लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने यहां बताया कि अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण बाबू सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री को बीएसपी से हमेशा के लिये निष्कासित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि श्री कुशवाहा ने कभी सीधे चुनाव लड़ने की हिम्मत नहीं दिखायी। उन्होंने कहा कि श्री कुशवाहा ने पार्टी से अनुरोध किया था कि यदि उन्हें एमएलसी बना दिया जाये तो मुझे अपने समाज को जोड़ने में थोड़ी मदद मिल जायेगी। उनके इस अनुरोध पर पार्टी ने उन्हें दो बार एमएलसी बनाया।
श्री मौर्य ने कहा कि इसके अलावा श्री कुशवाहा ने पार्टी हाईकमान से अनुरोध किया था कि यदि उन्हें मंत्री बना दिया जाये तो उनके लिये पूरे प्रदेश में पार्टी से अपने समाज को जोड़ना और ज्यादा आसान हो जायेगा। श्री कुशवाहा के इस अनुरोध को स्वीकृत करते हुए पार्टी ने उन्हें बड़े विभाग का मंत्री बनाया। इसके बाद श्री कुशवाहा ने कुछ समय के बाद पार्टी हाईकमान से यह भी अनुरोध किया कि यदि उन्हें परिवार कल्याण विभाग का मंत्री बना दिया जाये तो उन्हें इस पद के माध्यम से प्रदेश में शोषितों, दलितों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों की सेवा करने का अवसर मिलेगा। इस पर उन्हें परिवार कल्याण विभाग का मंत्री भी बनाया गया।
श्री मौर्य ने कहा कि लेकिन दुःख की बात यह है कि इस विभाग के श्री कुशवाहा ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं किया। जिसके कारण श्री कुशवाहा के मंत्री रहते हुए ही इस विभाग में दो सीएमओ की हत्या हुई तथा एक और की भी जिला कारागार में मृत्यु हुई। श्री कुशवाहा के मंत्री रहने के दौरान इस प्रकार के कृत्य होने पर सरकार और पार्टी की छवि खराब होते देख उन्हें बुलाकर उनसे मंत्री पद से त्याग पत्र ले लिया गया और फिर इस विभाग की जिम्मेदारी श्री नसीमुद्दीन सिद्दकी जी को सौंप दी गयी।
श्री मौर्य ने कहा कि विरोधी पार्टियों तथा इनके परिवार जनों की मांग को ध्यान में रखते हुए माननीया मुख्यमंत्री जी द्वारा परिवार कल्याण विभाग में हुई इन हत्याओं तथा मृत्यु की जांच सी0बी0आई0 को सौंप दी गयी। उन्होंने कहा कि इसके बाद श्री कुशवाहा ने जो कुछ किया, वह किसी से छिपा नहीं है। वे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो गये तथा उनके द्वारा लगातार पार्टी को छति पहुंचाने का कार्य किया जाने लगा। इसके साथ ही उन्होंने बी0एस0पी0 से जुड़े अपने समाज के लोगों को, अपने घर पर बुलाकर, उन्हें पार्टी के खिलाफ काम करने के लिये भी काफी उकसाया गया और इसी ही प्रकार की बीएसपी कार्यकर्ताओं द्वारा भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं।
बीएसपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे यह भी बताया कि हाल ही में विधान परिषद के आहूत सत्र में श्री कुशवाहा ने भाग तक भी नहीं लिया, इसके अलावा उन्होंने विपक्षी पार्टियों के सदस्यों को सरकार के विरूद्ध हंगामा करने के लिये भी भड़काया, ताकि आम जनता की नजरों में पार्टी और सरकार की छवि खराब हो। उन्होंने राज्य सरकार के सम्बन्ध में असत्य एवं भ्रामक बयानबाजी करके सरकार की प्रतिष्ठा खराब करने की कोशिश की। उन्हांेने कहा कि श्री कुशवाहा ने यह सभी कार्य अपने निजी फायदे के लिये किये हैं, उनको पार्टी की मूवमेन्ट से कोई लेना देना नहीं है, वह भाईचारा कमेटी से जुड़े लोगों की उपेक्षा कर रहे थे। जब यह जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष को मिली तो उन्होंने इन समितियों को भंग कर इसकी जिम्मेदारी पार्टी के अन्य लोगों पर सौंप दी।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि श्री कुशवाहा एनआरएचएम तथा सीबीआई जांच से अपने को बचाने के लिये कांग्रेस पार्टी के लगातार सम्पर्क में भी हैं। इसके अलावा श्री कुशवाहा विपक्षी पार्टी के नेताओं से मिलकर सरकार एवं पार्टी के विरूद्ध षड़यंत्र बराबर रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब जब श्री कुशवाहा चारों तरफ से कानूनी शिकंजे में घिर रहे हैं, तो उन्हें पार्टी के अपने सहयोगी मंत्री श्री नसीमुद्दीन सिद्दकी, मंत्रिमण्डलीय सचिव तथा प्रमुख सचिव गृह से अपनी जान का खतरा होने लगा है। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि जब श्री कुशवाहा पार्टी में थे और एक मंत्री के रूप में इन लोगों के साथ लम्बे समय तक काम किया, तो इन्हें, इन लोगों से अपनी जान का खतरा नजर क्यों नहीं आया। श्री मौर्य ने कहा कि बीएसपी एक अनुशासनप्रिय राष्ट्रीय पार्टी है और किसी भी कीमत पर पार्टी विरोधी आचरण तथा निर्देशों का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं करती। इसीलिए श्री कुशवाहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण इन्हें हमेशा के लिये पार्टी से निकाल दिया गया है।





