सत्ता हथियाने के लिए नेता क्या—क्या नहीं करते। प्रदेश की सत्ता बसपा के हाथ से खिंचती नजर आई तो उन्होंने प्रदेश को चार हिस्सों में बांटने की बात कह डाली थी। वहीं विपक्ष के सपा मुखिया ने बलात्कार पर अपने बेतुके बयान से राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है, लेकिन यह बयान किसी व्यक्ति की मुर्खता से कम नहीं है। सपा के मुखिया मुलायम सिंह ने प्रदेश में महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों पर मगरमच्छ के आंसू बहाने का काम किया है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश में बसपा की सरकार के कार्यकाल में महिला उत्पीड़न और बलात्कार के मामले अधिक बढ़े हैं, लेकिन वह यह भूल गए कि उनके कार्यकाल में भी महिलाओं की स्थिति कहां बेहतर थी।
यहां सपा मुखिया ने बलात्कार पीड़ित महिलाओं को अपनी सहानुभूति दी है। उन्होंने कहा कि बलात्कार पीड़ित पढ़ी—लिखी लड़कियों को सरकारी नौकरी दी जाएगी। जबकि जो महिला पढ़ी—लिखी नहीं हैं उन्हें आर्थिक मदद व सम्मान दिया जाएगा। मुलायम के इन बयानों ने शायद ही किसी पीड़िता को मरहम लगाने का काम किया हो, लेकिन प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय जरूर पैदा कर लिया है। कहते हैं कि बदनाम हुए तो क्या हुआ नाम तो हुए। कुछ ऐसा ही मुलायन में अपने बयान में जाहिर किया है। उन्होंने इस प्रकार का बयान देकार समाज के अशोभनीय पहलू को हंसी का पात्र बना दिया।
उनके अनुसार अगर इस तरह की घोषण अगर सच हो जाती है तो लोग फिर बलात्कार को केवल नौकरी पाने का जरिया बना लेंगे। फिर कोई भी महिला किसी भी पुरुष पर बलात्कार का आरोप लगाने से नहीं झिझकेगी। समाज में बलात्कार कम होने की बजह उभर कर सामने आएंगे। जिन मामलों को आज लोग दबाने की कोशिश करते हैं कल वहीं लोग चिल्ला-चिल्ला कर बलात्कार साबित करने की गुहार लगाएंग। समाज का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ होने वाला नहीं है, यह एक राजनीति की सरगर्मी है जो चुनाव आते ही नेताओं की जुवां से पसीने की तरह टपकती है। प्रदेश की राजनीति में पिछड़े हुए सपा मुखिया के इस बयान से उनकी चर्चाएं हर किसी की जुबां पर है।
लेखक जितेन्द्र कुमार नामदेव पत्रकार हैं.






