टाइम्स नाऊ चैनल को परशुराम बाबाराम सावंत केस में सौ करोड़ रुपये बम्बई उच्च न्यायालय में जमा करने ही होंगे. इस बात को ले के मीडिया संस्थानों में रोष और भय व्याप्त है. Editors Guild of India, Foundation for Media Prefessionals(FMS), Broadcast Editors Association (BEA) आदि संस्थाओं का कहना है के जज साहब का फोटो गल्ती से दिखा दिया गया वो भी सिर्फ 15 सेकण्ड के लिए. जब चैनल को गल्ती का एहसास हुआ तो 5 दिनों तक 'सॉरी' जज साहब बोला गया. ऐसा करने से मान की जो हानि हुई थी उसकी भरपाई हो गयी. ऐसे में सौ करोड़ का जुर्माना उचित नहीं…… 'सॉरी' बड़ा ही सुन्दर शब्द है.
इस सन्दर्भ में श्री सावंत की ओर से जो तथ्य प्रस्तुत किये गए, मैं समझता हूँ वे पूरी तरह से सामने नहीं आये हैं. श्री सावंत की ओर से कहा गया कि…
1) 10/09/2008 को शाम 6:30 टाइम्स नाऊ चैनल की 'प्रोविडेंट फंड घोटाला' खबर के दौरान श्री सावंत का छायाचित्र दिखाया गया.
2) श्री सावंत के निर्देश पर उनके सचिव श्री कामत ने उसी दिन 6:30 से 8:30 के दरमियान चैनल को फोन कर गल्ती को बताया.
3) फोन करने के बाद भी चैनल ने कोई भी सुधारात्मक कदम नहीं उठाया.
4) चैनल की तरफ से अगले 4-5 दिनों तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी.
5) 15/09/2008 को श्री सावंत ने चैनल को पत्र लिखा जो की चैनल को 18/09.2008 को प्राप्त हुआ.
6) चैनल की ओर से माफीनामा/ स्पष्टीकरण, प्रथम बार, 23/09/2008 को दिखाया गया, पत्र प्राप्ति के 5 दिन बाद.
सौ करोड़ का जुर्माना उचित है या अधिक है, ये बहस का विषय हो सकता है. पर अपनी गल्ती सुधारने में टाइम्स नाऊ कोई तत्परता नहीं दिखाई जिसका के अब रोना रोया जा रहा है.
कुशल प्रताप सिंह
बरेली
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