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बलात्कारी बाबा दविंदा नंद को दंड दिलाने पीड़िता पहुंची जंतर-मंतर, मीडिया सपोर्ट करे

केदारनाथ हादसे के पीड़ितों के साथ विजय बहुगुणा सरकार द्वारा किए जा रहे छलावे के खिलाफ चल रहे धरने की कवरेज़ के लिए मैं जंतर-मंतर गया। आन्दोलनकारियों का आरोप है कि विजय बहुगुणा के इर्द-गिर्द मौजूद रहने वाले लोग पीड़ितों के लिए देश भर से भेजी गई राहत सामग्री से अपना घर भर रहे हैं या फिर उसे बेच कर अपने बंगले बनवा रहे हैं। इस हादसे ने बहुगुणा के कई चमचों को करोड़पति बना दिया। इस बात में वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे तथ्यों पर भरोसा करें तो दम भी लगता है।

केदारनाथ हादसे के पीड़ितों के साथ विजय बहुगुणा सरकार द्वारा किए जा रहे छलावे के खिलाफ चल रहे धरने की कवरेज़ के लिए मैं जंतर-मंतर गया। आन्दोलनकारियों का आरोप है कि विजय बहुगुणा के इर्द-गिर्द मौजूद रहने वाले लोग पीड़ितों के लिए देश भर से भेजी गई राहत सामग्री से अपना घर भर रहे हैं या फिर उसे बेच कर अपने बंगले बनवा रहे हैं। इस हादसे ने बहुगुणा के कई चमचों को करोड़पति बना दिया। इस बात में वक्ताओं द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे तथ्यों पर भरोसा करें तो दम भी लगता है।

जंतर-मंतर पर इस धरने से सिर्फ 10 मीटर की दूरी पर खामोश बैठी एक अबला को देख मेरा ध्यान बरबस ही उसकी ओर खिंच गया। धरना स्थल पर आखिर यह अकेली महिला किस नाइंसाफी के लिए जंग लड़ रही है। इस उत्सुकता से मेरे कदम बरबस ही उसकी ओर बढ़ गए। पूछा कि कहां से आई हो, तो पता बृज धाम बताया। यहां क्या लेने आई हो, पूछा तो फफक-फफक कर रोने लगी। और सुबकते हुए जो आप बीती बयान की तो बृज की इस ग्वालन की जिंदगी को नर्क बनाने वाला एक तथा कथित कृष्ण भक्त निकला।

यह खबर इंसानियत को तार-तार करने वाले एक ऐसे भगवाधारी को बेनकाब करती है जो पुलिस तंत्र, अपराधियों व नेताओं की मिली भगत से कृष्ण भक्ति का चोला ओढ़ कर न सिर्फ महिलाओं को अपनी हवस का शिकार बनाता है बल्कि जुबान

बलात्कारी बाबा

बलात्कारी बाबा

खोलने पर उन्हें अपनी ऊंची पहुंच के चलते झूठे मामले गढ़ कर उन्हें इस कदर उलझा देता है कि इंसान जीते-जी मरने के लिए मजबूर हो जाए। उत्तर प्रदेश में पुलिस कैसे काम करती है, बाबा यह न सिर्फ बखूबी जानता है बल्कि पुलिस की इस कमजोरी का धड़ल्ले से इस्तेमाल भी करता है।

इस मामले में पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत की गई तस्वीर से अदालत भी हैरान है। महिला एवं उसके पति पर बनाया गया तथाकथित अपहरण का एक मामला अदालत में विचाराधीन है इसीलिए उसका जिक्र हम अदालत का सम्मान करते हुए नहीं कर सकते। किंतु वर्तमान में महिला ने बाबा द्वारा बनाए गए तथाकथित झूठे मामले से डेढ़ साल बाद जमानत मिलने के उपरांत बाबा की जो हकीकत बयान की है वह न सिर्फ हैरतअंगेज है बल्कि पुलिस तंत्र की अपराधियों से सांठ-गांठ की नंगी तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।

मामले में पुलिसिया कहर एवं कार्यप्रणाली का सहज अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि 7 जुलाई 2011 को कृष्ण नगरी बृजधाम में हुए बलात्कार व उसके उपरांत 26 दिसंबर 2011 तक लगातार होते रहे एक महिला के शारीरिक शोषण की रिपोर्ट लिखाने जब एक महिला थाने गई तो उसकी बात को नज़रअन्दाज़ कर लचर कानूनों का भरपूर फायदा उठाते हुए

पीड़िता की बेटी, जिसके साथ भी बाबा ने दुराचार का प्रयास किया

पीड़िता की बेटी, जिसके साथ भी बाबा ने दुराचार का प्रयास किया

उसके पूरे के पूरे खानदान को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। पुलिस ने अपने तमाम हथकंडों का खुलकर प्रयोग किया।

महिला व उसके पति के फोन पर जो भी फोन आया उसी का नाम एफआईआर में लिखते गए और सबको एक साथ सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। कहानी एवं साक्ष्य बेहद शातिराना तरीके से बुने गए। किंतु अब अदालत को इस पुलिसिया कहानी पर शक होने लगा है। संभवतः इसीलिए अदालत ने महिला को जमानत पर रिहा कर पुलिस को बाबा के खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।

सात जुलाई 2011 के मामले में ठीक 2 साल 8 दिन बाद न्यायालय के हस्तक्षेप से 15 जुलाई 2013 को  वृन्दावन थाने में स्वामी दविंदा नन्द तीर्थ के खिलाफ अपराध संख्या 480/13 के तहत भारतीय दण्ड संहिता की धारा 376, 354- ए, 354 बी, 376/511/506 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है किंतु बाबा निर्भय है। पुलिस मुठ्ठी में है और सत्ता में बैठे मंत्री जेब में। सब सुबह-शाम चरण छूते हैं। महिला की व्यथा को पुलिस बिना जांच के दरकिनार कर रही है, स्थानीय मीडिया भी बाबा से थर्राता है।

मामले से सम्बन्धित खबरें तो छप रही हैं किंतु घिसे-पिटे पुलिसिया बयानों पर आधारित। महिला को घर से उठाने की लगातार धमकियां दी जा रही हैं। उसके व उसकी मुंहबोली बेटी के साथ गैंग रेप की धमकियों का क्रम भी जारी है। एफआईआर की शैली बयां करती है कि बाबा को बचाने का हर रास्ता एफआईआर में मौजूद है।

मामला बेहद संगीन है। बाबा के आश्रम के इर्द-गिर्द पुलिस की गाड़ियां ड्यूटी बजा रही हैं। बाबा को बचाने व महिला को रास्ते से हटाने के लिए रणनीतियां तैयार हो रही हैं। कौन महिला का साथ दे रहा है और किस हद तक वह साथ दे सकता है, इसका आकलन किया जाने लगा है।

आइए अब आपको बताते हैं बाबा की दरिंदगी। बाबा ने न सिर्फ एक महिला से प्रसाद में बेहोशी की दवा मिलाकर उसके साथ बलात्कार किया, बल्कि उसकी अश्लील फिल्म भी बनाई। लगभग 6 महीने तक डरा-धमका कर उसका शोषण भी करता रहा। बाबा ने 14 साल की बच्ची को नग्न कर दिया और उससे भी बलात्कार को कोशिश की। महिला के शोर मचाने पर बात खुली तो उक्त चक्रव्यूह रच कर बाबा ने कान्हा की नगरी को दागदार कर दिया।

बाबा के हवस की शिकार पीड़िता न्याय के लिए जंतर मंतर पर बैठी है

बाबा के हवस की शिकार पीड़िता न्याय के लिए जंतर मंतर पर बैठी है

गुजरात से ताल्लुक रखने वाला बाबा दविंदा नन्द तीर्थ सेवा संस्थान का प्रमुख है। इस जघन्य अपराध की पटकथा यहां से शुरू होती है कि बाबा के पास हीरा सिंह नाम का एक ड्राईवर काम करता था। नीरू (काल्पनिक नाम) हीरा सिंह की पत्नी है। बाबा द्वारा दी जाने वाली नाम मात्र की पगार से मुश्किल से हीरा सिंह जीवन बसर करता था। आर्थिक तंगी के चलते हीरा ने बाबा से अपनी पत्नी को भी आश्रम में नौकरी देने की बात कही तो बाबा ने हीरा सिंह के इस प्रस्ताव को खुश होकर स्वीकार कर लिया और हीरा की पत्नी नीरू को अपनी निजी सेविका के रूप में आश्रम में रख लिया।

अब नीरू को बाबा के पांव दबाने और मालिश करने का काम सौंपा गया जिसे नीरू भी एक पहुंचे हुए सन्त की सेवा समझ खूब मन लगाकर करने लगी किंतु बाबा की बुरी नीयत का एहसास उसे जब तक हो पाता तब तक बाबा के भेष में छुपा भेडि़या उसकी इज्जत तार-तार कर उसे अपनी दरिंदगी से रौंद चुका था।

पुलिस में दर्ज करवाए अपने बयान में नीरू ने कहा है कि 7 जुलाई 2011 को बाबा ने उसका हाथ सहलाते हुए कहा कि तू मेरी मन लगा कर सेवा किया कर मैं तेरे सारे कष्ट दूर कर दूंगा। कुछ देर बाद बाबा ने मुझे 4 पेड़े खाने को दिए और कहा कि आज प्रभु की तुझ पर कृपा हो गई है, यह पेड़े खा ले, इससे तेरे सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। नीरू ने जैसे ही यह पेड़े खाए वह बेसुध हो गई और बाबा ने उसके साथ बलात्कार किया। बलात्कार के बाद बाबा ने उसे डराया-धमकाया व जुबान बंद रखने के लिए प्रलोभन भी दिए। इसके बाद नीरू कई दफा बाबा की हवश का शिकार बनी।

पुलिस में दर्ज बयान में उसने कहा है कि एक महीने के लिए बाबा उसे बेंग्लौर लेकर गया जहां बाबा का फ्लैट है। जब वह किचन में काम कर रही थी तो उसे अपनी मुंहबोली बेटी की चीखने की आवाज सुनाई दी। वह बाबा के कमरे में गई तो वहां बाबा ने लड़की के कपड़े उतार दिए थे और उससे बलात्कार का प्रयास कर रहा था इसी बीच वहां नीरू का पति हीरा आ गया। बाबा की खूब पिटाई हुई। बात थाने जाने की होने लगी तो बाबा ने पैर पकड़ लिए और आइन्दा ऐसा न करने की बात कही। उसने कहा कि एक बार छोड़ दो मैं तुम्हें मालामाल कर दूंगा। बैंग्लौर में कोई जान-पहचान न होने के कारण नीरू, उसकी बेटी व उसका पति वृन्दावन आ गए। वृन्दावन में रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही तो पुलिस ने यह कह कर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया कि मामला बैंग्लौर का है यहां रिपोर्ट दर्ज नहीं हो सकती।

इस बीच बाबा ने पैसे का लालच देकर हीरा को शान्त कर दिया। लगभग दो तीन-महीने तो बाबा शान्त रहा लेकिन उसके बाद फिर उसने नीरू पर दबाव बनान शुरू कर दिया कि अपनी बेटी को लेकर यहां आ जा वरना मैं तुझे बर्बाद कर दूंगा। बाबा नीरू की अश्लील फिल्म जो उसने पहले से बना कर रखी थी सबको दिखाने की धमकी देने लगा। नीरू ने बताया कि बाबा के दबाव में आकर एक बार फिर वह आश्रम जाने लगी किन्तु अब वह बाबा से पर्याप्त दूरी रखने लगी। एक दिन बाबा ने नीरू को आश्रम में अकेला पा कर दबोच लिया व बलात्कार का प्रयास करने लगा कि तभी वहां नीरू का पति हीरा व आश्रम का एक अन्य कर्मचारी नीरज आ गए।

दोनों ने बाबा को नीरू के साथ गन्दी हरकत करते अपनी आंखों से देख लिया था। दोनों ने इस रोज भी बाबा की खूब पिटाई की। हीरा, नीरज व नीरू बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने थाने पहुंचे किंतु पुलिस ने बाबा के दबाव में मामला दर्ज ही नहीं किया और पुलिस की मदद से अपने अपहरण की एक मनगढ़ंत कहानी बनाकर हीरा, नीरू व उसके परिवार के 25 सदस्यों को जेल भिजवा दिया। नीरू के पति समेत उसके 20 से अधिक परिजन आज भी सलाखों के पीछे हैं। नीरू के पास बाबा की ज्यादतियों के गवाह भी हैं और सबूत भी किंतु कोई उसकी बात सुनने को राजी नहीं।

29 जुलाई, सोमवार को नीरू कुछ सामान लेने बाजार गई तो बाबा के गुर्गों ने उसे घेर दिया। 9 बजकर 13 मिनट पर फोन कर उसने इस घटना की जानकारी इस पत्रकार को दी। नीरू इंसाफ की इस लड़ाई में बिल्कुल अकेली है। अत्यन्त गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली नीरू को बेहद धनाढ्य व पहुंच वाला यह बाबा कहीं भी, कुछ भी नुकसान पहुंचा सकता है। नीरू के 18 वर्षीय छोटे भाई को भी बाबा ने 8 महीने पहले पुलिस से मिल कर चोरी के एक झूठे इल्जाम में सिर्फ इसलिए गिरफ्तार करवा दिया ताकि वह सलाखों के पीछे कैद अपनी बहन की रिहाई के लिए कोई प्रयास न कर सके। यह समाचार प्रभावी ढंग से मीडिया की सुर्खियां बन सके तो नीरू की जान बच सकती है। अन्यथा जो हालात मैंने महसूस किए उसके मुताबिक कुछ दिनों बाद ''एक थी नीरू'' शीर्षक के साथ प्रकाशित करना पड़ेगा।

गोपाल शर्मा की रिपोर्ट.

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