करीब दो साल से शैलेश जिस प्रोजेक्ट में हवा फूंक फूंक कर उसे गुब्बारा बनाने की बात कह रहे थे, उसके सामने आने पर 'हुआ छेद फटा गुब्बारा' सा आलम है. आजतक में लंबे समय तक नौकरी करने के बाद शैलेश जब वहां से कार्यमुक्त हुए तो उन्होंने अपने स्टाइल का एक स्पेशल, अलग, रीयल, जानदार, दमदार… हिंदी चैनल लाने की बात कही. भड़ास को इंटरव्यू देकर चैनल और उसकी बारीकियों के बारे में बताया. पूरी मीडिया इंडस्ट्री शैलेश और उनके प्रयोग को देखने के लिए दम साधे इंतजार करती रही. कभी नाम का चक्कर तो कभी काम का चक्कर तो कभी कुछ चक्कर… लगभग दो साल तक शैलेष अपने उस लाला की रोटी तोड़ते रहे जिसे उन्होंने जानदार चैनल लाने का सपना दिखाया था.
अब जब न्यूज नेशन आ चुका है तो खबर है कि इसकी कहीं कोई चर्चा नहीं है. चैनल बिलकुल बेकार और फ्लाप. भगदड़ मची हुई है. लोग न्यूज नेशन छोड़ छोड़ कर दूसरे चैनलों का रास्ता पकड़ने लगे हैं. कहने वाले कहते हैं कि समझदार शैलेश ने अपना काम कर लिया है. बाकी अब जिसे जो कहना करना हो कहता करता रहे. जानकारों का मानना है कि न्यूज नेशन का हाल वायस आफ इंडिया वाला होने वाला है. न्यूज नेशन का मालिक भी शुरू में इतना 'कट' चुका है कि अब वह जल्दी ही पुक्का फाड़कर चीत्कार करने वाला है.
मीडिया गुरु वाले गुरु लोगों के माध्यम से चैनल का स्थापना करवाई गई है. सारी मशीनरी और इंस्टालेशन का काम मीडिया गुरु के गुरुओं ने किया है. ये बाजार के सबसे महंगे संस्थापक हैं जो भरपूर तरीके से मिल-मिलाकर काम करते हैं और इनके साथ जुड़ने मिलने वाले सभी लोग मिल बांट कर अच्छे तरीके से प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहंचाते हैं. प्रोजेक्ट अंजाम पर पहुंच चुका है और जो फाइनल आउटपुट है कि चैनल की कहीं कोई चर्चा तक नहीं है. शैलेश को जब खुद कर दिखाने का मौका मिला है तो उन्होंने साबित किया कि वे फ्लाप हैं.
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