2012 विधान सभा चुनावों के समय सुर्ख़ियों में आये बस्ती कमिश्नर अनुराग श्रीवास्तव और सिद्धार्थनगर एसपी मोहित गुप्ता विवाद में की गयी तमाम संस्तुतियां उत्तर प्रदेश शासन द्वारा ठन्डे बस्ते में डाल दी गयीं. लखनऊ स्थित आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर द्वारा गृह विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस सम्बन्ध में आईएएस अफसर वीएन गर्ग और आईपीएस एके गुप्ता की दो सदस्यीय जांच दल ने कई संस्तुतियां की थी.
इनमें अनुराग श्रीवास्तव से स्पष्टीकरण मांगने के अलावा सिद्धार्थनगर की डीएम चैत्रा वी और एसपी मोहित गुप्ता के बीच तालमेल की अत्यधिक कमी पूरी तरह सिद्ध होने के कारण अलग से जांच समिति बना कर इनकी जिम्मेदारी तय करने की संस्तुति थी.
साथ ही बेहतर गवर्नेंस के लिए जिलों के डीएम और एसपी के बीच बेहतर तालमेल की विशेष जरूरत होने के कारण शासन स्तर पर सकारात्मक नीतिगत निर्णय लिए जाने की संस्तुति की गयी थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जांच समिति के इन प्रस्तावों को अनुमोदित भी कर दिया था, लेकिन चुनाव खत्म होते ही मामला पूरी तरह भुला दिया गया. इस तरह डीएम और एसपी के बीच बेहतर तालमेल का एक बेहतरीन प्रयास वहीँ समाप्त हो गया.







