे तीन वर्ष तक राज्य और केन्द्र सरकारों के सरकारी विज्ञापन के बिना ही अखबार छापना पड़ेगा। साथ ही बिहार के जिलावार संस्करण के लिए प्रत्येक जिला में 45 हजार से अधिक प्रसार संख्या होने पर ही बिहार सरकार विज्ञापन सूची में जिला के संस्करण को शामिल करेगा। वर्तमान में एक जिला संस्करण की प्रसार संख्या पांच से दस हजार के बीच ही है।
 
तीन वर्षों तक बिना सरकारी विज्ञापन के अखबार छापने से होने वाले करोड़ों-करोड़ रुपये के घाटा की क्षतिपूर्ति करने के लिए दैनिक हिन्दुस्तान और दैनिक जागरण पूरे देश में जिलावार अवैध संस्करण प्रकाशित कर रहा है और एक-दो निबंधन संख्या एक राज्य में प्राप्त कर उस निबंधन संख्या को अन्य 35-36 जिलों के जिला बार संस्करणों के प्रिंट लाइन में छापकर अपने को निबंधित घोषित कर एकीकृत प्रसार संख्या 45 हजार से उपर बताकर डी0ए0वी0पी0 विज्ञापन दर प्राप्त कर रहा है और इसी डी0ए0वी0पी0विज्ञापन दर के कागजात पर बिहार सरकार की विज्ञापन सूची में सम्बद्धता प्राप्त कर केन्द्र और राज्य सरकारों के सरकारी विभागों से प्रतिवर्ष करोड़ों-करोड़ में सरकारी राजस्व को लूट रहा है।
 
भारतीय प्रेस परिषद की जांच कमिटी को लिखित रूप में यह भी बताया गया है कि इस विज्ञापन फर्जीवाड़ा नेटवर्क में प्रेस-रजिस्ट्रार, नई दिल्ली, डी0ए0वी0पी0, नई दिल्ली, सूचना एवं जनसम्पर्क निदेशालय, पटना, बिहार, संबंधित जिलों के जिला पदाधिकारी और जिला जनसम्पर्क पदाधिकारीगण की स्पष्ट संलिप्तता है। अतःपरिषद केन्द्र सरकार को इस राष्ट्रीय स्तर के विज्ञापन घोटाले की जांच की सिफारिश सी0बी0आई0 को करने की कृपा करें। भारतीय प्रेस परिषद की सुनवाई के दौरान इंडियन फेडेरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट की राष्ट्रीय समिति के सदस्य एवं वरीय पत्रकार चन्द्रशेखर भी उपस्थित थे।
 
मुंगेर से श्रीकृष्ण प्रसाद की रिपोर्ट. इनसे संपर्क मोबाइल नंबर-09470400813 के जरिए किया जा सकता है.
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...