Abhishek Srivastava : मैग्जीन Forward Press का ताज़ा चुनाव विशेषांक देखने लायक है। मालिक समेत प्रेमकुमार मणि और एचएल दुसाध जैसे बहुजन बुद्धिजीवियों को इस बात की जबरदस्त चिंता है कि बहुजन किसे वोट देगा। इसी चिंता में पत्रिका इस बार रामविलास पासवान, अठावले और उदित राज की प्रवक्ता बनकर अपने पाठकों को बड़ी महीनी से समझा रही है कि उन्होंने भाजपा का दामन क्यों थामा।
जितनी बार मोदी ने खुद को पिछड़ा नहीं बताया होगा, उससे कहीं ज्यादा बार इस अंक में मोदी को अलग-अलग बहानों से पिछड़ा बताया गया है। इस अंक की उपलब्धि एचएल दुसाध के लेख की ये आखिरी पंक्तियां हैं, ध्यान दीजिएगा:
''चूंकि डायवर्सिटी ही आज बहुजन समाज की असल मांग है, इसलिए एनडीए यदि खुलकर डायवर्सिटी की बात अपने घोषणापत्र में शामिल करता है तो बहुजन बुद्धिजीवी भाजपा से नए-नए जुड़़े बहुजन नेताओं के समर्थन में भी सामने आ सकते हैं। यदि ऐसा नहीं होता है तो हम इन नेताओं की राह में कांटे बिछाने में अपनी सर्वशक्ति लगा देंगे।''
इसका मतलब यह, कि भाजपा/संघ अब बहुजनों के लिए घोषित तौर पर non-negotiable नहीं रहे। सौदा हो सकता है। यानी बहुजन अब भाजपा /संघ / एनडीए के लिए दबाव समूह का काम करेंगे। बहुत बढि़या।
युवा और प्रतिभाशाली पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.






