31 दिसंबर के हिन्दुस्तान टाइम्स में पृष्ठ चार पर डीएवीपी का एक विज्ञापन प्रकाशित हुआ है। केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो का यह विज्ञापन तकनीकी और वैज्ञानिक प्रकृति के अनुवाद कार्यों के लिए अनुवाद क्षमता विस्तार योजना के तहत प्रकाशित है और इसका मकसद है अनुवादकों का पैनल बनाना। इसके लिए अवकाशप्राप्त अनुवादकों, अनुवाद अधिकारियों, हिन्दी अधिकारियों और या केंद्र सरकार के कार्यालयों, उपक्रमों के उच्च अधिकारियों, अनुभवी व्याख्याताओं, अनुवाद कार्य में लगे व्यक्तियों आदि से आवेदन मांगे गए हैं। तकनीकी और वैज्ञानिक प्रकृति के इस अनुवाद कार्य के लिए (अनुभवी और रिटायर अधिकारियों से) 250 रुपए प्रति हजार शब्द की पेशकश की जा रही है।
विज्ञापन के मुताबिक, उपरोक्त पैनल में शामिल किए जाने वाले व्यक्ति को अनुवाद के लिए सामग्री लेने केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो के मुख्यालय पर्यावरण भवन, केंद्रीय कार्यालय परिसर, लोधी रोड जाना होगा और निर्धारित समय के अंदर अनुवाद को वहां जाकर जमा कराना होगा। अनुवाद का काम कितना है और कितना काम मिल सकता है इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है और न कोई फोन नंबर अथवा ई मेल आईडी प्रकाशित किया गया है।
आज के जमाने में भी अनुवाद के लिए सामग्री लेने और अनूदित सामग्री जाकर देने की अपेक्षा की जा रही है, पैसे भी कम हैं। फिर भी दिलचस्पी हो तो आवेदन कर सकते हैं। आवेदकों का चुनाव / स्क्रीनिंग इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा। हताश और निराश करने वाला यह विज्ञापन हिन्दी इकनोमिक टाइम्स बंद होने के दिन प्रकाशित हुआ है और इसमें साफ लिखा है कि पैनल में शामिल किए जाने का मतलब यह नहीं है कि आप कार्य आवंटित करने का कोई दावा कर सकेंगे। हां आवेदन करने की कोई जल्दी नहीं है, महीने भर में आराम से आवेदन कर सकते हैं।





