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बड़ा हो गया ‘आजतक’ पर छोटा हुआ दिल, चैनल के मीडियाकर्मियों में नौकरी जाने की दहशत

: कानाफूसी : कहा जा रहा है कि आजतक न्यूज चैनल बदल रहा है.  बताया जा रहा है कि यहां बदलाव की बयार चल रही है. चर्चा है कि यहां सब कुछ बदल रहा है. नए चैनल हेड के रूप में सुप्रिय प्रसाद चैनल को नेतृत्व दे रहे हैं जिन्हें सरोकार और खबर के लिए कम, टीआरपी देने वाले मीडिया कलाकार के रूप में ज्यादा जाना जाता है. आजतक का आफिस वीडियोकान टावर से हटकर फिल्म सिटी में आ पहुंचा है. फिल्म सिटी वो जगह जहां ज्यादातर न्यूज चैनलों के आफिस हैं. चैनल को एक नया और फ्रेश लुक देने का दावा किया गया है. इन बदलावों में से कई के बारे में बाकायदा चैनल पर दिखाया भी गया.

: कानाफूसी : कहा जा रहा है कि आजतक न्यूज चैनल बदल रहा है.  बताया जा रहा है कि यहां बदलाव की बयार चल रही है. चर्चा है कि यहां सब कुछ बदल रहा है. नए चैनल हेड के रूप में सुप्रिय प्रसाद चैनल को नेतृत्व दे रहे हैं जिन्हें सरोकार और खबर के लिए कम, टीआरपी देने वाले मीडिया कलाकार के रूप में ज्यादा जाना जाता है. आजतक का आफिस वीडियोकान टावर से हटकर फिल्म सिटी में आ पहुंचा है. फिल्म सिटी वो जगह जहां ज्यादातर न्यूज चैनलों के आफिस हैं. चैनल को एक नया और फ्रेश लुक देने का दावा किया गया है. इन बदलावों में से कई के बारे में बाकायदा चैनल पर दिखाया भी गया.

आजतक के खबरों की तेज रफ्तार और नए अवतार को दर्शकों का प्यार कितना मिलेगा, यह तो वक्त बताएगा लेकिन इतना तो सबको पता है कि ये आजतक गुणवत्ता के मामले में वो नहीं रहा जो एसपी सिंह के जमाने में आधे घंटे के बुलेटिन के दौरान हुआ करता था. आजतक के जरिए प्रबंधन को पैसा खूब मिलता गया, विस्तार खूब होता गया, लेकिन कंटेंट क्वालिटी दिन प्रतिदिन खराब होती गई. आजतक में अब ज्यादातर एवरेज किस्म के लोग घुसते जा रहे हैं जिनका सारा जोर शोबाजी पर होता है. सोचने समझने और लिखने पढ़ने वाले लोगों का आजतक में टोटा पड़ चुका है. न्यूज़ प्रेजेंटेशन की अब तक की सबसे बेमिसाल तकनीक आजतक चैनल के पास जरूर हो सकती है, उसके पास अत्याधुनिक उपकरणों और तकनीक से लैस स्टूडियो हो सकते हैं लेकिन उसके पास नहीं है तो आम जनता की पीड़ा महसूस करने वाला वो दिल जिसकी बुनियाद एसपी सिंह ने रखी थी. जिसे कमर वहीद नकवी और शैलेश के जमाने में भी कम या ज्यादा निभाया गया, लेकिन अब तो आजतक पूरी तरह संवेदनहीन चैनल बन चुका है जिसमें सिर्फ टीआरपी बटोरने की चाहत व जिद है, आम जनता से जुड़े इशूज को दिखाकर पूरे देश का चैनल बने रहने की तड़प व जिद कहीं नहीं है.

और, शायद प्रबंधन यही चाहता भी है. मार्केट इकोनामी में हाशिए पर खड़े लोगों की पूछ कहीं नहीं होती, न तो मीडिया में, न कोर्ट कचहरी में, न थाना पुलिस में और न राजनीति में. मार्केट इकोनामी में सबका जोर भरे पाकेट वालों पर है. क्योंकि इस भरे पाकेट वाले के पास ही पूंजी है जिससे चैनल, थाना-पुलिस, कोर्ट-कचहरी, नेता, कारपोरेट सबका फायदा हो सकता है. तो, जब पूरी विचारधारा ही शिफ्ट हो चुकी है तो किसी एक को दोष देना ठीक नहीं. अब तो यह मानकर चलना चाहिए कि जो सफल है वह जरूर बाजार का दलदल है.

आजतक, तेज समेत कई चैनलों का संचालन करने वाली कंपनी टीवी टुडे नेटवर्क से कुछ लोगों ने मेल के जरिए भड़ास को सूचित किया है कि करीब सौ लोगों की छंटनी की लिस्ट बनाई जा रही है. इन लोगों को चैनल से नमस्ते कहा जाएगा. इस लिस्ट में एंकर, एडिटर और बाकी डिपार्टमेंट्स के लोग भी शामिल हैं. छंटनी की चर्चा जोरशोर से पूरे आफिस में फैली हुई है. राहुल कुलश्रेष्ठ को इसीलिए लाया गया है. कुछ लोगों को तो जाने के लिए कह भी दिया गया है. तेज के कुछ लोगों को तो जाने के लिए कह भी दिया गया है. भड़ास के पास उन लोगों के नाम भी हैं जिन्हें चैनल से जाने के लिए कह दिया गया है लेकिन अभी प्रकाशन इसलिए नहीं किया जा रहा है ताकि उन्हें किसी तरह का कोई संकट न झेलना पड़े. छंटनी को लेकर अलग अलग तरीके की मीटिंग चल रही है. फाइनल तस्वीर क्या निकल कर आती है, इसका सबको इंतजार है.

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