इतना तो पता चल ही गया है आपको की राहुल गांधी की छवि को सुधारने का ठेका एक विदेशी कंपनी को मिला है. लेकिन शायद ये नहीं जानते होंगे आप की वो कंपनी कौन सी है. जी हाँ. ये वही कंपनी है जिसने भोपाल में गैस के द्वारा जनसंहार करने वाली कंपनी यूनियन कार्बाइड की छवि सुधरने का जिम्मा लिया था. 'बर्सन-मार्सलेटर' नाम की इस कंपनी को जनमत को प्रभावित करने में महारत हासिल है.
इस कंपनी की सेवायें कई सैन्य तानाशाहों ने ली है. इसके आलावा मानव अधिकारों के अभियानों के खिलाफ कोर्पोरेट कंपनियों की छवि सुधारने का काम भी ये करती रही है. कनाडा-अमेरिका आदि देश भी इसकी सेवायें लेते रहे हैं. इसी कंपनी ने अलास्का में तेल रिसाव मामले में फंसी कंपनी 'एक्सन शिपिंग' की भी मदद की थी. 500 करोड रूपये का कांग्रेस का यह प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है जिसमें जापानी कंपनियों की भी मदद ली जा रही है.
आपको याद है न की यूनियन कार्बाइड के माई-बाप वारेन एंडरसन को तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी के
आदेश पर तब के सीएम अर्जुन सिंह ने ससम्मान भोपाल और बाद में देश से बाहर किया था. कांग्रेस के 'संकट' के समय ये कंपनियां तो उपकार चुकायेगी ही न? तो फेसबुक समेत हर माध्यमों पर कांग्रेस के आक्रामक प्रचार अभियानों के लिए तैयार हो जाइए.
पत्रकार और बीजेपी एक्टिविस्ट पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से.






