''यार फटेला भाई, अपनी तारीफ करने में क्या मुझे बिना वजह गरियाना जरूरी है? मैं तुम्हारी साइट आज देख रहा हूं ठीक से. फेसबुक भी देखा. कुछ स्क्रीनशाट अटैच कर रहा हूं. हालांकि कह सकते हो कि तुमने मेरा नाम नहीं लिखा है, लेकिन जो कुछ लिखा है, और अब जैसे जैसे आर्टिकल मेरे नाम लेकर पब्लिश किए हैं, उससे पता तो यही चलता है कि ये सब मेरे बारे में ही लिखा है. और मजेदार ये कि 'पांच योगदान' लिखते समय तुमने अचानक बीच में भड़ास को गालियां पेल दी हैं… हंसी आ रही है तुम्हारी चिंतन लेखन शैली देखकर. मैंने यार तुम्हारा भला नहीं किया होगा तो कुछ बुरा भी नहीं किया होगा. इस तरह किसी का अपमान करना ठीक नहीं होता. ये पत्र इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि तुमसे काफी उम्मीद थी मैंने. पर तुम तो बेहद घटिया सोच वाले आदमी निकले भाई. अब जो भी लिखो, उखाड़ो, मेरे पर कोई फरक नहीं पड़ेगा क्योंकि तुम्हारे बारे में अब सही-सही धारणा बना पा रहा हूं. तुम एक मेंटल केस हो, यह राइटअप देखखर कोई कह देगा. सिर्फ अपना लिखा पढ़वाने के लिए तुम दो लाइन भड़ास को गरिया रहे हो, और वही दो लाइन फेसबुक पर डाले हो ताकि सनसनी समझकर लोग पढ़ने को क्लिक करें… हद दर्जे की नीचता का काम है भाई… तुम्हें सीनियर और सींसियर मानता था लेकिन तुम बहुत छिछोरे टाइप आदमी निकले. राइटअप व फेसबुक का लिंक अटैच कर दिया है. -यशवंत''
ये मेल मैंने जगमोहन फुटेला को भेजा. उन्हीं जगमोहन फुटेला को जिन्हें मैं सीनियर व सींसियर पत्रकार मानता था लेकिन अब समझ में आया कि ये मेंटल केस है. यकीन न हो तो नीचे दिए गए स्क्रीन शाट को देख लें. ये अपनी व अपनी साइट के 'पांच योगदान' के बारे में लिखते हुए अचानक दो लाइन में भड़ास को गरियाना शुरू करते हैं और उन्हीं दो लाइन को इंट्रो, ट्रेलर, हाइलाइटर बनाकर फेसबुक पर डाले पड़े हैं, ताकि लोग उसके बहाने पढ़ने को उनके आर्टिकल के लिंक पर क्लिक करें. क्या ऐसा काम कोई नार्मल जर्नलिस्ट कर सकता है?



मजेदार ये देखिए कि ये बंदा जब तक मुझे गरियाता रहा, और मैं चुप रहा, वह मजे लेता रहा. और मैंने आज जब उसका लिखा और उस पर अपना पक्ष भड़ास पर छापा है तो अचानक वह सक्रिय हो गया और दो मेल मुझे भेज डाले, यह कहते हुए कि पोस्ट हटा दो, साभार भी मत छापो. ये तो हद है बास, कि आप किसी को आरोपियाओ गरियाओ और वह बेचारा वह आरोप गाली बताते हुए अपनी बात रखे तो आप हड़काओ कि तुमने मेरे द्वारा तुम पर लगाए आरोप तुमने अपने यहां क्यों छापे? जबरा मारे और रोवे भी न दे. दोनों मेल और उनके जवाब भी नीचे हैं…
Yashwant bhai,
You are at liberty to write any thing about, on or against me. But please don't use my content or the name to enhance your readership. I see a nefarious design behind this move. I once again request you to please remove my articles from your website within no seconds.
Thanks.
Jagmohan Phutela
Jagmohan Ji
why boss? its Saabhaar published article. second, if you are publishing any article related with my name and brand, then why i can not publish that article on my platform, which you questioned.
regards
Yashwant
Mr. Yashwant Singh,
I call upon you to not to use my name in any manner on your website. Pl remove all articles including one you published today. I do not allow you to publish it even under the goose of "courtesy". Pl do the needful immediately.
Thanks
Jagmohan Phutela
Jagmohan Ji
ye aapne aaj kaha hai. aage se dhyan rakha jaayega. lekin agar aapne bhadas yashwant pe article likha tu usko bhadas pe saabhaar publish karna meri majboori hogi kyonki jab aap kisi ko question kar sakte hain to usko apni safaayi ka bhi to hak denge. aur, wo safaayi mai apen manch pe publish karunga, aap saabhaar chhap sakte hain.
regards
Yashwant
मैंने ये सोचकर कि चलो फुटेला जी का बहुत सारा कुछ मैंने अपने यहां छापा है, उनका नाम रोशन किया, यह वाला खुद का लिखा मैं उनको भेज देता हूं ताकि वो अपने यहां भी पब्लिश कर लें, सो, उन्हें मेल कर दिया और फोन किया. उन्होंने प्रकाशित तो कर दिया लेकिन स्क्रीनशाट नहीं लगाए. मैंने कहा कि स्क्रीन शाट भी लगा दो भाई, वरवा मेरे लिखे का क्या औचित्य. तो वो बोले- वो मुझे लगाना आता नहीं.
बताइए, जिस आदमी को अपनी साइट पर न्यूज के साथ फोटो अपलोड करना भी न आए, वह आदमी दावा करता हो कि वह तो दस हजार में साइट चला लेता है तो क्या गलत करता है. भड़ास पर फोटो आडियो वीडियो सब कुछ सेकेंड्स में अपलोड होता है. अगर ये सुविधा न होती तो हम लोग ढेर सारे स्टिंग को ब्राडकास्ट करने में सफल न हो पाते, पर फुटेला जी को लगता है कि भड़ास तो खामखा भड़भड़ा रहा है. अब समझ में आया कि तकनीकी रूप से अल्पज्ञानी ये आदमी घर में बैठकर खुद ही अकेले सिर्फ टेक्स्ट अपनी साइट्स में डालता रहता है. जिसे खबर के साथ सपोर्टिंग के विजुवल इमेजेज न अपलोड करना आए, उसके पास अपने परिजनों-दोस्तों से लड़ने झगड़ने के अलावा और काम भला बचेगा भी क्या. घर से साइट चलाना बुरी बात नहीं है. यह संघर्ष की, कम संसाधन में चलाने की निशानी है, लेकिन आपके पास इतनी फुर्सत क्यों होती है कि आप अपना आर्टिकल पढ़ाने के लिए किसी दूसरे इन्नोसेंट की माकानाकासाक कर दें. हद है बॉस.
ऐसे व्यक्ति से मैं लड़कर खुद अपनी ही तौहीन कर रहा हूं है. फुटेला जी, मैंने गलत ही आपके फटे में टांग डाली जी. आप मुझे गरियाते रहो, समझ में आ गया मुझे आपके बारे में. कुछ लोगों में बड़बोलेपन की आदत होती है, दूसरों को गरियाते रहने की आदत होती है, ताकि लोगों का वह ध्यान खींच सके. आप वही हो जी. और, मुझे यह भी लगता है कि मैं अब बड़ी तोप हो गया हूं. लोग मुझे गरियाकर अपना नाम रोशन करना चाहते हैं, अपनी साइट का नाम चमकाना चाहते हैं तभी तो आपने फेसबुक पर महाभड़ासिए के बारे में लिखकर अपने एक आर्टिकल का लिंक डाल दिया. हे भगवान, इस सींसियर और सीनियर जर्नलिस्ट का, जो अब छिछोरा हो चुका है, ये हाल क्यों किया! चलो, उन्हें माफ करना, वे नहीं जानते वे क्या कर रहे हैं. वे अब मेरे पर जो भी आरोप लगाएंगे, मैं उसका जवाब नहीं दूंगा क्योंकि ऐसे तो सच में मैं किस किस से मुंहजोरी करता फिरूंगा.
फुटेला जी को सच में नहीं पता कि वो क्या लिख रहे हैं, क्या कर रहे हैं. मेरी मां का अपमान हुआ, मैंने न्यू मीडिया के जरिए लड़ाई लड़ी. मेरे चचेरे भाई के साथ पुलिस ने बुरा सलूक किया, उसके खिलाफ लड़ा. कया अन्याय के खिलाफ लड़ना गलत बात है? और, अगर आप अपने पर, अपने घर पर हुए अत्याचार के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ सकते तो अपने पड़ोसी के अन्याय के लिए कैसे उसका साथ देंगे? मतलब, मानवीय मूल्य की न्यूनतम समझ भी फुटेला की नहीं है. वह जाने क्या क्या लिख जाता है. ऐसे महान विद्वान पत्रकार से भगवान बचाए. सच में, अच्छा हुआ फुटेला से बिना मिले ही उसके बारे में समझ मुझे आ गई. फुटेला भाई, शुक्रिया, जल्द खुद के बारे में समझाने के लिए. मेरी तरफ से यह आखिरी निजी व पब्लिक संवाद है आपसे. आप शौक से गरियायें, मुझे अब कोई दुख न होगा. क्योंकि जमाने में मेरे पास करने के लिए बहुत कुछ है.
यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
इस प्रकरण से अगर आप वाकिफ नहीं हैं, तो इसे समझने के लिए आपको इन दो खबरों को भी पढ़ना पड़ेगा, शीर्षकों पर क्लिक करें….





