ये वही लोग हैं जो आसाराम को पानी पी-पीकर कोस रहे थे।
ये वही लोग हैं जो तेजपाल को कोस तो रहे थे लेकिन, "लेकिन", "किंतु". "परंतु" लगाकर।
ये वही लोग हैं जो सहानुभूति के साथ ही मृतक को आरोप से भी मुक्त कर रहे हैं।
बलात्कार के किसी आरोपी के आत्महत्या कर लेने से अपराध कम नहीं हो जाता। ना ही इस या उस तरफ कुछ भी साबित हो जाता है। जिनके निजी संबंध रहे उनकी सहानुभूति ठीक है, लेकिन ऐसे लोगों का मृतक को हीरो बनाकर प्रस्तुत करना उनकी पीड़िता के प्रति घोर असहानुभूति का परिचायक है।
ध्यान दें कि आत्महत्या का सीधा संबंध बलात्कार के आरोप से है। ध्यान दें कि सहानुभूति देने वाले लिख यूँ रहे हैं कि "हम हार गये" "अभी तो लड़ना था" इत्यादि। किससे हार गये? पीड़िता से? किससे लड़ना था? पीड़िता से??
हितेन्द्र अनंत के फेसबुक वॉल से.
Smita Singh : आत्महत्या आपके अपराध की स्वीकारोक्ति भले न हो, लेकिन आपकी बेगुनाही का लाइसेंस भी नहीं है। आरोपी की आत्महत्या पीड़िता के तकलीफ या उसके साथ हुई नाइंसाफी को छोटा नहीं करती। मृतक के प्रति मेरी पूरी संवेदना है, लेकिन आत्महत्या का समर्थन न मैंने जिया खान का किया था, न किसी और का करूंगी। बाकी कमेंट करिए पर बाप बनने की कोशिश मत करिएगा। असंसदीय भाषा नहीं चलेगी। बहुत कांपते दिल के साथ पोस्ट लिखा है, क्यूंकि जानती हूं कुछ करीबी दोस्त नाराज हो सकते हैं।
स्मिता सिंह के फेसबुक वॉल से.
मूल खबर…
इंडिया टीवी के चरित्र हनन अभियान से दुखी होकर सोशल एक्टीविस्ट खुर्शीद अनवर ने आत्महत्या कर ली





