सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव शायद कुछ गलत नहीं कर रहे हैं कि यूपी में थाने और तहसील भ्रष्टाचार और प्रताड़ना के अड्डे के रूप में तब्दील हो चुके हैं. शायद वे एक बात कहना भूल गए कि मीडिया भी दबंगों और पैसे वालों की रखैल हो चुकी है. गोरखपुर में एक पर्चा चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें एक बलत्कार पीडिता ने पुलिस की कारस्तानी बयान की है. अभी देवरिया में एएसपी के बयान का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि अमर उजाला अखबार के साथ बंटे पर्चे ने एक बार फिर पुलिस की पोल खोलकर रख दिया है.
खैर, अब यह तो जांच का विषय है कि इसमें कितनी सच्चाई है या इस पर्चे में कही गई बातें कितनी सही या गलत हैं. पर अगर यह घटना सही है तो इसमें लगाए गए आरोप निश्चित रूप से गंभीर हैं. न केवल पुलिस पर बल्कि मीडिया पर भी. पुलिस ने जहां पीडिता की मदद नहीं की, वहीं मीडिया वाले पुलिस की रखैल बनकर एक बलात्कार पीडिता की कोई मदद नहीं की. हालांकि अब लोग नए माध्यमों और तरीकों से अपने साथ होने वाली घटनाओं को सामने ला रहे हैं लेकिन मुख्य धारा की मीडिया अपनी जिम्मेदारियां निभाने की बजाय अपना खजाना भरने में लगा हुआ है. आप भी पढि़ए पीडिता द्वारा बांटा गया पम्पलेट.







