वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर लाशों पर लगने वाले सट्टे की खबर प्रसारित किये जाने के मामले में पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए मीडियाकर्मी आसिफ को आज अदालत ने जमानत दे दी। पुलिस ने आसिफ के ऊपर धोखाधड़ी और धार्मिक उन्माद फैलाने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। अदालत ने पुलिस द्वारा लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया जमानती मानते हुए आसिफ की जमानत मंजूर कर ली।
आसिफ की रिहाई को मीडियाकर्मी अपनी जीत के रूप में देख रहे हैं। एसएसपी की तानाशाही के खिलाफ संघर्ष कर रहे मीडियाकर्मी अब एकजुट हो जवाब देने की तैयारी में लग गए हैं। लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को अपने अर्दब में लेने के लिए एसएसपी ने लाशों पर लगने वाले सट्टे की खबर के प्रसारण के बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के कई पत्रकारों के खिलाफ नोटिस जारी किया था।
ये खबर वाराणसी से प्रकाशित होने वाले एक दैनिक समाचार पत्र में भी छपी थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। एसएसपी द्वारा बदले की भावना से की जा रही एकतरफा कार्रवाई से क्षुब्ध पत्रकारों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से भी की, लेकिन एसएसपी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। एसएसपी की मनमानी को रोकने के लिए पत्रकारों ने आगे की लड़ाई अपनी कलम के दम पर लड़ने का निश्चय कर लिया है। आज कोर्ट ने आसिफ को जमानत देकर एसएसपी की तानाशाही को करारा जवाब दिया है।


बनारस से पत्रकार रामसुंदर मिश्रा द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.






